कलाई का स्पिनर होने के कारण कुलदीप को पिच से ज्यादा मदद मिली: वाशिंगटन

कलाई का स्पिनर होने के कारण कुलदीप को पिच से ज्यादा मदद मिली: वाशिंगटन

कलाई का स्पिनर होने के कारण कुलदीप को पिच से ज्यादा मदद मिली: वाशिंगटन
Modified Date: October 13, 2025 / 07:37 pm IST
Published Date: October 13, 2025 7:37 pm IST

… कुशान सरकार …

नयी दिल्ली, 13 अक्टूबर (भाषा) वेस्टइंडीज की दूसरी पारी में तीन और मैच में आठ विकेट लेने वाले कुलदीप यादव की तारीफ करते हुए भारतीय टीम के उनके साथी वाशिंगटन सुंदर ने कहा कि कलाई का स्पिनर होने के कारण उन्हें पिच से दूसरे गेंदबाजों के मुकाबले ज्यादा मदद मिली। भारतीय गेंदबाजों को दूसरे और अंतिम टेस्ट में वेस्टइंडीज़ को दूसरी पारी में आउट करने के लिए 118.5 ओवरों की जरूरत पड़ी क्योंकि अरुण जेटली स्टेडियम की पिच बल्लेबाजी के लिए आसान थी। कुलदीप ने गेंदबाजों के लिए मुश्किल पिच पर दोनों पारियों को मिलाकर 55.5 ओवर में 186 रन देकर आठ विकेट लिये जबकि उनकी, वाशिंगटन और रविंद्र जडेजा की स्पिनरों की तिकड़ी ने इस मैच में कुल 13 विकेट चटकाये। अनुभवी जडेजा ने कुल 52 ओवरों में चार विकेट लिए। वेस्टइंडीज की दूसरी पारी 390 रन पर सिमटी जिससे मैच के पांचवें दिन भारत को जीत के लिए और 58 रन की जरूरत है। वाशिंगटन ने दिन के खेल के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उन्होंने (कुलदीप) बहुत अच्छी गेंदबाजी की। कलाई के स्पिनर होने के नाते, उन्हें इससे निश्चित रूप से पिच से अधिक मदद मिली।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ दूसरे गेंदबाजों ने भी अच्छी गेंदबाजी की। तेज गेंदबाजों को भी कड़ी मेहनत करनी पड़ी। इस पिच पर 20 विकेट चटकाना एक बड़ी उपलब्धि है।’’ सुंदर ने कहा कि कोटला की पिच के इस रवैये से उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई क्योंकि यहां वर्षों से ऐसा ही होता आया है। उन्होंने कहा, ‘‘ मैं कहूंगा कि यह दिल्ली की पारंपरिक विकेट जैसी ही है, जहां ज्यादा उछाल नहीं है और जाहिर है, इस मैच में भी स्पिनरों को ज्यादा टर्न नहीं मिली।  अलग-अलग मैदानों पर परिस्थितियां काफी अलग होती है और यही इस प्रारूप की खास खूबसूरती है।’’ वेस्टइंडीज को फालोऑन दिये जाने के कारण भारतीय गेंदबाजों को लगभग 200 ओवर लगातार गेंदबाजी करनी पड़ी। वाशिंगटन ने कहा कि इंग्लैंड दौरे के बाद टीम इस तरह की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा,‘‘ इंग्लैंड श्रृंखला में हमें इसका अनुभव मिल गया था। हमें पता था कि मैदान पर 180 से 200 ओवर तक क्षेत्ररक्षण करते हुए कैसे डटे रहना है । हमने इंग्लैंड में नियमित तौर पर ऐसा किया था।’’ भाषा आनन्द आनन्द

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