Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी आज, आखिर क्यों नहीं जलाया जाता घर का चूल्हा और क्या है इसके पीछे छिपी रहस्यमयी परंपरा?

Sheetala Ashtami 2026: आज बुधवार 11 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी (बसोड़ा) का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन घरों में कई परंपराओं का पालन होता है, जिसमें मुख्य है चूल्हा न जलाना। यह पर्व स्वास्थ्य और खुशहाली की मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।

Sheetala Ashtami 2026: शीतला अष्टमी आज, आखिर क्यों नहीं जलाया जाता घर का चूल्हा और क्या है इसके पीछे छिपी रहस्यमयी परंपरा?

(Sheetala Ashtami 2026/ Image Credit: IBC24 News)

Modified Date: March 11, 2026 / 01:42 pm IST
Published Date: March 11, 2026 1:36 pm IST
HIGHLIGHTS
  • शीतला अष्टमी को कई जगह बसोड़ा भी कहा जाता है।
  • इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता।
  • माता शीतला को ठंडा भोजन भोग के रूप में अर्पित किया जाता है।

Sheetala Ashtami 2026: हिंदू धर्म में कई पर्व सीधे लोक परंपराओं और आस्था से जुड़े होते हैं। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पर्व है शीतला अष्टमी, जिसे कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है। इस दिन माता शीतला की पूजा करके परिवार की स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और रोगों से सुरक्षा की कामना की जाती है। यह पर्व धार्मिक आस्था और स्वास्थ्य दोनों का संदेश देता है।

शीतला अष्टमी की तिथि

धार्मिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष शीतला अष्टमी 11 मार्च 2026 को दोपहर 1 बजकर 54 मिनट से शुरू होकर यह 12 मार्च को सुबह 4 बजकर 19 मिनट पर समाप्त होगी। यह पर्व वर्ष के बदलते मौसम और स्वास्थ्य पर ध्यान देने का संकेत भी देता है।

क्यों नहीं जलाया जाता चूल्हा?

शीतला अष्टमी के दिन चूल्हा नहीं जलाने की खास परंपरा है। मान्यता है कि माता शीतला को ठंडा भोजन अर्पित किया जाता है। इसलिए सप्तमी के दिन ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। अगले दिन वही ठंडा भोजन माता को भोग लगाया जाता है और परिवार के लोग भी उसी भोजन को ग्रहण करते हैं। इसे कई जगहों पर बसोड़ा भी कहा जाता है। यह परंपरा स्वास्थ्य और रोगों से रक्षा का संदेश भी देता है।

पूजा का तरीका

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद माता शीतला की पूजा की जाती है। भक्त ठंडा भोजन, दही, चावल, पूरी, गुड़ और हलवा आदि भोग के रूप में अर्पित करते हैं। कई जगह महिलाएं मंदिर जाकर शीतला माता की कथा सुनती हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करती हैं। पूजा के बाद वही ठंडा भोजन प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

माता की पूजा का महत्व

शीतला अष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य का भी संदेश देती है। यह स्वच्छता, संतुलित भोजन और सावधानी का प्रतीक है। माता शीतला को चेचक और अन्य संक्रामक रोगों की देवी माना जाता है। जो भक्त श्रद्धा से पूजा करते हैं, उनके घर से रोग और संक्रमण दूर रहते हैं। इस प्रकार यह पर्व आस्था, परंपरा और स्वास्थ्य का अनोखा संगम है।

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लेखक के बारे में

मैं 2018 से पत्रकारिता में सक्रिय हूँ। हिंदी साहित्य में मास्टर डिग्री के साथ, मैंने सरकारी विभागों में काम करने का भी अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें एक साल के लिए कमिश्नर कार्यालय में कार्य शामिल है। पिछले 7 वर्षों से मैं लगातार एंटरटेनमेंट, टेक्नोलॉजी, बिजनेस और करियर बीट में लेखन और रिपोर्टिंग कर रहा हूँ।