(अजय मसंद)
नागोया, 28 सितंबर (भाषा) भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने सोमवार को यहां एशियाई खेलों की महिला 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में एक गलत निशाने से स्वर्ण पदक गंवाया लेकिन दर्द, थकान और दबाव के बीच लगातार पांच शूट-ऑफ के रोमांचक दौर के बाद रजत पदक पक्का करने में सफल रही।
हैदराबाद की 21 वर्षीय ईशा इस वर्ग की मौजूदा विश्व नंबर एक हैं। उन्होंने रजत की दौड़ में बने रहने के लिए वियतनाम की टी थू विन्ह के खिलाफ तीन शूट-ऑफ जीते। इसके बाद स्वर्ण पदक के मुकाबले में उन्हें चीन की शियाओ जियारुईशुआन के साथ दो और शूट-ऑफ से गुजरना पड़ा।
निर्धारित सीरीज के बाद दोनों के 38-38 अंक थे, लेकिन अंतिम निशाने में ईशा चूक गईं और उन्हें दूसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। कंधे के दर्द और करीबी एलिमिनेशन से उबरते हुए ईशा ने बेहद नाटकीय फाइनल में अपनी ओर से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया ।
उनका रजत पदक सोमवार को निशानेबाजी रेंज पर भारत का एकमात्र पदक रहा ।
ईशा ने कहा ,‘‘ यह शानदार था और मैंने ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं किया । यह मेरे अद्भुत अनुभवों में से एक है और बेहद रोमांचक होने के बावजूद यह जबर्दस्त मुकाबला था ।’’
ईशा ने 2023 हांगझोउ खेलों में 25 मीटर स्पोटर्स पिस्टल व्यक्तिगत रजत, टीम वर्ग में स्वर्ण , 10 मीटर एयर पिस्टल व्यक्तिगत और टीम स्पर्धा में रजत पदक जीता था ।
उत्तर कोरिया की किम ह्योन सुक ने ईशा के खिलाफ शूट-ऑफ में हारने के बाद 34 अंक के साथ कांस्य पदक जीता।
इससे पहले दो बार की ओलंपिक पदक विजेता मनु भाकर इस स्पर्धा के फाइनल में जगह बनाने में नाकाम रहने के बाद एशियाई खेलों से पदक के बिना लौटेंगी।
मनु 579 अंक के साथ 11वें स्थान पर रहीं, जो फाइनल में पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं था। ईशा ने क्वालीफिकेशन में 580 अंक जुटाए थे।
मनु के लिए यह एशियाई खेलों का निराशाजनक अभियान रहा। इससे पहले वह महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में भी पदक जीतने में नाकाम रही थीं।
भारतीय महिला टीम भी पदक की दौड़ में थी, लेकिन अहम समय पर राही सरनोबत की एक चूक टीम पर भारी पड़ी।
सरनोबत ने चौथी सीरीज (प्रत्येक सीरीज में पांच निशाने लगाने होते हैं) में 39 अंक का निराशाजनक स्कोर किया। इसके बाद भारत की पदक की उम्मीदें समाप्त हो गईं। सरनोबत 568 अंक के साथ 30वें स्थान पर रहीं।
एशियाड 2018 में स्वर्ण जीतने वाली सरनोबत ने कहा ,‘‘ मेरे कैरियर में पहली बार ऐसा कुछ हुआ है और मुझे नहीं पता कि ऐसा कैसे हुआ ।’’
भाषा मोना सुधीर
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