(अमित कुमार दास)
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) ध्रुव कपिला को मैच के दिन माचा चाय पीना पसंद है। तनीषा क्रास्टो का इस पर फैसला बेहद साफ है-‘इसका स्वाद घास जैसा है।’
कप में क्या होना चाहिए इस पर दोनों की पसंद भले ही अलग हो लेकिन बैडमिंटन कोर्ट पर भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी पिछले दो वर्षों में यह अच्छी तरह समझ चुकी है कि दोनों की भूमिका क्या है।
सिंगापुर सुपर 750 में तनीषा के साथ सेमीफाइनल तक पहुंचने वाले ध्रुव ने पीटीआई के सवाल के जवाब में कहा, ‘‘पिछले दो साल अच्छे रहे हैं। पहले साल हम यह समझते हुए आगे बढ़ रहे थे कि हमें क्या करना है और इसे कैसे हासिल करना है। लेकिन पिछले साल से हमने काफी कुछ सीखा और इस साल चीजें अच्छी चल रही हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे दिन भी आते हैं जब हम अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं होते, लेकिन फिर भी हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें कैसे अधिक स्थिर होना है और मैच में अच्छा प्रदर्शन जारी रखना है।’’
विश्व चैंपियनशिप 2025 के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली इस जोड़ी ने बुधवार को मकाऊ के लियोंग इओक चोंग और एनजी वेंग ची को 21-11, 21-11 से हराकर प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।
यह उस साझेदारी के लिए एक और कदम आगे है, जो मुख्य रूप से पेरिस ओलंपिक के बाद साथ आने के बाद से लगातार विकसित हुई है।
ध्रुव इससे पहले पुरुष युगल में एमआर अर्जुन के साथ खेलते थे जबकि तनीषा ने अनुभवी अश्विनी पोनप्पा के साथ पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था।
तनीषा की जिम्मेदारी कोर्ट के अगले हिस्से की है, जहां उन्हें आगे बढ़कर आक्रमण करना और मौके बनाने होते हैं।
ध्रुव उनके पीछे के हिस्से की जिम्मेदारी संभालते हैं, कोर्ट को कवर करते हैं और अपनी जोड़ीदार को अपना काम करने के लिए समय और जगह मुहैया कराते हैं।
मलेशियाई युगल कोच टैन किम हर के भारतीय टीम से दोबारा जुड़ने से इस जोड़ी के खेल में बड़ा बदलाव आया।
तनीषा ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि उनके आने से पहले मेरा खेल काफी हद तक महिला युगल जैसा था, मिश्रित युगल के हिसाब से उतना नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘उनके आने के बाद उन्होंने मेरे खेल में काफी बदलाव किया, खासकर आगे बढ़ने और अधिक आक्रामक होने के मामले में। इससे ध्रुव को पीछे अधिक मौके मिलते हैं और मुझे लगता है कि मिश्रित युगल में यही जरूरी है। इससे हमें सही रणनीति भी मिलती है।’’
ध्रुव ने भी टैन किम हर के तरीकों का असर महसूस किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘टैन के साथ ट्रेनिंग करना पूरी तरह अलग है। पहले हम गोपी सर और मनु भैया के साथ ट्रेनिंग करते थे। अब भी हम सभी के साथ ट्रेनिंग करते हैं, लेकिन मुख्य कार्यक्रम टैन कोच के जरिए चलता है। यह ज्यादा शारीरिक है, जिससे मुझे काफी मदद मिलती है। इससे मैं अपनी फिटनेस बनाए रखने और तेजी से आगे बढ़ने में सक्षम होता हूं।’’
पिछले दो वर्षों में उनका विकास किसी एक खास रणनीति को खोजने से अधिक इस बात को समझने पर आधारित रहा है कि जब चीजें योजना के मुताबिक नहीं हों तब दोनों को साथ मिलकर कैसे खेलना है।
ध्रुव ने कहा, ‘‘हम बस यह कोशिश कर रहे हैं कि जीतने पर बहुत खुश नहीं हों और हारने पर भी तटस्थ रहें। हम यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि हमें कैसे स्थिर रहना है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा नहीं होना चाहिए कि प्रदर्शन का ग्राफ लगातार ऊपर-नीचे होता रहे। पहले कभी-कभी ऐसा होता था लेकिन अब चीजें अच्छी चल रही हैं। इस साल हमने काफी कुछ सीखा है कि इसे कैसे बनाए रखना है।’’
यह स्थिरता उनकी साझेदारी का अहम हिस्सा बन गई है।
खराब प्रदर्शन के बाद दोनों साथ बैठकर मैच देखते हैं। वे सिर्फ यह पता लगाने पर ध्यान नहीं देते कि क्या गलत हुआ, बल्कि उन चीजों पर भी गौर करते हैं जो उन्होंने अच्छी कीं।
तनीषा ने कहा, ‘‘हमारे भी कुछ खराब दिन होते हैं लेकिन अंत में फिर से एक साथ आना बहुत महत्वपूर्ण है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम साथ बैठकर काफी मैच देखते हैं। इससे हमें यह समझने में मदद मिलती है कि वास्तव में क्या गलत हुआ और हमने क्या अच्छा किया। इससे काफी स्पष्टता मिलती है और हमें इस भावना से बाहर आने में मदद मिलती है कि हमने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया।’’
तनीषा ने कहा, ‘‘लेकिन दिन के अंत में हम एक-दूसरे के साथ खड़े रहते हैं। मुझे लगता है कि खराब दिनों से ज्यादा हमारे अच्छे दिन होते हैं।’’
यह भरोसा कोर्ट से बाहर भी नजर आता है। दोनों एक-दूसरे की गलतियों का विश्लेषण करने, हार के बाद एक-दूसरे का समर्थन करने और कभी-कभी एक-दूसरे की पसंद का मजाक उड़ाने में भी सहज हैं। जैसे माचा जैसी चाय का।
ध्रुव ने कहा, ‘‘मुझे यह बहुत पसंद है। खासकर जब मैं यात्रा कर रहा होता हूं तो काफी पीता हूं। मैच से पहले या मैच के बाद।’’
तनीषा ने तुरंत कहा, ‘‘हमें यहां इसके लिए माचा मंगवानी चाहिए।’’
हालांकि जब तनीषा से उनकी पसंद पूछी गई तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसका स्वाद घास जैसा है। मुझे माचा बिल्कुल पसंद नहीं है।’’
भाषा सुधीर पंत
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