रुतुराज को संपूर्ण कप्तान बनने में अभी समय लगेगा: स्टीफन फ्लेमिंग

Ads

रुतुराज को संपूर्ण कप्तान बनने में अभी समय लगेगा: स्टीफन फ्लेमिंग

  •  
  • Publish Date - May 19, 2026 / 11:20 AM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 11:20 AM IST

चेन्नई, 19 मई (भाषा) चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने स्वीकार किया कि कप्तान के रूप में रुतुराज गायकवाड़ को अब भी काफी सुधार करने की जरूरत है।

सीएसके की इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के प्लेऑफ में पहुंचने की उम्मीदों को सनराइजर्स हैदराबाद से पांच विकेट की हार के कारण करारा झटका लगा है। उसकी टीम अब अगर मगर की कठिन डगर में फंस गई है।

सीएसके को अब गुरुवार को न सिर्फ गुजरात टाइटंस के खिलाफ अपना अंतिम लीग मैच जीतना होगा बल्कि अन्य मैचों के परिणाम पर भी निर्भर रहना होगा।

फ्लेमिंग ने पिछले तीन सत्र से सीएसके के कप्तान 29 वर्षीय गायकवाड़ के बारे में कहा,‘‘रुतुराज बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं। उन्होंने क्रिकेट जगत के सर्वश्रेष्ठ कप्तानों में से एक (महेंद्र सिंह धोनी) से कमान संभाली है। इसलिए इसमें थोड़ा समय लगेगा।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वह अपनी भूमिका अच्छी तरह से निभा रहा है और खिलाड़ियों की बीच भी उसके लिए काफी सम्मान है। वह लगातार सीख रहा है और उस पर अच्छी तरह से अमल भी कर रहा है। इसलिए इसमें कोई संदेह नहीं है कि वह भविष्य में फ्रेंचाइजी का बेहतरीन कप्तान साबित होगा।’’

गायकवाड इस सत्र में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और उनका औसत 29 है। उन्होंने अब तक खेले गए 13 मैचों में केवल दो अर्धशतक ही लगाए हैं।

फ्लेमिंग ने कहा, ‘‘हमने टीम में काफी बदलाव किए और हम सत्र की शुरुआत से ही जानते थे कि हम अन्य टीमों की तुलना में थोड़ा पीछे हैं। अच्छी शुरुआत करना बहुत अच्छा होता, लेकिन हमारी शुरुआत खराब रही। लेकिन बाद में हमने अच्छी वापसी की जो वास्तव में संतोषजनक है।’’

फ्लेमिंग ने कहा कि पिंडली की चोट के कारण धोनी के एक भी मैच में न खेलने के बावजूद डगआउट में उनकी उपस्थिति प्रेरणादायी रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं जानता हूं कि धोनी के खेलने को लेकर काफी चर्चा हो रही है। लेकिन उन्होंने इस साल टीम के साथ काफी समय बिताया जो टीम के लिए और युवा खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। इस तरह से उन्होंने बड़ा योगदान दिया है। भले ही उन्होंने कोई मैच नहीं खेला लेकिन टीम पर उनका काफी प्रभाव रहा है।’’

भाषा

पंत

पंत