देश का खाद्य तेल आयात 2025-26 में तीन प्रतिशत बढ़ा: उद्योग निकाय

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देश का खाद्य तेल आयात 2025-26 में तीन प्रतिशत बढ़ा: उद्योग निकाय

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  • Publish Date - May 19, 2026 / 11:46 AM IST,
    Updated On - May 19, 2026 / 11:46 AM IST

नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) भारत का खाद्य तेल आयात वित्त वर्ष 2025-26 में तीन प्रतिशत बढ़कर 166.51 लाख टन हो गया। नेपाल से शुल्क-मुक्त आयात में तेज वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही। उद्योग निकाय एसईए ने यह जानकारी दी।

देश का खाद्य तेल आयात वित्त वर्ष 2024-25 में 161.82 लाख टन रहा था।

उद्योग निकाय सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) ने मंगलवार को कहा कि दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (एसएएफटीए) समझौते के तहत भारतीय बाजारों में शून्य-शुल्क पहुंच का लाभ उठाने वाले नेपाल ने इस दौरान भारत को 7.36 लाख टन खाद्य तेल निर्यात किया, जो 2024-25 वर्ष के 3.45 लाख टन की तुलना में 113 प्रतिशत अधिक है।

नेपाल से भारत को निर्यात में परिष्कृत सोयाबीन तेल का सबसे बड़ा हिस्सा रहा जबकि सूरजमुखी तेल, आरबीडी पामोलीन और सरसों तेल कम मात्रा में भेजा गया।

एसईए ने बयान में कहा, ‘‘ नेपाल से परिष्कृत तेलों के शुल्क-मुक्त आयात में वृद्धि ने वित्त वर्ष के दौरान भारत के कुल खाद्य तेल आयात में बढ़ोतरी में महत्वपूर्ण योगदान दिया।’’

संघ ने कहा कि एसएएफटीए व्यवस्था के बिना, घरेलू मांग बढ़ने के बावजूद कुल आयात संभवतः पिछले वर्ष के स्तर से कम रहता। साथ ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत बढ़ाई है।

भारत अब भी विदेशी आपूर्ति पर काफी निर्भर है जहां घरेलू उत्पादन कुल खाद्य तेल आवश्यकता का केवल लगभग 40 प्रतिशत ही पूरा कर पाता है।

एसईए ने कहा कि तिलहन की कम पैदावार, खंडित भूमि जोत, सीमित सिंचाई और गेहूं तथा चावल की खेती की ओर झुकाव वाली नीति ने घरेलू उत्पादन वृद्धि को बाधित किया है।

संघ ने दीर्घकालिक आयात निर्भरता घटाने के लिए तिलहन उत्पादकता बढ़ाने और घरेलू मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करने के उपायों की मांग की।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की खाद्य तेल उपभोग को नियंत्रित करने की हालिया अपील का उल्लेख करते हुए एसईए ने कहा कि अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण के साथ-साथ घरेलू उत्पादन बढ़ाने से आयात निर्भरता कम होगी और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा।

भाषा निहारिका

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