एआईटीए ने नया संविधान अपनाया, राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के अनुरूप होने का दावा

Ads

एआईटीए ने नया संविधान अपनाया, राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के अनुरूप होने का दावा

  •  
  • Publish Date - July 26, 2026 / 10:21 PM IST,
    Updated On - July 26, 2026 / 10:21 PM IST

… अमनप्रीत सिंह …

नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) ने रविवार को कहा कि उसने अपने संविधान में आवश्यक संशोधनों को मंजूरी दे दी है, जिससे वह राष्ट्रीय खेल प्रशासन (एनएसजी) अधिनियम 2025 के पूरी तरह अनुरूप हो गया है। इसके साथ ही एआईटीए देश के उन शुरुआती राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) में शामिल हो गया है, जिन्होंने नए कानून के अनुरूप अपना संविधान बनाया है। एआईटीए ने अपने सभी संबद्ध राज्य संघों को भी निर्देश दिया है कि वे 31 दिसंबर 2026 तक अपने-अपने संविधान में आवश्यक संशोधन कर लें, ताकि राष्ट्रीय महासंघ से उनकी संबद्धता बनी रहे। इन संशोधनों को यहां आयोजित असाधारण आम सभा (ईजीएम) में मंजूरी दी गई। संविधान संशोधन के दो अलग-अलग मसौदे पेश किए गए थे। एक अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल ने तैयार किया था, जबकि दूसरा एआईटीए की कार्यकारी समिति ने प्रस्तुत किया। बैठक की शुरुआत न्यायमूर्ति मित्तल के संबोधन से हुई। उन्होंने इसे एआईटीए के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। बैठक की अध्यक्षता एआईटीए अध्यक्ष चिंतन पारिख ने की। बैठक में 28 संबद्ध इकाइयों के कुल 47 प्रतिनिधियों ने भाग लिया जहां परंपरागत हाथ उठाकर मतदान करने के बजाय गुप्त मतदान कराया गया। गोवा और पुडुचेरी के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुए। प्रशासक और कार्यकारी समिति की ओर से प्रस्तावित सभी संशोधनों पर विस्तार से चर्चा की गई, उनके पक्ष-विपक्ष में तर्क रखे गए और इसके बाद आम सभा के सदस्यों ने मतदान किया। पूरी प्रक्रिया अदालत द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में हुई और इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराई गई। संशोधित संविधान के तहत प्रत्येक संबद्ध राज्य संघ का आम सभा में दो प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाएगा और दोनों के पास एक-एक वोट होगा। यानी प्रत्येक राज्य संघ के पास कुल दो वोट बने रहेंगे। इसके विपरीत, अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक ने प्रत्येक राज्य संघ को केवल एक वोट देने तथा एसोसिएट सदस्यों को भी मतदान का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा था। नए संविधान के अनुसार आम सभा में चार उत्कृष्ट खिलाड़ी (एसओएम) शामिल होंगे, जिनमें दो पुरुष और दो महिला खिलाड़ी होंगी। इसके अलावा व्हीलचेयर टेनिस के दो पैरा खिलाड़ी भी आम सभा में नामित किए जाएंगे और प्रत्येक के पास एक-एक वोट होगा। इससे महासंघ के निर्णयों में पैरा खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ेगी। पदाधिकारियों की अधिकतम आयु सीमा पर लंबी चर्चा हुई। कुछ सदस्य 75 वर्ष की सीमा के पक्ष में थे, जबकि अन्य 70 वर्ष की सीमा चाहते थे। इस मुद्दे पर मतदान कराया गया, जिसका परिणाम सोमवार को घोषित किया जाएगा। संशोधित संविधान के तहत कार्यकारी समिति में कुल 15 सदस्य होंगे। इनमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मानद महासचिव, कोषाध्यक्ष, दो संयुक्त सचिव (जिनमें एक महिला होगी), दो उत्कृष्ट खिलाड़ी प्रतिनिधि, खिलाड़ियों की समिति से चुने गए दो सदस्य और आम सभा द्वारा निर्वाचित पांच कार्यकारी सदस्य शामिल होंगे। संविधान में यह भी अनिवार्य किया गया है कि कार्यकारी समिति के कम से कम 25 प्रतिशत सदस्य, यानी न्यूनतम चार सदस्य महिलाएं हों। अध्यक्ष, मानद महासचिव और कोषाध्यक्ष का कार्यकाल अब पूरी तरह राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के प्रावधानों के अनुसार निर्धारित होगा। अंतरिम अध्यक्ष चिंतन पारिख ने कहा, ‘यह लंबी बैठक थी और खुशी है कि सभी काम सौहार्दपूर्ण माहौल में पूरे हुए। कई धाराओं में केवल भाषा संबंधी बदलाव किए गए क्योंकि हम उन्हें एक विशेष तरीके से रखना चाहते थे। मुझे बेहद खुशी है कि हम नए राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के अनुरूप बनने वाले शुरुआती राष्ट्रीय खेल महासंघों में शामिल हो गए हैं।’’ सुशासन के तहत एआईटीए ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस महासंघ (आईटीएफ) के चार्टर के अनुरूप हितों के टकराव संबंधी व्यापक प्रावधान भी शामिल किए हैं। संविधान में स्वतंत्र विवाद निवारण समिति, आचार समिति (एथिक्स कमेटी) तथा कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (पीओएसएच) अधिनियम के तहत आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) गठित करने का भी प्रावधान किया गया है, जिससे महासंघ की संस्थागत व्यवस्था और मजबूत होगी। बैठक में मौजूद एक सदस्य के अनुसार, केवल उन्हीं संशोधनों का विरोध हुआ जो 16 अगस्त, 2022 के उच्चतम न्यायालय के फैसले से जुड़े थे। अधिकांश सदस्य संविधान को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप रखने के पक्ष में थे। भाषा आनन्द नमितानमिता