बच्चों को फुटबॉल में व्यस्त रखने के लिए पंजाब की एक अकादमी ने मिसाल कायम की
बच्चों को फुटबॉल में व्यस्त रखने के लिए पंजाब की एक अकादमी ने मिसाल कायम की
(हिमांक नेगी)
रुरका कलां (पंजाब), 23 मई (भाषा) नशीले पदार्थों के खिलाफ जंग के साथ-साथ अपनी बढ़ती फुटबॉल संस्कृति के लिए खास पहचान बना रहे पंजाब के एक गांव में जमीनी स्तर की एक अकादमी चुपचाप उभर कर सामने आई है, जिसका मुख्य लक्ष्य बच्चों को गलियों से दूर फुटबॉल के मैदानों में व्यस्त रखना है।
जालंधर जिले के रुरका कलां में स्थित यूथ फुटबॉल क्लब (वाईएफसी) खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से तैयार करने में विश्वास रखता है और वर्तमान समय में कई समस्याओं से जूझ रहे भारतीय फुटबॉल के विकास में अपना योगदान देना चाहता है।
हाल ही में स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप 2026 में उपविजेता रही यह अकादमी वर्तमान में सत्र के दौरान लगभग 250 बच्चों को मुफ्त प्रशिक्षण प्रदान करती है और साथ ही कई युवाओं की छात्रावास, भोजन और आहार संबंधी जरूरतों का भी ध्यान रखती है।
यह अकादमी अब पंजाब भर में 14-15 केंद्र संचालित करती है, जिससे उसकी पहुंच 4,000 से 6,000 बच्चों तक बन गई है।
स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप में टीम को कोचिंग देने वाले पूर्व भारतीय डिफेंडर अनवर अली का मानना है कि भारतीय फुटबॉल की सबसे बड़ी समस्या अभी भी जमीनी स्तर के विकास की उपेक्षा है, भले ही इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) से वित्तीय वृद्धि हुई हो।
अनवर अली ने पीटीआई वीडियो से कहा, ‘‘हमारे पास संख्या तो है लेकिन गुणवत्ता नहीं है क्योंकि जमीनी स्तर पर ठीक से काम नहीं किया गया है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उज़्बेकिस्तान जैसे देश हमारे साथ खेलते थे और अब वे विश्व कप में पहुंच चुके हैं। हम तो सिर्फ आई-लीग, आईएसएल जैसे शीर्ष स्तर तक पहुंचने और भारत के लिए खेलने के बारे में सोचते हैं।’’
अनवर ने कहा कि बेहतर पेशेवरपन और वित्तीय स्थिति के बावजूद भारतीय फुटबॉल धीरे-धीरे आरामदायक स्थिति में आ गया है।
अपने खेल के दिनों में राष्ट्रीय टीम में बाइचुंग भूटिया और सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलने वाले अनवर ने कहा, ‘‘खिलाड़ियों को अच्छा पैसा मिल रहा है और हम एक आरामदायक स्थिति में आ गए हैं। कोई भी बाहर जाने की कोशिश नहीं करता।’’
रयान विलियम्स के भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले कुछ विदेशी मूल के खिलाड़ियों में शामिल होने के बाद ओसीआई (विदेशी नागरिक) खिलाड़ियों को लेकर चल रही बहस पर अनवर ने भी अपनी राय व्यक्त की।
अनवर ने कहा, ‘‘अगर हम चाहते हैं कि ओसीआई के खिलाड़ी दूसरे देशों में अपना विकास जारी रखें और अगर वहां बात नहीं बनती है तो वे यहां आएं, तो हम अपने खिलाड़ियों का विकास कहां कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हो सकता है कि यह अगले दो से पांच वर्षों तक 10-15 खिलाड़ियों की मदद कर सके, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है।’’
अनवर ने यह टिप्पणी भारत की स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप टीम के लिए आयोजित एक सम्मान समारोह में की जो फाइनल में ब्राजील से 4-2 से हार गई, लेकिन अपने शानदार प्रदर्शन से उसने लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा।
वाईएफसी के संस्थापक गौरमंडल दास के लिए फुटबॉल का मतलब कभी भी केवल शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं था।
दास ने कहा, ‘‘इस अकादमी का उद्देश्य जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना और इसे बच्चों के लिए सुलभ बनाना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा लक्ष्य पंजाब को नशामुक्त बनाना भी है, और इससे इसमें भी मदद मिलेगी। यह सुविधा निःशुल्क है और सत्र के दौरान यहां लगभग 250 बच्चे अभ्यास करते हैं, जिनके भोजन और आहार संबंधी जरूरतों का पूरा ध्यान रखा जाता है।’’
दास ने कहा कि अकादमी ने एक बार पेशेवर क्लब में बदलने पर विचार किया था, लेकिन बाद में यह निर्णय लिया कि जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने से कहीं अधिक व्यापक सामाजिक प्रभाव पड़ेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने इसे सिर्फ अकादमी नहीं बल्कि एक पूर्णकालिक क्लब बनाने के बारे में सोचा था, लेकिन बाद में हमें लगा कि इससे हम केवल 20 खिलाड़ियों पर ही ध्यान देंगे और जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को तैयार नहीं कर पाएंगे।’’
भाषा
पंत
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