Guna News Today: अस्पताल में महिला की मौत के बाद बवाल, परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में की तोड़फोड़

Guna News Today: अस्पताल में महिला की मौत के बाद बवाल, परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में की तोड़फोड़

Guna News Today: अस्पताल में महिला की मौत के बाद बवाल, परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल में की तोड़फोड़

Guna News Today | Photo Credit: IBC24

Modified Date: September 27, 2026 / 01:59 pm IST
Published Date: September 27, 2026 1:58 pm IST
HIGHLIGHTS
  • इलाज के दौरान 27 वर्षीय महिला की मौत
  • परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
  • हंगामे और चक्का जाम के बाद पुलिस ने जांच शुरू की

गुना: Guna News Today मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक बेहद दर्दनाक और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली खबर सामने आई है। ऐसा लग रहा है मानो गुना में भारी अंधेरगर्दी मची हो और सब कुछ राम भरोसे ही चल रहा हो। जज्जीबस स्टैंड के पास स्थित एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान 27 वर्षीय राजकुमारी ओझा की दर्दनाक मौत हो गई। भदौरा की रहने वाली राजकुमारी को तेज बुखार के चलते 18 सितंबर को इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 21 सितंबर को अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया, लेकिन जब उनकी तबीयत दोबारा बिगड़ी तो परिजन घबराहट में उन्हें लेकर वापस अस्पताल पहुंचे। परिजनों का सीधा और गंभीर आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज के साथ घोर लापरवाही बरती। कल भी मरीज को चेक नहीं किया गया और आज भी किसी डॉक्टर ने उनकी सुध नहीं ली, जिसके चलते अस्पताल के बेड पर मरीज ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

परिजनों का फूटा गुस्सा

Guna News Today इस हृदयविदारक घटना के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और कुर्सियों-कांच में भारी तोड़फोड़ कर दी। मामला यहीं नहीं रुका, न्याय की मांग को लेकर आक्रोशित परिजनों ने सड़क पर चक्का जाम कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भारी मशक्कत के बाद स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस अब अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है, सभी मेडिकल रिकॉर्ड जब्त कर रही है और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है। भीड़ को समझाइश देकर यातायात बहाल कर दिया गया है।

मनमानी राशि वसूली का आरोप

लेकिन बड़ा सवाल यही है कि निजी अस्पतालों में मनमाने रूपये वसूलने के बाद भी इलाज नहीं मिल रहा है। इन अस्पतालों में अधिकतर डाक्टर हायर किए गए हैं। जो समय पर उपलब्ध ही नहीं होते। परिजनों के कई तरह के घोर लापरवाही के आरोप है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इन अस्पतालों के डॉक्टरों की खुद की पैथोलॉजी और निजी मेडिकल स्टोर हैं। एक डॉक्टर दो दो तीन-तीन जगह सेवाएं देते हैं। ऐसे में अगर किसी एक जगह किसी मरीज की तबीयत बिगड़ी है तो परिजन फोन लगाते रहते हैं लेकिन डॉक्टर उपलब्ध नहीं होते। वहीं डॉक्टर ऐसी दवाएं लिखते हैं जो बाजार में कहीं और नहीं मिलतीं। उनके मेडिकल से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। जांच और इमरजेंसी सेवाओं के रूप में मनमानी राशि वसूल की जाती है। मौत का खुला खेल चल रहा है। आज यह घटना इस बात का उदाहरण है। लेकिन इस बारे में अभी तक कई घटनाएं सामने आने के बाद अभी तक कोई कठोर कदम नहीं उठाया गया है।

स्वास्थ्य विभाग को अब ऐसे अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ जांच कर कड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है। फिलहाल अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही और कमीशन के लालच में एक मरीज को यूं ही मरने के लिए छोड़ देना न सिर्फ नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कानूनी तौर पर भी एक बड़ा अपराध है। निजी अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन पूरी तरह से सवालों के घेरे में हैं। इसलिए परिजनों की मांग है कि जिम्मेदारों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और धोखाधड़ी के तहत ऐसी सख्त और पारदर्शी कार्यवाही हो कि आगे सर कभी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो।

फिलहाल पुलिस ने मामले को संज्ञान में ले लिया है जांच की बात कही जा रही है। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार के बच्चों और उसके दाह संस्कार के लिए ₹50000 की राहत राशि देने की बात कही है।

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