दोनों अपने-अपने संघर्षों से जूझ रही थीं: त्रीसा-गायत्री के पदक पक्का करने पर सुमीत

दोनों अपने-अपने संघर्षों से जूझ रही थीं: त्रीसा-गायत्री के पदक पक्का करने पर सुमीत

दोनों अपने-अपने संघर्षों से जूझ रही थीं: त्रीसा-गायत्री के पदक पक्का करने पर सुमीत
Modified Date: August 21, 2026 / 10:26 pm IST
Published Date: August 21, 2026 10:26 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

नयी दिल्ली, 21 अगस्त (भाषा) युगल कोच कोच बी सुमीत रेड्डी ने त्रीसा जॉली और गायत्री गोपीचंद के संघर्ष को करीब से देखा है। चोट, खराब फॉर्म और लगातार गिरती रैंकिंग के दौर से गुजरने के बाद दोनों ने शुक्रवार को विश्व चैंपियनशिप में भारत का पदक पक्का कर दिया।

ओलंपियन और राष्ट्रमंडल खेलों के पदक विजेता रेड्डी पिछले साल संन्यास के बाद भारतीय राष्ट्रीय कोचिंग टीम से जुड़े थे। वह मुख्य कोच पुलेला गोपीचंद के साथ कोर्ट के बाहर मौजूद थे, जब त्रीसा और गायत्री कांस्य पदक पक्का होने के बाद भावुक हो गईं।

भारतीय जोड़ी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दुनिया की चौथे नंबर की चीन की जोड़ी जिया यी फान और झांग शू शियान को 16-21, 21-15, 21-13 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।

रेड्डी ने कहा, ‘‘जब भावनाएं हावी हो जाती हैं तो कोई शब्द उस स्थिति को सामान्य नहीं कर सकते। वे अब भी काफी भावुक हैं। शायद इस उपलब्धि को पूरी तरह समझने में उन्हें एक दिन लगेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘दोनों के अपने-अपने संघर्ष हैं। इसकी शुरुआत गायत्री के गोपी सर की बेटी होने से होती है। लोग हमेशा कहते रहे कि उसे सब कुछ आसानी से मिला है। इस उपलब्धि से उसे यह संतोष भी मिलेगा कि वह विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता है। उसके करियर में यह बहुत बड़ा पदक होगा।’’

त्रीसा को लेकर उन्होंने कहा, ‘‘वह अपने करियर की शुरुआत से ही बहुत कुछ हासिल करने के लिए बेताब रही है। वह यह साबित करना चाहती थी कि वह सिर्फ हिस्सा लेने के लिए टूर्नामेंट नहीं खेलती। वह हमेशा भारतीय बैडमिंटन की स्टार बनना चाहती थी। यह उपलब्धि उसके लिए भी बहुत बड़ी है और शायद यही वजह है कि वह इतनी भावुक हुई।’’

कोर्ट पर दोनों की शैलियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। गायत्री अपने संयम के लिए जानी जाती हैं, जबकि त्रीसा का खेल आक्रामक है। रेड्डी ने कहा, ‘‘हमारे पास दो अलग तरह की खिलाड़ी हैं। त्रीसा हमेशा प्रतिद्वंद्वी पर हमला करने के लिए तैयार रहती है, जबकि गायत्री संयमित रहती है। इसलिए दोनों से अलग-अलग तरीके से निपटना पड़ता है। जब त्रीसा जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो जाती है या बहुत ज्यादा स्मैश करने लगती है तो हम उसे थोड़ा शांत रहने के लिए कहते हैं। वहीं गायत्री को थोड़ा और आक्रामक होने के लिए प्रेरित करते हैं।’’

रेड्डी ने कहा, ‘‘पिछले 30-40 दिनों में उनका रोटेशन काफी बेहतर हुआ है। पहले लोग कहते थे कि त्रीसा हमेशा पीछे रहती हैं और गायत्री आगे, लेकिन इस टूर्नामेंट में ऐसा नहीं है। दोनों ने अपनी जिम्मेदारियां बराबर बांटी हैं।’’

भाषा

आनन्द नमिता

नमिता


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