एंसी स्वर्ण से चूकीं, एथलेटिक्स में भारत के लिए शानदार दिन
एंसी स्वर्ण से चूकीं, एथलेटिक्स में भारत के लिए शानदार दिन
नागोया, 27 सितंबर (भाषा) भारत एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने से बेहद मामूली अंतर से चूक गया जब रविवार को यहां एंसी सोजन और सर्वेश कुशारे को अपनी-अपनी फाइनल स्पर्धाओं में लंबे समय तक बढ़त बनाए रखने के बावजूद अंत में रजत पदक से संतोष करना पड़ा। वहीं पारुल चौधरी और हरिता भद्रा ने कांस्य पदक जीतकर ट्रैक एवं फील्ड में भारत के लिए शानदार दिन का अंत किया।
महिला लंबी कूद फाइनल में एंसी ने 6.53 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया और दूसरे स्थान पर रहीं। चीन की हुआंग यिंगयिंग ने आखिरी प्रयास में 6.55 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को सिर्फ दो सेंटीमीटर से पीछे छोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया।
एंसी की हमवतन शैली सिंह के लिए महिला लंबी कूद फाइनल में निराशा हाथ लगी। चीन की मेंगयी तान ने भी अपने अंतिम प्रयास में 6.46 मीटर की कूद लगाकर भारतीय खिलाड़ी को पीछे छोड़ दिया जिससे शैली कांस्य पदक से चूक गईं। शैली का दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रयास 6.42 मीटर रहा।
सर्वेश ऊंची कूद स्पर्धा में काफी समय तक शीर्ष पर रहे लेकिन 2.25 मीटर की ऊंचाई को पहली कोशिश में पार नहीं कर पाने के बाद दूसरे स्थान पर खिसक गए। चीनी ताइपे के चाओ शुआन फू ने यह ऊंचाई अपनी पहली कोशिश में पार कर ली और स्वर्ण पदक जीता।
हालांकि कुशारे ने दूसरी कोशिश में 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर ली लेकिन उन्हें रज पदक से संतोष करना पड़ा।
ट्रैक एवं फील्ड में रविवार को चार पदक के साथ भारत के कुल 37 पदक हो गए हैं जिसमें चार स्वर्ण, 16 रजत और 17 कांस्य पदक शामिल हैं।
पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली पारुल चौधरी ने महिला 3000 मीटर स्टीचलचेज स्पर्धा में नौ मिनट 8.67 सेकेंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ लगातार दूसरी बार कांस्य पदक अपने नाम किया।
बहरीन की विनफ्रेड यावी ने नौ मिनट 4.36 सेकेंड के समय के साथ स्वर्ण पदक जीता जबकि कजाखस्तान की नोराह जेरुतो तनुई ने नौ मिनट 06.82 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक अपने नाम किया।
इससे पहले भारत की हरिता भद्रा ने महिला 200 मीटर में 23.20 सेकेंड के समय के साथ कांस्य पदक जीता। भद्रा तीसरे स्थान पर रहीं। वह जापान की इडो अबिगेइरुफुका से मामूली अंतर से आगे रहीं जिन्होंने 23.21 सेकेंड का समय निकाला।
सिंगापुर की शांति परेरा ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ 22.78 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता जबकि चीन की चेन युजी ने 22.93 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया।
फाइनल में शामिल एक अन्य भारतीय उन्नति अयप्पा बोलैंड 23.48 सेकेंड के समय के साथ छठे स्थान पर रहीं।
भारत का स्क्वाश में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक का इंतजार जारी रहा जब अनाहत सिंह और अभय सिंह को फाइनल में अपने-अपने मलेशियाई प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ हार के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
अभय पुरुष एकल फाइनल में ईन यो एनजी के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करने में नाकाम रहे और सीधे गेम में 44 मिनट में 9-11, 5-11, 5-11 से हार गए।
अट्ठारह वर्षीय अनाहत को भी महिला एकल फाइनल में मलेशिया की शिवासांगरी सुब्रमण्यम ने आसानी से हराया। दुनिया की 17वें नंबर की भारतीय खिलाड़ी को पांचवीं रैंकिंग वाली शिवासांगरी के खिलाफ 4-11, 4-11, 7-11 से शिकस्त मिली।
इस नतीजे का मतलब है कि अनाहत और अभय दोनों 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने से चूक गए जहां स्क्वाश पहली बार ओलंपिक खेलों का हिस्सा बनेगा। अब भारतीय खिलाड़ियों को क्वालीफाई करने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने होंगे।
