अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध ज्योति ने कहा, खेल मेरे खून में रचा बसा है

अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध ज्योति ने कहा, खेल मेरे खून में रचा बसा है

अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध ज्योति ने कहा, खेल मेरे खून में रचा बसा है
Modified Date: February 28, 2026 / 01:50 pm IST
Published Date: February 28, 2026 1:50 pm IST

बेंगलुरु, 28 फरवरी (भाषा) लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय धावक की बेटी 21 वर्षीय ज्योति सिंह भारतीय हॉकी में अपनी अलग पहचान बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उन्होंने कहा कि खेल उनके खून में रचा बसा है।

झांसी में जन्मी ज्योति ने महिला जूनियर विश्व कप में भारत की कप्तानी की और पिछले साल सीनियर टीम में भी पदार्पण किया, जिसमें उन्होंने प्रो लीग के चार मैचों में भाग लिया। इसमें विश्व में नंबर एक नीदरलैंड के खिलाफ जीत भी शामिल है।

उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा, ‘‘मेरे पिता अंतरराष्ट्रीय एथलीट थे। मैं उनके साथ मैदान में दौड़ने और बैडमिंटन खेलने जाया करती थी।’’

ज्योति ने कहा, ‘‘मेरी चचेरी बहन ने मुझे हॉकी खेलने के लिए प्रेरित किया। वह सीनियर अकादमी का हिस्सा थी। जब भी वह गर्मियों की छुट्टियों में घर आती थी, मैं उसके साथ समय बिताती थी और उसकी तरह बनना चाहती थी।’’

ज्योति मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित महिला हॉकी अकादमी में प्रशिक्षण लेने के लिए वहां चली गईं, जो उनके करियर में निर्णायक साबित हुआ।

ज्योति ने कहा, ‘‘मेरे परिवार और कोच ने हमेशा मेरा साथ दिया। मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं था। खेलों से जुड़े परिवार से आना मेरे लिए सौभाग्य की बात है क्योंकि उन्होंने भी इसी तरह के अनुभव किए हैं।’’

भाषा

पंत

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