एआईएफएफ ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम अपनाया, आईएसएल के व्यावसायिक साझेदार पर फैसला टाला

एआईएफएफ ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम अपनाया, आईएसएल के व्यावसायिक साझेदार पर फैसला टाला

एआईएफएफ ने राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम अपनाया, आईएसएल के व्यावसायिक साझेदार पर फैसला टाला
Modified Date: May 23, 2026 / 05:38 pm IST
Published Date: May 23, 2026 5:38 pm IST

… तपन मोहंता …

कोलकाता, 23 मई (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने शनिवार को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (एनएसजीए) को अपनाने की मंजूरी दे दी लेकिन यहां आयोजित अपनी विशेष आम सभा (एसजीएम) की बैठक में इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के लिए नए वाणिज्यिक साझेदार के चयन के विवादास्पद मुद्दे पर निर्णय टाल दिया। एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कार्यकारी समिति के 19 सदस्य, सदस्य राज्य संघों के 32 प्रतिनिधि तथा फीफा और एएफसी के प्रतिनिधि उपस्थित थे। एआईएफएफ कार्यकारी समिति के सदस्यों को मतदान का अधिकार नहीं है और वे किसी भी सदस्य संघ का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते। महासंघ ने एक बयान में कहा, “एआईएफएफ ने राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 (एनएसजीए) को अपनाने पर विचार-विमर्श करने के लिए अपनी विशेष आम सभा की बैठक आयोजित की। आम सभा ने एआईएफएफ द्वारा एनएसजीए को अपनाने को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी।” पश्चिम बंगाल राज्य इकाई भारतीय फुटबॉल संघ (एआईएफएफ) के अध्यक्ष सुब्रता दत्ता ने कहा कि एआईएफएफ का संविधान अब राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम 2025 के अनुरूप होगा। एसजीएम में भाग लेने वाले दत्ता ने पीटीआई से कहा, “एआईएफएफ का संविधान अब राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम (एनएसजीए) के अनुरूप होगा, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि एनएसजीए लागू होने के बाद पहले प्रस्तुत किया गया संविधान मान्य नहीं रहेगा।” उन्होंने कहा, “एनएसजीए अधिनियम के तहत नया ढांचा तब लागू होगा। इसके अनुसार पूरे संविधान को नए कानून के अनुरूप फिर से तैयार किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि संशोधित संविधान को 30 जून तक अंतिम रूप दे दिया जाएगा।” आईएसएल के नए वाणिज्यिक साझेदार के संबंध में, लंदन स्थित जीनियस स्पोर्ट्स मार्च में सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी। कंपनी ने 2026-27 सत्र से शुरू होकर अगले 15+5 वर्षों के लिए प्रति वर्ष 2129 करोड़ रुपये देने का वादा किया था। आईएसएल क्लबों ने हालांकि एक अलग मॉडल प्रस्तावित किया है। वे लीग संरचना में 90 प्रतिशत आर्थिक हित अपने पास रखना चाहते हैं, जबकि शेष हिस्सा एआईएफएफ के पास रहेगा। क्लब यह भी चाहते हैं कि सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी (जीनियस स्पोर्ट्स) केवल लीग के डेटा और प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में बनी रहे। एआईएफएफ के बयान के मुताबिक, “महासंघ ने मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) पर आगे चर्चा की, जिसके लिए उसे दो संस्थाओं से बोलियां प्राप्त हुई हैं। इस संबंध में आम सभा ने सर्वसम्मति से कार्यकारी समिति को एमआरए वार्ता पर चर्चा और विचार-विमर्श करने का अधिकार देने को मंजूरी दी।” दत्ता के अनुसार, वाणिज्यिक साझेदार पर अंतिम निर्णय आम सभा द्वारा पुनः लिया जाएगा। एआईएफएफ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रह चुके दत्ता ने कहा, “जीनियस स्पोर्ट्स का मामला क्लबों द्वारा प्रस्तुत पत्रों के साथ कार्यकारी समिति को भेज दिया गया है। कार्यकारी समिति इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करेगी और फिर इसे आम सभा के समक्ष रखेगी। यदि इसे आम सभा द्वारा अनुमोदित किया जाता है, तो मामले को जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।” पश्चिमी भारत फुटबॉल संघ के प्रतिनिधि के रूप में बैठक में उपस्थित पूर्व एआईएफएफ अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने आईएसएल के संभावित वाणिज्यिक साझेदार के साथ समझौते की अवधि को 20 वर्ष से घटाकर पांच वर्ष करने का प्रस्ताव रखा। दत्ता का यह भी मत था कि एआईएफएफ संविधान के अनुच्छेद 25.3 (सी) और (डी), जो किसी व्यक्ति को एआईएफएफ और राज्य संघों में एक साथ दोहरे पद धारण करने से रोकते हैं, अब लागू नहीं होंगे। विशेष आम सभा में सदस्य संघों के लिए मसौदा संविधान पर भी चर्चा हुई और उन्हें अपने अंतिम सुझाव देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया। भाषा आनन्द नमितानमिता


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