#SarkarOnIBC24: चुनावी मौसम में शुरू हुआ ‘फ्रीबीज’ का खेल.. रियायत की रेवड़ियों का पूरा मेनू कार्ड तैयार.. जानने के लिए देखिये ‘सरकार’..

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  • Publish Date - August 30, 2023 / 10:18 PM IST,
    Updated On - August 30, 2023 / 10:18 PM IST

Sarkar On IBC24

Sarkar On IBC24: चुनाव आते ही आम जनता के दिन फिर गए हैं। कोई उन्हें 500 रुपए में गैस सिलेंडर देने का वादा कर रहा है तो कोई सस्ती बिजली देने का। कोई मुफ्त स्कूटी बांट रहा है तो कोई मुफ्त लैपटॉप। और इन सब के बदले उन्हें चाहिए बस वोट। यानी लोकतंत्र के त्योहार में रियायत की रेवड़ी के साथ पूरा MENU CARD तैयार है। एक रिपोर्ट देखिए। पूरा माजरा समझ आ जाएगा। बारिश का मौसम है, तो जाहिर है आसमान से पानी बरसेंगे ही। लेकिन बारिश के साथ-साथ मौसम चुनाव का भी है तो राजनीतिक दलों और सरकारों की तरफ से भी रियायतों की रेवड़ियों की बाढ़ आ गई है।

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इसी साल 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस राजस्थान में BPL परिवारों को 500 रुपए में गैस दे रही है। वहीं मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी ने सरकार बनने पर 500 रुपए में गैस देने की घोषणा की है। बात करें छत्तीसगढ़ की तो ये स्कीम भी सरकार के जेहन में है तो भला केंद्र में बैठी बीजेपी इस रेस में कैसे पीछे रह सकती थी। कांग्रेस हर मंच से यही तोहमत तो बीजेपी और मोदी सरकार पर लगाती आई है तो मोदी सरकार ने भी गैस सिलेंडर के दाम 200 रुपए कम कर दिए।

अगर कदम चुनाव से पहले लिए जाएंगे तो राजनीतिक बयान भी आएंगे। प. बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि I.N.D.I.A गठबंधन के कारण LPG की कीमतें कम हुईं है। इधर गैस सिलेंडर के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों को सितंबर में बिजली बिल में भी राहत मिली है… क्योंकि यहां बिजली थोड़ी सस्ती कर दी गई है। दरअसल प्रदेश में बिजली बनाने की लागत प्रति यूनिट 16 पैसे कम हो गई है। इस वजह से घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली का रेट भी 10 से 12 पैसे प्रति यूनिट घटा दिया गया है। जिन घरों में बिजली की खपत आम लोगों से अधिक है, उन्हें हर यूनिट में 24 पैसे तक का फायदा हो सकता है।

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कुल जमा जोड़ ये कि वोटर भी ख़ुश है कि दो वक्त का इंतज़ाम हो चुका है। जिन नेताओं, जिन पार्टियों को आम जनता की फ़िक्र पूरे पांच साल से नहीं थी। उनके लिए चुनाव के वक्त इस सूखे से सावन में भी अचानक सुविधाओं की बाढ़ आ चुकी है। गैस सिलेण्डर, नाम मात्र के दाम पर। हर महीने रियायतों की रेवड़ी। कहीं पैसे के रूप में कहीं मोबाइल फ़ोन, कहीं स्कूटी, कहीं लैपटॉप के साथ। हालांकि चुनावी रेवड़ी का असर वोटर पर कितना होगा ये कहना मुश्किल है। लेकिन जनता चुनाव से पहले हर राजनीतिक स्ट्रोक को भली भांति समझती है। क्योंकि पब्लिक सब जानती है।

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