दीया-मानुष ने व्यक्तिगत क्षति और हालिया खराब फॉर्म को पार पाकर पदक हासिल किया

दीया-मानुष ने व्यक्तिगत क्षति और हालिया खराब फॉर्म को पार पाकर पदक हासिल किया

दीया-मानुष ने व्यक्तिगत क्षति और हालिया खराब फॉर्म को पार पाकर पदक हासिल किया
Modified Date: September 25, 2026 / 04:05 pm IST
Published Date: September 25, 2026 4:05 pm IST

(भरत शर्मा)

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) विश्व रैंकिंग में आठवें नंबर पर काबिज जोड़ी दीया चिताले और मानुष शाह को हाल के खराब प्रदर्शन के कारण एशियाई खेलों की टेबल टेनिस प्रतियोगिता में पदक का दावेदार नहीं माना जा रहा था लेकिन उन्होंने मिश्रित युगल के सेमीफाइनल में जगह बनाकर पदक पक्का करके अपने आलोचकों को करारा जवाब दिया।

यही नहीं एशियाई खेलों से पहले उन्हें भावनात्मक चोट भी पहुंची क्योंकि दीया की निजी कोच पीटर एंगेल का जर्मनी में असमय निधन हो गया। तब यह खिलाड़ी एशियाई खेलों के लिए नागोया पहुंची थीं।

पूर्व भारतीय कोच रह चुकीं एंगेल ने 2015 में दीया को अपने संरक्षण में लिया और जर्मनी में कोचिंग देते हुए उनके खेल में काफी सुधार किया।

दीया के पिता पराग चिताले का कहना है कि भारतीय मिश्रित युगल जोड़ी का यह प्रतिष्ठित पदक एंगेल को सच्ची श्रद्धांजलि है जो टेबल टेनिस की दुनिया में काफी लोकप्रिय थी।

पेशे से शिक्षक पराग ने कहा, ‘‘ हम उसे पीटर की मौत के बारे में नहीं बता सके, यह घटना 10 दिन पहले हुई थी। जापान पहुंचने के बाद ही उसे टीम से पता चला। वह पीटर के बहुत करीब थी। पीटर के निधन और उनके हालिया प्रदर्शन को देखते हुए मुझे बहुत गर्व है कि उसने और मानुष ने पदक पक्का कर लिया।’’

जहां मानुष और दीया ने साल के शुरू में दो डब्ल्यूटीटी खिताब जीते, वहीं जून के बाद से उनका प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। ऐसे में चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की मौजूदगी के बावजूद पदक हासिल करना बड़ी उपलब्धि है।

जापान में पदक की सबसे बड़ी उम्मीद विश्व की नंबर तीन पुरुष युगल जोड़ी मानुष और मानव ठक्कर से थी, लेकिन कठिन ड्रॉ के कारण वे केवल दूसरे दौर तक ही पहुंच सके।

मानुष और दीया की जोड़ी बाएं हाथ से दाएं हाथ से खेलने में माहिर है। बाएं हाथ से खेलने वाले मानुष दोनों तरफ से अपनी ताकत का इस्तेमाल करते हैं और दीया का मुख्य काम अपने साथी के लिए विजयी शॉट बनाने में मदद करना है।

मानुष ने क्रिकेट के जरिए खेल जगत में कदम रखा, लेकिन नौ साल की उम्र में लगी चोट ने उन्हें रैकेट वाले खेल की ओर मोड़ दिया। उनके पिता उत्पल शाह स्वयं टेबल टेनिस खेलते थे, इसलिए इस खेल में में उनका प्रवेश काफी सहज रहा।

उत्पल शाह ने कहा, ‘‘शुरुआत में वह क्रिकेट खेलता था, लेकिन चोट के बाद मुझे टेबल टेनिस खेलते देखकर उसने टेबल टेनिस खेलना शुरू कर दिया। हमें बेहद गर्व है कि मानुष और दीया ने देश के लिए पदक जीता है।’’

भाषा

पंत नमिता

नमिता


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