नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) स्कीइंग खिलाड़ी आरिफ मोहम्मद खान और स्टैनजिन लुंडुप अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की ओर से ओलंपियन को दिए जाने वाले 10 हजार डॉलर के अनुदान को पाने वाले शुरुआती भारतीय होंगे। उन्होंने इस साल मिलानो-कोर्टिना शीतकालीन खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया था जिसके साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
यह अनुदान आईओसी के सौ साल से अधिक पुराने उस सिद्धांत में एक बड़ा बदलाव है जिसके तहत ओलंपिक अभियान में ‘एमेच्योर’ (शौकिया तौर पर खेलने) की भावना के कारण खिलाड़ियों को आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता था।
यह आईओसी के ‘फिट फॉर द फ्यूचर’ रणनीतिक ढांचे का हिस्सा है जिसका मकसद उन खिलाड़ियों को मदद देने के ‘नए और पूरक तरीके’ खोजना है जो खेलों के लिए क्वालीफाई करते हैं और किसी भी डोपिंग उल्लंघन से दूर रहते हैं।
आईओसी अध्यक्ष कर्स्टी कोवेंट्री ने इसे इनामी राशि कहने से इनकार करते हुए कहा है कि यह एक सहायक प्रणाली है। जल्द ही शुरू होने वाली प्रणाली के जरिए आवेदनों की जांच के बाद इस साल के आखिर तक भुगतान शुरू हो जाएगा।
छत्तीस साल के आरिफ ने मिलानो-कोर्टिना में पुरुषों की स्लैलम स्पर्धा में 39वें स्थान पर रहकर भारत के लिए इतिहास का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन किया था। यह 1988 में कैलगरी खेलों में किशोर रत्न रॉय के बनाए गए भारत के पिछले सबसे अच्छे नतीजे से 10 स्थान बेहतर था।
दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों में दो बार स्वर्ण पदक जीतने वाले आरिफ ने फोन पर पीटीआई से कहा, ‘‘यह अनुदान उस मेहनत और संघर्ष को मान्यता देता है जिससे एक खिलाड़ी ओलंपिक की तैयारी के दौरान गुजरता है। इससे उन्हें प्रेरणा मिलेगी और हां, 10 हजार डॉलर (लगभग 9.43 लाख रुपये) एक अच्छी रकम है जिसका इस्तेमाल खिलाड़ी अपने फायदे के लिए कर सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘असल में बात सिर्फ पैसे की नहीं है बल्कि देखभाल की है। आईओसी खिलाड़ियों को यह दिखा रहा है कि उसे उनके सफर की परवाह है जो बहुत अच्छी बात है।’’
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग के इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘यह ओलंपिक चक्र की कड़ी मेहनत के लिए दिया जाने वाला अनुदान है। वे उस कोशिश को पहचान रहे हैं जो एक ओलंपियन बनने में लगती है। यह खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा पल है।’’
हालांकि 28 साल के स्टैनजिन का पहला शीतकालीन खेलों का अनुभव कुछ खास यादगार नहीं रहा। वह पुरुषों की 10 किमी फ्रीस्टाइल क्रॉस-कंट्री स्कीइंग स्पर्धा में 104वें स्थान पर रहे।
यह सब तब हुआ जब बेहतर रैंकिंग वाले मंजीत कुमार ने आईओए द्वारा स्टैनजिन के चयन को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया ‘साफ तौर पर मनमानी और अनुचित’ थी।
हालांकि जब आईओए ने कहा कि नाम जमा करने की समय-सीमा खत्म हो चुकी है और इसलिए टीम में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता तो खेल मंत्रालय ने तकनीकी मुद्दों पर विचार करते हुए आखिरकार स्टैनजिन को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने की मंजूरी दे दी।
उद्घाटन समारोह में आरिफ को सम्मान मिलने के बाद लद्दाख के इस सेना के जवान को खेलों के समापन समारोह में देश का ध्वजवाहक होने का सम्मान मिला।
आईओसी के खिलाड़ी आयोग के अध्यक्ष और बास्केटबॉल के दिग्गज खिलाड़ी पाउ गैसोल ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए एक आवेदन प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।
गैसोल ने कोष की घोषणा करते हुए कहा, ‘‘यह अनुदान हर ओलंपियन को मिलेगा। सिर्फ पदक जीतने वालों को नहीं। सिर्फ कुछ खास देशों के खिलाड़ियों को नहीं। हर ओलंपियन को। क्योंकि भले ही हर खिलाड़ी का सफर अलग-अलग होता है लेकिन हर ओलंपियन ने ओलंपिक के मंच तक पहुंचने के लिए त्याग किया है।’’
इस कोष की सीमा हर ओलंपिक के लिए 14 करोड़ डॉलर तय की गई है।
गैसोल ने कोवेंट्री की बात दोहराते हुए कहा, ‘‘यह कोई इनामी राशि नहीं है। यह ओलंपियन बनने के सफर और उसके लिए जरूरी प्रतिबद्धता को सम्मान देने के बारे में है।’’
भाषा सुधीर पंत
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