डोपिंग के कारण निलंबित किए गए खिलाड़ियों की संख्या में कीनिया से आगे निकला भारत
डोपिंग के कारण निलंबित किए गए खिलाड़ियों की संख्या में कीनिया से आगे निकला भारत
नयी दिल्ली, तीन अप्रैल (भाषा) एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) की डोपिंग उल्लंघन के कारण निलंबित किए गए खिलाड़ियों और खेल से जुड़े सहयोगी स्टाफ के सदस्यों की सूची में भारत कीनिया को पीछे छोड़कर शीर्ष पर पहुंच गया है।
भारत के ट्रैक एंड फील्ड के 148 एथलीट और उनके सहयोगी स्टाफ के सदस्य डोपिंग मामलों के कारण निलंबित हैं, जो अफ्रीकी देश से दो अधिक हैं।
खिलाड़ियों की यह नई सूची इस साल एक अप्रैल तक तक की है। इस सूची में रूस 66 निलंबित एथलीटों के साथ तीसरे स्थान पर है।
इस सूची में शामिल प्रमुख भारतीय एथलीटों में महिलाओं की 100 मीटर में राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक दुती चंद भी शामिल हैं, जो दिसंबर 2022 से चार साल का निलंबन झेल रही हैं। उनके अलावा जुलाई 2030 तक छह साल का निलंबन झेल रहे मध्यम दूरी के धावक परवेज खान और तमिलनाडु की फर्राटा धाविका शेखर धनलक्ष्मी भी इसका हिस्सा हैं। धनलक्ष्मी को 2025 में आठ साल के लिए निलंबित किया गया था।
इस सूची में राष्ट्रीय स्तर के मामलों और फैसलों के कारण निलंबन झेल रहे व्यक्तियों को शामिल किया गया है।
इसमें वे व्यक्ति भी शामिल हैं जिन्होंने डोपिंग से इतर अपराध किए हैं जैसे कि डोपिंग के नमूनों से छेड़छाड़ करना, परीक्षण से बचना, तस्करी करना या लापता हो जाना। इसके लिए डोपिंग अपराध के समान ही दंड का प्रावधान है।
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट विश्व एथलेटिक्स की एक स्वतंत्र डोपिंगरोधी निगरानी संस्था है। इसका अधिकार क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीटों और उनके सहायक स्टाफ तक है।
डोपिंग की समस्या से निपटने के लिए भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें देश में उन केंद्रों का पता लगाना शामिल है जो इसमें संलिप्त हैं।
कोच भी खिलाड़ियों को डोपिंग के लिए उकसाते हैं और इसलिए एएफआई ने सभी कोच के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य कर दिया है। जो कोच अपना पंजीकरण नहीं कराएंगे उन्हें काली सूची में डाल दिया जाएगा और उनसे प्रशिक्षण पाने वाले खिलाड़ी राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए अयोग्य माने जाएंगे।
भाषा
पंत नमिता
नमिता

Facebook


