एआईटीए एनएसजी अधिनियम के अनुरूप बनने की ओर, संविधान संशोधन मसौदे पर मतदान
एआईटीए एनएसजी अधिनियम के अनुरूप बनने की ओर, संविधान संशोधन मसौदे पर मतदान
… अमनप्रीत सिंह …
नयी दिल्ली, 26 जुलाई (भाषा) अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल की ओर से प्रस्तावित संविधान संशोधनों के मसौदे पर अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की असाधारण आम सभा (ईजीएम) में रविवार को कई संशोधनों को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली जबकि कुछ विवादित प्रावधानों पर मतदान कर निर्णय लिया गया। बैठक की शुरुआत में न्यायमूर्ति मित्तल ने इसे संघ के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ बताते हुए कहा कि एआईटीए राष्ट्रीय खेल प्रशासन (एनएसजी) अधिनियम, 2025 के अनुरूप अपना संविधान बनाने वाला देश का पहला राष्ट्रीय खेल महासंघ (एनएसएफ) बनने जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह एआईटीए के लिए ऐतिहासिक दिन है। यह एनएसजी अधिनियम, 2025 के अनुरूप संविधान अपनाने वाला पहला राष्ट्रीय खेल महासंघ बनेगा और मैं इसका इंतजार कर रही हूं।’’ बैठक में 28 संबद्ध इकाइयों के कुल 47 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान परंपरागत हाथ उठाकर मतदान करने की बजाय गुप्त मतदान कराया गया। गोवा और पुडुचेरी के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुए। समाचार लिखे जाने तक मतों की गिनती जारी थी। अंतरिम अध्यक्ष चिंतन पारिख ने मतदान शुरू होने से पहले प्रस्तावित प्रत्येक संशोधन पर सदस्यों को जानकारी दी और चर्चा के दौरान उठाए गए सवालों के जवाब भी दिए। महासभा ने प्रशासक की ओर से सुझाए गए कई संशोधनों को मंजूरी दे दी। इनमें महासभा में एक महिला सहित दो पैरा-एथलीट प्रतिनिधियों को शामिल करने का प्रस्ताव भी शामिल है। बैठक में मौजूद एक सदस्य के अनुसार, केवल उन्हीं संशोधनों का विरोध हुआ जो 16 अगस्त, 2022 को उच्चतम न्यायालय के फैसले से जुड़े थे। महासंघ के अधिकांश सदस्य संविधान को केवल एनएसजी अधिनियम 2025 के अनुरूप रखने के पक्ष में थे। सबसे अहम मुद्दों में महासभा की मतदान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। प्रशासक ने प्रत्येक राज्य संघ को एक वोट देने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन जानकारी के अनुसार सदस्यों ने प्रत्येक राज्य संघ को दो वोट देने की मौजूदा व्यवस्था बनाए रखने के पक्ष में मतदान किया। पदाधिकारियों की अधिकतम आयु सीमा पर भी लंबी चर्चा हुई। कुछ सदस्य 75 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा के पक्ष में थे, जबकि अन्य 70 वर्ष की सीमा चाहते थे। अंततः इस मुद्दे पर भी मतदान कराया गया, जिसका परिणाम समाचार लिखे जाने तक घोषित नहीं हुआ था। एनएसजी अधिनियम 2025 के अनुरूप एआईटीए के संविधान संशोधन प्रक्रिया पूरी करने के लिए अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक की निगरानी में इस असाधारण आम सभा का आयोजन किया गया था। अंतरिम अध्यक्ष चिंतन पारिख ने ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘प्रशासक द्वारा सुझाए गए लगभग 70 प्रतिशत संशोधनों पर एआईटीए की कार्यकारी समिति सहमत थी। इन सभी को सभा ने पारित कर दिया। जिन मुद्दों पर कार्यकारी समिति की अलग राय थी, वहां समिति द्वारा संशोधित प्रस्तावों को भी सभा ने मंजूरी दी। पर्यवेक्षकों की मौजूदगी में पूरी बैठक सुचारु रूप से संपन्न हुई।’’ दिल्ली उच्च न्यायालय ने 18 जून को एआईटीए की आम सभा को संविधान संशोधनों पर निर्णय लेने का अधिकार देते हुए निर्देश दिया था कि प्रत्येक प्रस्तावित संशोधन पर अलग-अलग विचार और मतदान कराया जाए। यह विवाद सोमदेव देववर्मन और पूरव राजा द्वारा दायर याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें 28 सितंबर, 2024 को हुए एआईटीए चुनावों को राष्ट्रीय खेल विकास संहिता और खेल प्रशासन से संबंधित पूर्व न्यायिक निर्देशों का उल्लंघन बताते हुए चुनौती दी गई थी। भाषा आनन्द नमितानमिता

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