कोलंबो में दूसरे टेस्ट के लिए संतुलित पिच तैयार होने की उम्मीद

कोलंबो में दूसरे टेस्ट के लिए संतुलित पिच तैयार होने की उम्मीद

कोलंबो में दूसरे टेस्ट के लिए संतुलित पिच तैयार होने की उम्मीद
Modified Date: August 20, 2026 / 09:06 pm IST
Published Date: August 20, 2026 9:06 pm IST

(जी उन्निकृष्ण्न)

कोलंबो, 20 अगस्त (भाषा) भारतीय बल्लेबाजों की स्पिन के खिलाफ परेशानी का फायदा उठाने के लिए भले ही धूल भरी पिच तैयार करने का लालच हो लेकिन यहां दूसरे टेस्ट के लिए सिन्हलीज स्पोर्ट्स क्लब (एसएससी) का विकेट गॉल की पिच जैसा हो सकता है जहां बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को बराबर मौके मिले थे।

पहला टेस्ट भारत ने पांचवें और अंतिम दिन 165 रन से जीता था। इस दौरान पिच पर प्राकृतिक टूट-फूट के अलावा ऐसी कोई विशेष परेशानी नहीं थी जिससे बल्लेबाजों के लिए मुश्किल पैदा हो।

श्रीलंकाई अधिकारियों का मानना है कि 23 अगस्त से शुरू होने वाले दूसरे टेस्ट के लिए जरूरत से ज्यादा स्पिन की मददगार पिच तैयार करना उलटा पड़ सकता है।

श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के एक अधिकारी ने पीटीआई से कहा, ‘‘फिलहाल सोच यही है कि गॉल जैसी संतुलित पिच तैयार की जाए। श्रीलंका के पास चांडी (दिनेश चांदीमल), कुसाल (मेंडिस) और (पथुम) निसांका जैसे कुछ अनुभवी खिलाड़ी भी नहीं हैं इसलिए हमें अपने युवा बल्लेबाजों को भी मौका देना होगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘बेशक अंत में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि टीम मैच के लिए क्या चाहती है, यानी ऐसा विकेट जो उसे जीतने और श्रृंखला बराबर करने का सबसे अच्छा मौका दे।’’

वर्ष 2000 के दशक में एसएससी की पिचों पर बल्लेबाजों का दबदबा रहता था और यह मैदान घरेलू टीम का एक तरह का गढ़ माना जाता था।

श्रीलंका ने 1999 से 2009 के बीच इस मैदान पर 12 टेस्ट खेले, जिनमें से छह में जीत दर्ज की और बाकी छह मुकाबले ड्रॉ रहे।

रणनीति सरल थी। कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने जैसे बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलते थे जबकि महान स्पिनर मुथैया मुरलीधरन की अगुआई में सक्षम स्पिन आक्रमण विपक्षी टीम पर शिकंजा कसता था।

लेकिन इन दिग्गजों के संन्यास लेने के बाद पिच का मिजाज भी बदल गया।

अगले दशक में श्रीलंका इस मैदान पर खेले गए सात टेस्ट में सिर्फ तीन जीत सका और चार में उसे हार का सामना करना पड़ा।

दरअसल दो बार भारत और पाकिस्तान के खिलाफ उसे पहली पारी में 400 से अधिक रन की बढ़त गंवानी पड़ी।

श्रीलंका ने दक्षिण अफ्रीका (2018), ऑस्ट्रेलिया (2016) और बांग्लादेश (2025) जैसी टीमों के खिलाफ जीत दर्ज की, जिन्होंने इन मुकाबलों में खराब क्रिकेट खेला था।

लेकिन दिग्गज खिलाड़यों के दौर के बाद भारत (दो बार), इंग्लैंड और पाकिस्तान जैसी टीमों को इस मैदान पर मेजबान टीम के खिलाफ आसानी से रन बनाने का मौका मिला।

दूसरे टेस्ट में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल सकता है और ऐसे में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने वाली टीम फायदे की स्थिति में रह सकती है।

भाषा सुधीर नमिता

नमिता


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