जोहानिसबर्ग, 26 अप्रैल (भाषा) भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाली ऑलराउंडर दीप्ति शर्मा ने कहा कि खुद पर भरोसा रखने और गेंदबाजी में किए गए बदलावों ने उन्हें लंबे समय से चल रहे खराब दौर से उबरने और सही समय पर फॉर्म में लौटने में मदद की।
ऑस्ट्रेलिया में फरवरी में खेली गई टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला से दीप्ति बल्ले और गेंद दोनों से ही खराब फॉर्म में थीं। वह सभी प्रारूप में खेले गए नौ मैचों में सिर्फ एक बार दोहरे अंक तक पहुंची थी।
लेकिन शनिवार को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत की 14 रन की जीत में उनकी नाबाद 36 रन की पारी और पांच विकेट ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने ऐसे समय में फॉर्म में वापसी की जबकि टीम जून में इंग्लैंड और वेल्स में होने वाले टी20 विश्व कप की तैयारी कर रही है। दक्षिण अफ्रीका पहले ही यह श्रृंखला अपने नाम कर चुका है।
दीप्ति ने मैच के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं हमेशा खुद पर भरोसा रखती हूं और अपनी लाइन और लेंथ पर ध्यान केंद्रित करती हूं कि मुझे किस लाइन पर गेंदबाजी करनी है। आज मैंने अपनी ऑफ स्पिन गेंद पर ज्यादा ध्यान दिया।’’
उन्होंने कहा कि इस रणनीति से उन्हें आत्मविश्वास मिला। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ओस के कारण गेंदबाजों के लिए अपनी गति का अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया था, लेकिन अन्य गेंदबाजों के साथ हुई बातचीत से उन्हें इससे सामंजस्य बिठाने में मदद मिली।
दीप्ति ने कहा, ‘‘ यहां थोड़ी ओस थी। इसलिए हमने गेंदबाजों से भी बात की। सही लेंथ पर गेंदबाजी करो और इससे अच्छे परिणाम मिलेंगे।’’
दीप्ति पहले तीन टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में विकेट लेने में नाकाम रही थीं और सिर्फ दो रन बना पाई थीं। इस आलराउंडर ने कहा कि उन्होंने और ऋचा घोष (34 नाबाद) ने अपने विकेट बचाकर लंबी पारी खेलने का फैसला किया था।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ऋचा ने अच्छी बल्लेबाजी की। उन्होंने पारी का अंत भी अच्छे से किया। हम आपस में बात कर रहे थे कि हमें 20वें ओवर तक खेलना है और यह सुनिश्चित करना है कि हम अच्छी साझेदारी निभाएं।’’
दीप्ति ने कहा कि इस श्रृंखला में हार के बावजूद उनकी टीम टी20 विश्व कप में कई सबक लेकर उतरेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘इस श्रृंखला में हमारे लिए कुछ सकारात्मक पहलू रहे। विशेष कर आज की जीत ने हमें काफी आत्मविश्वास दिया है। हमें आगे भी खुद पर भरोसा बनाए रखना होगा।’’
भाषा
पंत
पंत