नयी दिल्ली, तीन मार्च (भाषा) दो बार की ओलंपिक पदक विजेता भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधू ने मंगलवार को माना कि दुबई में तीन दिन की मुश्किल के दौरान उन्हें धैर्य रखने में मुश्किल हुई और वह चाहती हैं कि यह उनकी जिंदगी का पहला और आखिरी ऐसा अनुभव हो।
अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर बमबारी और उसके बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में वायु क्षेत्र बंद होने के कारण सिंधू दुबई में फंस गई थीं। बर्मिंघम में ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप से नाम वापस लेने के बाद वह अब देश लौट आई हैं। उन्हें दुबई के रास्ते बर्मिंघम जाना था लेकिन यात्रा में रुकावटों के कारण ऐसा नहीं हो सका।
सिंधू ने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) द्वारा आयोजित एक मीडिया बातचीत के दौरान कहा, ‘‘बेशक बहुत तनाव था और यह डरावना था। मुझे लगता है कि शायद एकमात्र चीज शांत रहना थी। मुझे पता है कि यह आदर्श स्थिति नहीं है जहां आप कहते हैं कि हम शांत हैं लेकिन अंदर से ऐसा नहीं था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘असल में यह बहुत तनावपूर्ण है लेकिन मुझे लगता है कि यह एक अनुभव है और मुझे उम्मीद है कि यह इस तरह का पहला और आखिरी अनुभवी होगा। लेकिन हां, मुझे लगता है कि हम शांत थे, पूरी टीम शांत थी।’’
सिंधू और उनके इंडोनेशियाई कोच इरवांस्याह आदि प्रतामा सहित उनकी टीम के सदस्य दुबई हवाई अड्डे के पास हुए एक धमाके के बाद बाल-बाल बच गए। उन्हें पहले दौर में थाईलैंड की सुपानिदा केटथोंग का सामना करना था लेकिन उन्हें टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ा।
सिंधू ने कहा कि उन्होंने इस बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए ब्रिटेन जाने के हर विकल्प को देखा जिसमें सड़क के रास्ते ओमान जाना या भारत आकर बर्मिंघम पहुँचने के लिए दूसरा रास्ता लेना शामिल था।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हर मुमकिन कोशिश की लेकिन कोई फ्लाइट नहीं थी। और अगर मैं दूसरा रास्ता लेती तो भी शायद मैं गुरुवार को पहुंच पाती इसलिए आप कुछ नहीं कर सकते।’’
सिंधू ने कहा, ‘‘मुझे कल शाम एमिरेट्स से फोन आया कि भारत के लिए उड़ान हैं। मुझे दुख था कि मैं टूर्नामेंट नहीं खेल सकी। लेकिन मेरी सुरक्षा बहुत जरूरी थी। जान बचना बहुत जरूरी था तो अब सब ठीक है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह थोड़ी दुख की बात है कि मैं खेल नहीं पाई। लेकिन फिर भी सुरक्षित रहना जरूरी है।’’
सिंधू ने देश में सुरक्षित वापसी में मदद करने के लिए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू, खेल मंत्री मनसुख मांडाविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और दुबई में भारतीय महावाणिज्य दूत का शुक्रिया अदा किया।
सिंधू ने कहा कि वह और उनके कोच 28 फरवरी को दोपहर एक बजे दुबई हवाई अड्डे पर उतरे और 15 मिनट में उन्हें बताया गया कि सभी उड़ानें निलंबित कर दी गई हैं और यह उनके मुश्किल समय की शुरुआत थी।
उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, ‘‘मेरे हवाई अड्डे पर उतरने से कुछ घंटे पहले मेरे साथी खिलाड़ी दुबई से बर्मिंघम के लिए उड़ान भरी थी। तो यह उन कुछ घंटों की बात थी, अगर मैं पहले चली जाती तो मैं बर्मिंघम पहुंच जाती।’’
सिंधू ने कहा कि होटल पहुंचने के बाद भी उन्हें आसमान में तेज आवाजें सुनाई दे रही थीं।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं होटल के अंदर थी तो मुझे भी वे जोरदार आवाजें पांच, छह बार सुनाई दीं और यह डरावना था। और हमें अपने फोन पर ये आपात संदेश भी मिले कि घर के अंदर रहें।’’
विश्व बैडमिंटन महासंघ (बीडब्लयूएफ) ने खास हालात को देखते हुए 2026 ऑल इंग्लैंड ओपन में नहीं खेलने के लिए सिंधू पर लगने वाले पांच हजार डॉलर के जुर्माने को माफ कर दिया है।
सिंधू ने कहा, ‘‘आम तौर पर जब आप सुपर 1000 या सुपर 750 जैसे बड़े टूर्नामेंट में नहीं खेलते हैं तो दुनिया के शीर्ष 15 खिलाड़ियों पर पांच हजार डॉलर का जुर्माना लगता है। लेकिन अगर कोई वजह है, अगर आप चोटिल हैं या जाहिर है ये हालात ऐसे हैं जिनकी आपने कभी उम्मीद नहीं की की।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने बीडब्ल्यूएफ को अपनी स्थिति समझाई और उन्होंने कहा कि ठीक है हम जुर्माना माफ कर देंगे।’’
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