कप्तानी के दबाव के कारण सूर्यकुमार बल्लेबाजी पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर सके

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कप्तानी के दबाव के कारण सूर्यकुमार बल्लेबाजी पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित नहीं कर सके

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  • Publish Date - June 6, 2026 / 05:24 PM IST,
    Updated On - June 6, 2026 / 05:24 PM IST

… कुशान सरकार …

मुल्लांपुर, छह जून (भाषा) पिछले वर्ष के अंत में आयोजित एक सम्मान समारोह के दौरान भारतीय टी20 कप्तान सूर्यकुमार यादव ने छात्रों के साथ संवाद में अपने प्रदर्शन को लेकर उठे सवालों का जवाब हल्के-फुल्के अंदाज में दिया था। एक छात्र ने तब 2025 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की 19 पारियों में उनके 218 रन के अपेक्षाकृत कम स्कोर के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “मेरे 14 सिपाही मेरा काम संभाल रहे हैं, उन्हें पता है कि जिस दिन मैं चल पड़ा, क्या होगा।” यह टिप्पणी उस दौर की ओर संकेत करती है जब भारतीय टीम लगातार जीत दर्ज कर रही थी, लेकिन कप्तान के रूप में सूर्यकुमार का व्यक्तिगत प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ था। उनका ध्यान व्यक्तिगत योगदान से अधिक टीम प्रबंधन पर केंद्रित होता चला गया, जिससे उनकी बल्लेबाजी प्रभावित होती दिखाई दी। पेशेवर खेल की दुनिया में, हालांकि, सिर्फ प्रदर्शन को ही प्रमुख पैमाना माना जाता है। पैंतीस वर्ष की आयु पार कर चुके सूर्यकुमार यादव के लिए अब अपने 113 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 3272 रनों के आंकड़े में उल्लेखनीय इजाफा करना कठिन माना जा रहा है। यह टिप्पणी उस स्थिति की ओर संकेत करती थी जिसमें वे लंबे समय तक चले खराब फॉर्म के बावजूद मानसिक रूप से सहज दिखाई दे रहे थे। कई बार उनका आत्मविश्वास आत्ममुग्धता की सीमा को छूता प्रतीत होता था। उनके गिरते प्रदर्शन की खास बात यह रही कि वे एक ऐसे बल्लेबाज के रूप में कप्तान बने थे जिन्होंने टी20 क्रिकेट की बल्लेबाजी की परिभाषा बदलने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन कप्तानी संभालने के बाद ऐसा लगा कि उन्होंने बल्लेबाजी को पीछे और नेतृत्व को आगे रख दिया। उनका यह कथन कि “मेरे 14 खिलाड़ी मेरा काम कर रहे हैं” कई लोगों को अपरिपक्व भी लगा। समय के साथ यह भी स्पष्ट हुआ कि जब कप्तान लगातार रन नहीं बनाता, तो ड्रेसिंग रूम में उसका प्रभाव भी प्रभावित होता है। लंबे समय तक खराब फॉर्म में रहने पर योजनाओं को लागू कराना भी कठिन हो जाता है। उनकी बल्लेबाजी में गिरावट 2023 वनडे विश्व कप के बाद से मानी जाती है। तत्कालीन कोच राहुल द्रविड़ ने भी संकेत दिया था कि उन्हें केवल ऑफ साइड के बजाय मैदान के अन्य हिस्सों में भी शॉट्स विकसित करने होंगे। उनकी बल्लेबाजी शैली, विशेषकर कलाईयों पर आधारित प्रसिद्ध ‘सुप्ला शॉट’ समय के साथ विपक्षी गेंदबाजों द्वारा पढ़ लिया गया। इसके बाद शरीर पर आने वाली सीधी गेंदें उनके लिए लगातार चुनौती बनी रहीं। टी20 टीम की कप्तानी को लेकर भी बीते समय में कई बार चर्चा हुई। 2024 में टी20 विश्व कप जीत के बाद नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाएं सामने आईं, जिसमें चयन समिति और टीम प्रबंधन के बीच विभिन्न विचार देखने को मिले। अंततः सूर्यकुमार यादव को कप्तान बनाए रखने का निर्णय लिया गया, हालांकि इसके पीछे कई आंतरिक कारक भी बताए जाते हैं। टीम के एक बेहद अनुभवी खिलाड़ी से जब कप्तानी के बारे में राय ली गई तो उन्होंने सूर्यकुमार का पक्ष लिया। यह बात भी किसी से छुपी नहीं है कि सूर्यकुमार और हार्दिक पांड्या के बीच ड्रेसिंग रूम में संबंध उतने सहज नहीं बताए जाते। एशिया कप की जीत सूर्यकुमार यादव के लिए वरदान साबित हो सकती थी, लेकिन अंततः यह उनके लिए अभिशाप जैसी बन गई। टूर्नामेंट के दौरान भारत ने पाकिस्तान को तीन बार हराया, लेकिन पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों टीमों के बीच तनाव और अधिक बढ़ गया। टूर्नामेंट में सूर्यकुमार यादव द्वारा अपने पाकिस्तानी समकक्ष सलमान अली आगा से हाथ नहीं मिलाने और जीत को भारतीय सशस्त्र बलों को समर्पित करने के बाद वह कई भारतीय प्रशंसकों के बीच एक ‘नायक’ की तरह बन गए। कुछ लोगों का यह भी मानना था कि इस तरह के विवाद की आवश्यकता नहीं थी। इस फैसले पर अलग-अलग मत सामने आए। लेकिन उन्हें अपने आक्रामक स्वभाव वाले कोच गौतम गंभीर का समर्थन प्राप्त था। इसके बावजूद, पूरे टूर्नामेंट में उनकी खराब फॉर्म सबसे अधिक चर्चा का विषय रही। छह पारियों में मात्र 72 रन बनाने के बाद एक पत्रकार द्वारा उनकी बल्लेबाजी पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा था, “मैं आउट ऑफ रन हूं, आउट ऑफ फॉर्म नहीं,” लेकिन यह बयान उनकी स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर सका। विशेषज्ञों का मानना है कि कप्तानी और बल्लेबाजी दोनों भूमिकाओं के बीच संतुलन बनाए रखना उनके करियर की सबसे बड़ी चुनौती बन गया। इसके बाद घरेलू सरजमीं पर हुए विश्व कप में भी अमेरिका के खिलाफ मैच को छोड़कर उनका प्रदर्शन फीका ही रहा। सूर्यकुमार यादव ने ओलंपिक और 2028 में होने वाले टी20 विश्व कप में खेलने के सपने को लेकर भी बात की थी। टी20 विश्व कप के बाद टीम चयन से जुड़े बीसीसीआई के एक सूत्र ने पीटीआई से कहा था, “हर किसी को सपने देखने का अधिकार है। सिर्फ लॉस एंजिलिस 2028 ही नहीं, बल्कि ब्रिस्बेन 2032 और अगर 2036 में अहमदाबाद मेजबानी करता है, तब भी। लेकिन अगली श्रृंखला तक पहुंचने के लिए सिर्फ रन ही उन्हें आगे ले जाएंगे।” सूर्यकुमार के लिए आईपीएल का बीता सत्र भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। उन्होंने धमाकेदार अंदाज में आगाज किया, लेकिन लय को बरकरार नहीं रख सके। भाषा आनन्द नमितानमिता