स्क्वाश में किसी भी भारतीय ने अब तक व्यक्तिगत वर्ग में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक नहीं जीता है। सौरव घोषाल भी दो बार इसके करीब पहुंचे थे लेकिन उन्हें भी 2014 के इंचियोन और 2023 के हांगझोउ एशियाई खेलों में रजत पदक से संतोष करना पड़ा था।
भारतीय मुक्केबाजों परवीन हुड्डा, अंकुश पंघाल और नरेंदर बेरवाल ने क्वार्टरफाइनल में शानदार जीत दर्ज कर देश के लिए तीन पदक पक्के किए जबकि सचिन सिवाच का अभियान अंतिम आठ चरण में समाप्त हो गया।
पिछले महीने ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों का स्वर्ण जीतने वाले अंकुश ने पुरुषों के 80 किग्रा क्वार्टर फाइनल में ताजिकिस्तान के नेकरूज सालिमोव के खिलाफ 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से जीत दर्ज कर शुरुआत की।
नरेंदर (90 किग्रा से अधिक) ने पिछले चरण के अपने कांस्य पदक में एक और पदक जोड़ लिया। थाईलैंड के अद्थापोंग साएंगटेप के खिलाफ क्वार्टरफाइनल मुकाबले में दो मिनट से भी कम समय में रेफरी ने मुकाबला रोक (आरएससी) दिया।
परवीन ने उज्बेकिस्तान की विश्व चैंपियनशिप की रजत पदक विजेता नवबखोर खामिदोवा को इसी अंतर से हराकर महिलाओं के 65 किग्रा सेमीफाइनल में जगह बनाई।
पिछले चरण में परवीन का कांस्य पदक उनसे छीन लिया गया था क्योंकि डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने ठिकाने की जानकारी देने में विफल रहने के कारण उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। हरियाणा की मुक्केबाज का यह पहला मुकाबला था क्योंकि पिछले दौर में उन्हें वॉकओवर मिला था। लेकिन परवीन ने खामिदोवा पर मुक्कों की झड़ी लगाते हुए शानदार प्रदर्शन किया।
हालांकि राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियन सचिन का सफर खत्म हो गया। वह पुरुषों के 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में जापान के स्थानीय दावेदार शुनसुके कितामोटो से 0-5 से हार गए।
पीवी सिंधू और उन्नति हुड्डा साहसिक प्रदर्शन के बावजूद महिला एकल क्वार्टर फाइनल में हार गई जिससे इन खेलों की व्यक्तिगत स्पर्धा में भारत की झोली खाली रही ।
भारत ने हांगझोउ में पिछली बार खेलों में तीन पदक जीते थे जिसमें पुरूष टीम ने रजत, सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने पुरूष युगल में स्वर्ण और एचएस प्रणय ने पुरूष एकल में कांस्य पदक अपने नाम किया था ।
तीन साल बाद भारतीय पुरूष टीम ने कांस्य पदक जीता लेकिन कोई भी भारतीय खिलाड़ी विभिन्न वर्गों में सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका ।
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता सिंधू को 24 घंटे से भी कम समय में तीसरा मैच खेलना पड़ा जो तोक्यो ओलंपिक चैम्पियन चेन यूफेइ से 21 . 11, 18 . 21, 10 . 21 से हार गई ।
उन्नीस वर्ष की उन्नति को तीन बार की विश्व चैम्पियन जापान की अकाने यामागुची ने 21 . 16, 14 . 21, 21 . 17 से हराया ।
इससे पहले त्रिसा जॉली और गायत्री गोपीचंद की जोड़ी महिला युगल क्वार्टर फाइनल में दुनिया की पांचवें नंबर की मलेशियाई जोड़ी पीयरली तान और तिनाह मुरलीधरन से सीधे गेम में हारकर बाहर हो गई ।
पिछले महीने दिल्ली में विश्व चैम्पियनशिप में पहली बार कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय जोड़ी को विश्व चैम्पियनशिप 2025 की रजत पदक विजेता जोड़ी से 18 . 21, 9 . 21 से पराजय का सामना करना पड़ा ।
वहीं मिश्रित युगल में ध्रुव कपिला और तनीषा क्रास्टो को दुनिया की नंबर एक जोड़ी चीन की फेंग यान झि और हुआंग डोंगपिंग ने 21 . 14, 18 . 21, 21 . 18 से हराया ।
भारतीय महिला हॉकी टीम ने भी अपना अजेय अभियान जारी रखते हुए सिंगापुर को 7-0 से करारी शिकस्त दी। टीम ने पांच जीत के साथ पूल बी में शीर्ष स्थान हासिल किया और सेमीफाइनल में कोरिया के खिलाफ जगह पक्की की।
भाषा सुधीर नमिता
नमिता

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