क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने वनडे विश्व कप प्रारूप में बदलाव पर आईसीसी की आलोचना की
क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने वनडे विश्व कप प्रारूप में बदलाव पर आईसीसी की आलोचना की
दुबई, 10 अगस्त (भाषा) क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट संघ (केएनसीबी) ने अगले वर्ष होने वाले आईसीसी पुरुष वनडे विश्व कप के प्रारूप में किए गए बदलावों की कड़ी आलोचना करते हुए सोमवार को कहा कि ये बदलाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को कमजोर करने का जोखिम पैदा करते हैं।
दोनों बोर्ड ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि इतने बड़े बदलाव किस प्रक्रिया के तहत लागू किए गए।
नए प्रारूप के अनुसार 2027 वनडे विश्व कप में कुल 14 टीम हिस्सा लेंगी। हालांकि, रैंकिंग में 12वें, 13वें और 14वें स्थान पर रहने वाली टीम के बीच पहले एक क्वालीफाइंग चरण खेला जाएगा जिसमें से केवल एक टीम मुख्य प्रतियोगिता में पहुंचेगी। इसके बाद कुल 12 टीम को छह-छह टीम के दो ग्रुप में बांटकर मुख्य दौर आयोजित किया जाएगा।
दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में होने वाले इस टूर्नामेंट से 18 महीने से भी कम समय पहले प्रारूप में बदलाव किए जाने पर दोनों क्रिकेट बोर्ड ने संयुक्त बयान जारी कर आईसीसी के फैसले पर नाराजगी जताई।
संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘क्रिकेट स्कॉटलैंड और रॉयल डच क्रिकेट संघ आईसीसी द्वारा पुरुष 50 ओवर विश्व कप के क्वालीफिकेशन मार्ग और टूर्नामेंट प्रारूप में इतने बड़े बदलाव किए जाने से बेहद निराश हैं। ’’
बयान में आगे कहा गया कि ये बदलाव एसोसिएट सदस्य देशों के क्रिकेट के लिए झटका हैं और हाल के वर्षों में वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार के लिए किए गए प्रयासों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
दोनों बोर्ड ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब क्रिकेट अपने दायरे का विस्तार करना, नए दर्शकों को जोड़ना और अंतरराष्ट्रीय खेल जगत में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है, उभरते हुए देशों के लिए सार्थक मौकों को कम करना बिल्कुल गलत संदेश देता है। ’’
क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने यह भी कहा कि उन्हें केवल इन बदलावों के प्रभाव पर ही नहीं बल्कि इन्हें लागू करने की प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता है।
बयान में कहा गया, ‘‘हम आईसीसी और अन्य सदस्य देशों के साथ मिलकर वैश्विक क्रिकेट को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। लेकिन इन बदलावों के प्रभाव और इन्हें लागू करने की प्रक्रिया, दोनों को लेकर हमारी गंभीर चिंताएं हैं। ’’
दोनों बोर्ड का मानना है कि ये बदलाव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं तथा यह मजबूत प्रशासन, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और सदस्य देशों के साथ प्रभावी संवाद की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
उन्होंने कहा कि एसोसिएट सदस्य देशों को इन बदलावों को समझने और उनके प्रभाव का आकलन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए था। साथ ही उन्होंने पूरी प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता की मांग की।
बयान में कहा गया, ‘‘अन्य एसोसिएट सदस्यों की तरह हम भी खेल के विकास में आईसीसी के निवेश की सराहना करते हैं। लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भरोसा तभी बना रह सकता है, जब क्वालीफिकेशन प्रणाली स्पष्ट, स्थिर और पूर्वानुमान योग्य हो, खासकर तब जब सदस्य देश खेल, वित्त और व्यावसायिक स्तर पर मौजूदा ढांचे के आधार पर बड़े फैसले लेते हैं। ’’
दोनों बोर्ड ने बताया कि बदलावों की घोषणा के बाद उन्होंने अन्य एसोसिएट सदस्य देशों के साथ मिलकर आईसीसी के साथ दो बैठकें कीं। इन बैठकों में उन्होंने बदलावों को लेकर आधिकारिक लिखित जानकारी और पूरी प्रक्रिया पर अधिक स्पष्टता की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में परिचालन संबंधी फैसलों को बेहतर बनाने और पूर्ण सदस्य देशों के साथ द्विपक्षीय योजना बैठकों में एसोसिएट सदस्यों को शामिल करने का अनुरोध किया गया था।
बयान के अनुसार, ‘‘दूसरी बैठक के दो सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आईसीसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला है। हमारे द्वारा उठाए गए गंभीर मुद्दों के प्रति यह निराशाजनक और अनादरपूर्ण रवैया है। ’’
अंत में क्रिकेट स्कॉटलैंड और केएनसीबी ने आईसीसी से अपील की कि वह एसोसिएट सदस्य देशों के साथ फिर से संवाद शुरू करे और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करे।
संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘हम आईसीसी से आग्रह करते हैं कि वह एसोसिएट सदस्यों के साथ दोबारा बातचीत करे और सभी सदस्य देशों के साथ खुले एवं पारदर्शी तरीके से चर्चा करते हुए वैश्विक क्रिकेट के दीर्घकालिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे। ’’
भाषा नमिता आनन्द
आनन्द

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