Utpanna Ekadashi: 15 यां 16 नवंबर, कब रखें उत्पन्ना एकादशी व्रत? जानें तिथि, कथा, महत्व और इस आसान पूजा विधि से पाएं, 1000 यज्ञों के बराबर फल

साल में 24 एकादशियां आती हैं, इनमें उत्पन्ना एकादशी सबसे खास है क्योंकि इसी दिन एकादशी देवी की उत्पत्ति हुई थी। उत्पन्न एकादशी का व्रत 15 यां 16 कब रखा जायेगा? आईये जानतें हैं..

Utpanna Ekadashi: 15 यां 16 नवंबर, कब रखें उत्पन्ना एकादशी व्रत? जानें तिथि, कथा, महत्व और इस आसान पूजा विधि से पाएं, 1000 यज्ञों के बराबर फल

Utpanna Ekadashi 2025

Modified Date: November 14, 2025 / 07:05 pm IST
Published Date: November 14, 2025 6:53 pm IST
HIGHLIGHTS
  • 15 या 16 नवंबर? उत्पन्ना एकादशी की सही डेट 2025
  • उत्पन्ना एकादशी: 1000 यज्ञों के बराबर पुण्य, सिर्फ 1 व्रत में!

Utpanna Ekadashi 2025: एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। उत्पन्ना एकादशी हिंदू पंचांग की सबसे पवित्र एकादशियों में से एक है। यह मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की 11वीं अर्थात एकादशी तिथि को मनाई जाती है। उत्पन्ना एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक पुण्यदायी व्रत है जो जीवन में सुख, शांति, पापों का नाश और मोक्ष प्रदान करता है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान विष्णु बेहद्द प्रसन्न होते हैं।

Utpanna Ekadashi 2025: कब रखें उत्पन्न एकादशी व्रत?

व्रत की तिथि: 15 नवंबर 2025, शनिवार (मार्गशीर्ष मास, कृष्ण पक्ष की एकादशी)।
एकादशी तिथि प्रारंभ: 15 नवंबर 2025, रात्रि 12:49 बजे से।
एकादशी तिथि समाप्त: 16 नवंबर 2025, रात्रि 02:37 बजे तक।
उदया तिथि के अनुसार व्रत 15 नवंबर को रखा जाएगा।

Utpanna Ekadashi 2025: उत्पन्ना एकादशी का महत्व

उत्पन्ना एकादशी को “उत्पत्ति एकादशी” भी कहते हैं। यह सभी एकादशियों की “जननी” मानी जाती है। इस व्रत से हजारों यज्ञों और दानों के बराबर पुण्य मिलता है। सभी पाप नष्ट होते हैं, मोक्ष की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति साल भर एकादशी व्रत शुरू करना चाहते हैं, उन्हें इसी एकादशी से शुरुआत करनी चाहिए।

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Utpanna Ekadashi 2025: पूजन एवं व्रत विधि

  • दशमी तिथि (14 नवंबर) से तैयारी शुरू करें: सात्विक भोजन करें, एक समय भोजन लें।
    एकादशी के दिन (15 नवंबर)
  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा जल मिलाकर स्नान करें।
  • घर के मंदिर को साफ करें, भगवान विष्णु की मूर्ति यां फोटो स्थापित करें।
  • एकादशी के दिन पीले वस्त्र पहनें, तुलसी पत्र, फल, फूल, धूप-दीप से पूजा करें।
  • “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमः विष्णवे” मंत्र का जाप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या एकादशी कथा का पाठ करें।
  • निर्जला या फलाहार व्रत रखें। इस दिन अन्न (अनाज, नमक, चावल वर्जित) का परित्याग करें।
  • शाम को दीपदान करें, रात्रि जागरण करें।
  • द्वादशी (16 नवंबर) को पारण करें: ब्राह्मण भोजन करवाएं, दान करें।

Utpanna Ekadashi: उत्पन्ना एकादशी की कथा

शास्त्रानुसार पद्मपुराण में, एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से पुण्यमयी एकादशी तिथि की उत्पत्ति के विषय में पूछा, तब उन्होंने कहा: हे पार्थ! सत्ययुग में मुर नामक भयंकर दानव ने देवराज इन्द्र को पराजित करके जब स्वर्ग पर अपना अधिकार कर लिया, तब सब देवता महादेव जी के पास पहुंचे। महादेव सभी देवताओं को साथ लेकर क्षीर सागर गए। वहां शेषनाग की शय्या पर योग-निद्रा में लीन भगवान विष्णु को देखकर देवराज इन्द्र ने उनकी स्तुति की।

देवताओं के अनुरोध पर श्री हरी ने उस अत्याचारी दैत्य पर आक्रमण कर दिया। सैकडों असुरों का संहार करके भगवान विष्णु थककर एक गुफा में सो गए। दानव मुर ने भगवान विष्णु को मारने के उद्देश्य से जैसे ही उस गुफा में प्रवेश किया, वैसे ही श्री हरी के शरीर से दिव्य अस्त्र-शस्त्रों से युक्त एक अति रूपवती कन्या उत्पन्न हुई। उस कन्या ने अपने हुंकार से दानव मुर को भस्म कर दिया। नारायण ने निद्रा से जागने के पश्चात् पूछा तो कन्या ने उन्हें सूचित किया कि उस दैत्य का वध उस कन्या ने किया है।

भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उस कन्या को वरदान दिया कि तुम “एकादशी” नाम से पूजी जाओगी। जो व्यक्ति कृष्ण पक्ष की एकादशी पर मेरा और तुम्हारा व्रत करेगा, उसे सभी पापों से मुक्ति और मोक्ष मिलेगा।

उत्पन्ना एकादशी को “उत्पत्ति एकादशी” भी कहते हैं क्योंकि इसी दिन भगवान विष्णु के शरीर से एकादशी देवी की उत्पत्ति हुई थी। तब से यह एकादशी “उत्पन्ना” कहलाती है और एकादशी देवी की पूजा की जाती है।

Disclaimer:- उपरोक्त लेख में उल्लेखित सभी जानकारियाँ प्रचलित मान्यताओं और धर्म ग्रंथों पर आधारित है। IBC24.in लेख में उल्लेखित किसी भी जानकारी की प्रामाणिकता का दावा नहीं करता है। हमारा उद्देश्य केवल सूचना पँहुचाना है।

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