शीर्ष लीगों की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने के बाद भविष्य का खाका तैयार किया गया: एआईएफएफ
शीर्ष लीगों की सर्वोत्तम प्रथाओं का अध्ययन करने के बाद भविष्य का खाका तैयार किया गया: एआईएफएफ
… अभिषेक होरे …
नयी दिल्ली, 14 जनवरी (भाषा)) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने अगले 21 वर्षों की अपनी योजना तैयार करते समय स्पेन, जर्मनी और इंग्लैंड की दुनिया की शीर्ष फुटबॉल लीगों से उदाहरण लिया हैं जिसके तहत एक ताकतवर संचालन समिति और एक प्रबंधन समिति की स्थापना की जाएगी। इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और आई-लीग के लिए नयी प्रशासनिक संरचना के तहत एआईएफएफ ने दोनों लीग के नियामक और संचालन से जुड़े कामकाज की निगरानी के लिए संचालन समिति और प्रबंधन समिति बनाई है। एआईएफएफ ने मंगलवार को आईएसएल के 14 क्लबों के साथ संचालन और प्रबंधन समिति से जुड़ी नीतियां साझा की जिनमें 2025-26 सत्र भी शामिल है। इसके चार्टर के अनुसार, लीग का संचालन और प्रबंधन इन दोनों समितियों द्वारा किया जाएगा। संभावित व्यावसायिक अधिकार भागीदार (कमर्शियल पार्टनर) को दोनों समितियों में तीन-तीन स्थान दिये जायेंगे। एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे ने पीटीआई से कहा, ‘‘यह अगले 21 वर्षों की योजना है, जिसमें यह बताया गया है कि देश की शीर्ष दो फुटबॉल लीग का प्रबंधन, संचालन, प्रचार और विकास इन दो संस्थाओं के माध्यम से कैसे किया जाएगा। हमने दुनिया की कुछ बेहतरीन लीग से सीख लेकर भारत की शीर्ष दो फुटबॉल लीग में वैश्विक सर्वश्रेष्ठ तरीकों को लागू करने का प्रस्ताव रखा है।” हितधारकों के प्रस्ताव के अनुसार 22 सदस्यीय संचालन समिति की अध्यक्षता एआईएफएफ के अध्यक्ष कर सकते हैं। यह आईएसएल के लिए सर्वोच्च निगरानी संस्था होगी। प्रबंधन समिति लीग के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी संभालेगी और यह एआईएफएफ के महासचिव के नेतृत्व में काम करेगी। संचालन समिति में 14 क्लब मालिक, एआईएफएफ के तीन पदाधिकारी, वाणिज्यिक भागीदार के तीन नामित सदस्य और दो ऐसे स्वतंत्र सदस्य शामिल होंगे जिनका किसी तरह का हितों का टकराव नहीं होगा। इस निकाय की साल में एक बार बैठक होगी। यह बैठक आमतौर पर लीग शुरू होने से तीन महीने पहले होगी और वित्तीय मामलों सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णय ले सकेगा। चौबे ने कहा, ‘‘ हमने यह समझने के लिए गहराई से अध्ययन किया है कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ फुटबॉल लीग कैसे चलाई जाती हैं और उन सभी लीग की संरचनाओं को ध्यान में रखकर हमने ये नीतियां तैयार की हैं।’’ प्रबंधन समिति में आईएसएल के के पांच क्लबों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शामिल होंगे, जिनमें पिछले सत्र के विजेता और उपविजेता क्लबों से दो प्रतिनिधि होंगे, जबकि तीन अन्य क्लबों द्वारा चुने जाएंगे। इसके अलावा वाणिज्यिक भागीदार के तीन नामित सदस्य और एआईएफएफ के तीन पदाधिकारी भी इस समिति का हिस्सा होंगे। प्रबंधन समिति लीग के दौरान आवश्यकता के अनुसार और नियमित रूप से बैठक करेगी। यह समिति लीग के रोजमर्रा के संचालन से जुड़े मामलों पर निर्णय लेगी। इन दोनों के तहत लीग को पेशेवर तरीके से चलाने के लिए छह अन्य समितियां भी होंगी। ये समितियां प्रतियोगिता नियम, आचार संहिता और अनुशासनात्मक ढांचे को तैयार करने, मंजूरी देने और लागू करने का काम करेंगी। ये नियम एआईएफएफ और एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) और फीफा के नियमों के अनुरूप होंगी। इन समितियों का दायरा ईमानदारी, नियमों का पालन, निगरानी, रणनीतिक देखरेख और यह सुनिश्चित करने तक होगा कि आईएसएल की नीतियां और संचालन एआईएफएफ के फुटबॉल विकास लक्ष्यों और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप हों। निष्पक्षता और पारदर्शिता भी इसके दायरे में आएगी। इस बीच एआईएफएफ अभी भी एएफसी के जवाब का इंतजार कर रहा है कि क्या इस सत्र में अनिवार्य संख्या से कम मैच खेलने के बावजूद आईएसएल क्लबों को एएफसी प्रतियोगिताओं में जगह मिलेगी या नहीं। एआईएफएफ प्रमुख ने कहा, ‘‘हमने उन्हें पहले ही पत्र लिख दिया है, अब फैसला एएफसी को करना है।” आमतौर पर एक टीम को एक सत्र में 24 मैच खेलने होते हैं, लेकिन इस बार संक्षिप्त सत्र के कारण आईएसएल की टीमें केवल 13 मैच ही खेलेंगी। भाषा आनन्द पंतपंत

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