बाधा धावक शिर्से राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ के कारण एशियाई खेलों से बाहर

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बाधा धावक शिर्से राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान हुए ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ के कारण एशियाई खेलों से बाहर

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  • Publish Date - August 4, 2026 / 07:19 PM IST,
    Updated On - August 4, 2026 / 07:19 PM IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) भारत के शीर्ष 110 मीटर बाधा दौड़ धावक तेजस शिर्से ने मंगलवार को कहा कि वह आगामी एशियाई खेलों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे क्योंकि उन्होंने हाल ही में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में बाएं पैर में दो ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ के बावजूद प्रतियोगिता में भाग लिया था।

शिर्से ने ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में 13.76 सेकंड का समय निकालकर 110 मीटर बाधा दौड़ के फाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय बनने का इतिहास रचा था। फाइनल में उनका बायां पैर पूरी तरह टेप से बंधा हुआ था। गंभीर दर्द के बावजूद उन्होंने दौड़ पूरी की, लेकिन 15.39 सेकंड के समय के साथ आठ धावकों में अंतिम स्थान पर रहे।

शिर्से ने इंस्टग्राम पर एक भावुक पोस्ट में लिखा, ‘‘यह वह पोस्ट नहीं है जिसे लिखने के बारे में मैंने सोचा था। मुझे लगा था कि इस समय मेरे हाथ में पदक होगा। मैं जीतने के लिए पूरी तरह तैयार था, लेकिन अब मेरे हाथ में एमआरआई रिपोर्ट है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे बाएं पैर में दो स्ट्रेस फ्रैक्चर हैं। मेरा सपना फिलहाल थम गया है और मेरा पूरा सत्र समाप्त हो गया है।’’

इस 24 साल के एथलीट ने स्वीकार किया कि 19 सितंबर से जापान में शुरू होने वाले एशियाई खेलों में खेलने का उनका सपना भी टूट गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘सबसे परेशान करने वाली बात केवल एक प्रतियोगिता में हार का सामना करना नहीं है, बल्कि यह जानना है कि मैंने एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया था और अब मैं उस ‘स्टार्ट लाइन’ पर खड़ा भी नहीं हो पाऊंगा।’’

शिर्से ने कहा, ‘‘ मैं चोट के कारण अब तब नौ बड़ी प्रतियोगिताओं में स्पर्धा करने से चूक गया हूं। आज मेरे पास वापसी की कोई कहानी नहीं है। मेरे पास सिर्फ दर्द, कई सवाल और कुछ फैसलों को लेकर पछतावा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक सप्ताह पहले तक जो भविष्य साफ दिखाई दे रहा था, अब वह धुंधला हो गया है। इस अध्याय के बाद जब मुझे पता चल जाएगा कि मैं कौन हूं, तब मैं वापस आऊँगा।’’

शिर्से ने बताया कि उनके पास फाइनल नहीं दौड़ने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने अपने शरीर की चेतावनी को नजरअंदाज कर दिया।

शिर्से ने कहा, ‘‘प्रतियोगिता से पहले मुझे चोट का अहसास नहीं हुआ था। वार्म-अप के दौरान कुछ बदलाव महसूस हुआ। हर खिलाड़ी उस पल को समझता है, जब शरीर कहता है कि कुछ गलत है, लेकिन दिल मानने को तैयार नहीं होता। इसलिए मैंने दौड़ लगाई। इसलिए नहीं कि मुझे जीत का भरोसा था, बल्कि इसलिए कि वर्षों की मेहनत के बाद मैदान छोड़ना आसान नहीं होता।’’

सोशल मीडिया पर चोट को लेकर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘मैंने ऐसी टिप्पणियां पढ़ीं कि मैं इसलिए लंगड़ा रहा था क्योंकि मैं आखिरी स्थान पर था। लेकिन ऐसा नहीं है, मैं इसलिए लंगड़ा रहा था क्योंकि मेरे पैर में फ्रैक्चर था।’’

शिर्से ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी की सहानुभूति नहीं चाहिए।

उन्होंने लिखा, ‘‘लंबे समय बाद पहली बार मुझे सचमुच नहीं पता कि आगे क्या होगा। लेकिन इस खेल ने मुझे इतना जरूर सिखाया है कि आपकी सबसे मजबूत पहचान आपकी सबसे तेज दौड़ से नहीं बनती। फिलहाल मैं किसी से सहानुभूति नहीं मांग रहा हूं।’’

शिर्से को उम्मीद है कि वह इस चोट से उबर कर अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगे।

उन्होंने कहा, ‘‘लोग पूछते हैं कि मैं अपनी यात्रा क्यों साझा करता हूं। कुछ कहते हैं कि ऐसा करने से नजर लग जाती है। हो सकता है, लेकिन मैंने अपनी कहानी इसलिए साझा करनी शुरू की थी ताकि अगर मेरे अनुभव से एक भी व्यक्ति यह विश्वास कर सके कि असफलताएं अंत नहीं होतीं, तो मैं अपनी सफलताओं और संघर्षो, दोनों के बारे में ईमानदारी से बताता रहूंगा।’’

भाषा आनन्द सुधीर

सुधीर