PM Rahat Yojana: एक्सीडेंट के बाद अब इलाज होगा बिल्कुल फ्री! इस योजना से मिलेगा लाखों रुपए तक का कैशलेस इलाज, जानें पूरी प्रक्रिया
PM Rahat Yojana: सड़क दुर्घटनाएं हर साल देश में हजारों जिंदगियों को प्रभावित करती हैं। कई बार घायल व्यक्ति समय पर अस्पताल न पहुंच पाने या आर्थिक परेशानी के कारण सही इलाज से वंचित रह जाता है।
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- सड़क हादसे में मिलेगा कैशलेस इलाज।
- 1.5 लाख रुपये तक की सुविधा।
- 112 पर कॉल से तुरंत मदद।
PM Rahat Yojana: नई दिल्ली: सड़क दुर्घटनाएं हर साल देश में हजारों जिंदगियों को प्रभावित करती हैं। कई बार घायल व्यक्ति समय पर अस्पताल न पहुंच पाने या आर्थिक परेशानी के कारण सही इलाज से वंचित रह जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने PM राहत सड़क दुर्घटना योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य स्पष्ट है – सड़क हादसे के तुरंत बाद पीड़ित को बिना किसी आर्थिक दबाव के इलाज सुनिश्चित किया जा सके।
PM Road Accident Relief Scheme: पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित है यह योजना
योजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की निगरानी में लागू की जा रही है और इसे पूरी तरह डिजिटल और तकनीक आधारित बनाया गया है। दुर्घटना की स्थिति में सबसे पहले 112 नंबर पर कॉल करना जरूरी है। इस कॉल के बाद नजदीकी अस्पताल की जानकारी साझा की जाती है, एंबुलेंस की व्यवस्था होती है और पुलिस तथा अस्पताल के बीच डिजिटल सिस्टम के जरिए समन्वय शुरू हो जाता है। इसका लाभ यह है कि घायल व्यक्ति को तुरंत चिकित्सा सहायता मिलती है और इलाज में देरी की संभावना न्यूनतम हो जाती है।
PM Accident Insurance Scheme: 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज
योजना के तहत पात्र व्यक्ति को अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा। यह सुविधा दुर्घटना की तारीख से सात दिनों तक लागू रहेगी। यह लाभ देश की किसी भी सड़क पर हुए हादसे में उपलब्ध है, चाहे वह राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग या ग्रामीण सड़क हो। इलाज शुरू होने के साथ ही दुर्घटना का विवरण डिजिटल पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। इसके बाद पुलिस तय समय सीमा में जांच करती है – सामान्य स्थिति में 24 घंटे और गंभीर स्थिति में 48 घंटे में सत्यापन। इससे फर्जी मामलों को रोका जा सकेगा और वास्तविक पीड़ित को समय पर सहायता मिल सकेगी।
इस योजना में मरीज को सीधे पैसे नहीं दिए जाते। अस्पताल को भुगतान मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड के माध्यम से किया जाता है। यदि दुर्घटना करने वाला वाहन बीमित है तो राशि बीमा कंपनियों के माध्यम से दी जाती है, और यदि वाहन बीमित नहीं है या मामला हिट एंड रन है तो भुगतान सरकारी फंड से किया जाएगा। राज्य की स्वास्थ्य एजेंसी 10 दिनों के भीतर स्वीकृत दावे का निपटान करती है, जिससे अस्पतालों को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित है। दुर्घटना की एंट्री eDAR सिस्टम में दर्ज होती है, अस्पताल इलाज और बिलिंग का रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड करते हैं, और पुलिस प्रमाणन तथा क्लेम प्रोसेसिंग भी ऑनलाइन होती है। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और समय की बचत होती है। योजना का लाभ लेने के लिए घायल व्यक्ति के पास खुद का बीमा होना जरूरी नहीं है।
इसके अलावा सरकार की प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना भी दुर्घटना से जुड़े आर्थिक सुरक्षा का विकल्प देती है। इसमें दुर्घटना में मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता पर आर्थिक सहायता मिलती है। वार्षिक प्रीमियम मात्र 20 रुपये है और मृत्यु या पूर्ण स्थायी दिव्यांगता पर 2 लाख रुपये का लाभ मिलता है।
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