सीएसके के गेंदबाजी कोच सिमंस ने कहा, लड़के हारते-हारते थक गए थे

सीएसके के गेंदबाजी कोच सिमंस ने कहा, लड़के हारते-हारते थक गए थे

सीएसके के गेंदबाजी कोच सिमंस ने कहा, लड़के हारते-हारते थक गए थे
Modified Date: April 12, 2026 / 12:37 pm IST
Published Date: April 12, 2026 12:37 pm IST

चेन्नई, 12 अप्रैल (भाषा) चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के गेंदबाजी कोच एरिक सिमंस ने कहा कि लगातार तीन हार से टीम का मनोबल नहीं गिरा था, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि खिलाड़ी ‘हारते-हारते थक चुके थे।’

पांच बार के चैंपियन सीएसके ने दिल्ली कैपिटल्स को 23 रन से हराकर हार का सिलसिला तोड़ा और इस तरह से वर्तमान सत्र में अपना खाता खोला।

सिमंस ने मैच के बाद पत्रकारों से कहा, ‘‘हमारे खिलाड़ी इस मैच को जीतने के लिए वास्तव में बेताब थे। मुझे लगता है कि लगातार तीन मैच हारने के बाद हम हारते-हारते थक गए थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज ड्रेसिंग रूम का माहौल बहुत अच्छा है, लेकिन यह कभी खराब भी नहीं था। मुझे लगता है कि लोगों ने आरसीबी (रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु) के खिलाफ मैच देखा और सोचा कि ओह, हम बहुत पीछे हैं लेकिन हमें कभी ऐसा नहीं लगा कि हम बहुत पीछे हैं।’’

सिमंस ने कहा, ‘‘इस टूर्नामेंट में लय हासिल करना और सकारात्मक बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है। इस जीत के बाद टीम का माहौल सकारात्मक है। लेकिन इससे पहले अभ्यास सत्र के दौरान भी खिलाड़ियों का रवैया अच्छा रहा।’’

दक्षिण अफ्रीका के रहने वाले सिमंस से जब पूछा गया कि क्या पिछले मैचों में कुछ कमी रह गई थी, उन्होंने कहा, ‘‘नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। मेरे कहने का मतलब है कि थोड़ा आत्मविश्वास की कमी थी। यह अजीब बात है लेकिन अक्सर फील्डिंग ही टीम का मिजाज तय करती है और सरफराज ने जब हवा में लहराते हुए कैच लिया तो इससे पूरी टीम का मनोबल बढ़ जाता है। ये छोटी-छोटी चीजें काफी मायने रखती हैं।’’

संजू सैमसन ने 56 गेंद में 115 रन बनाए जबकि आयुष म्हात्रे ने भी 59 रन की तूफानी पारी खेली जिससे सीएसके ने दो विकेट पर 212 रन बनाए। इसके बाद जेमी ओवरटन के 18 रन देकर चार विकेट की मदद से सीएसके ने दिल्ली कैपिटल्स को 189 रन पर आउट कर दिया।

सैमसन की तारीफ करते हुए सिमंस ने कहा, ‘‘मुझे एमएस धोनी के साथ कई साल काम करने का सौभाग्य मिला है। वह उन सबसे शांत क्रिकेटरों में से एक हैं जिनसे मैं मिला हूं। संजू सैमसन भी उन्हीं की तरह हैं। वह खेल को उसी नजरिए से देखते हैं। मैंने उन्हें कभी बेचैन नहीं देखा।’’

भाषा

पंत सुधीर

सुधीर


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