राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करना चाहते हैं कुजूर
राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में अपने प्रदर्शन से प्रभावित करना चाहते हैं कुजूर
नयी दिल्ली, 22 जुलाई (भाषा) अनिमेष कुजूर को इस बात की कोई चिंता नहीं है कि भारत के सबसे तेज धावक का तमगा अब गुरिंदरवीर सिंह के पास चला गया है, बल्कि 200 मीटर दौड़ का यह राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी चाहता है कि आगामी राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में उनका प्रदर्शन ही सब कुछ बयां करे।
इस साल की शुरुआत में ओडिशा में गुरिंदरवीर ने पुरुषों की 100 मीटर दौड़ का राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इसके बाद कुजूर से अक्सर यह पूछा जाता रहा है कि क्या वह यह खिताब वापस हासिल करेंगे। लेकिन ओडिशा के इस धावक ने फिलहाल इस बातचीत को टालने का फैसला किया है।
जब कुजूर से भारत के सबसे तेज धावक का तमगा वापस पाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने पीटीआई से कहा, ‘‘बस एशियाई खेलों का इंतजार कर रहा हूं। ’’
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘हां, बस एशियाई खेलों तक इंतजार कीजिए। फिर हम दोबारा बात करेंगे। ’’
यह 22 वर्षीय खिलाड़ी ब्रिटिश कोच मार्टिन ओवेन्स के मार्गदर्शन में भारत के सबसे उभरते हुए धावकों में शामिल हैं। दोनों की साझेदारी अंडर-23 राष्ट्रीय चैंपियनशिप के दौरान शुरू हुई थी। रिलायंस फाउंडेशन के एथलीट अमलान बोरगोहेन और ज्योति याराजी की तरक्की से प्रभावित होकर कुजूर ने इस कार्यक्रम से जुड़ने का फैसला किया था।
कुजूर ने कहा, ‘‘मैंने रिलायंस और वहां के खिलाड़ियों के बारे में पता करना शुरू किया था। मुझे अमलान और ज्योति के बारे में पता चला। मैंने कोच मार्टिन को रिलायंस की टी-शर्ट पहने देखा। मेरी दौड़ देखने के बाद मेरे कोच ने मुझसे पूछा कि क्या मैं रिलायंस से जुड़ना चाहता हूं और मैंने हां कह दिया। उस दिन से हम साथ काम कर रहे हैं। ’’
ओवेन्स ने कुजूर की तरक्की का श्रेय भारत के बेहतर होते ‘हाई-परफार्मेंस’ तंत्र को दिया। उन्होंने कहा, ‘‘ओडिशा में हमारे पास शानदार सुविधाएं हैं, रिलायंस से बेहतरीन सहयोग मिलता है और अच्छे फिजियो भी हैं। लोगों को लगता है कि भारत बहुत पीछे है, लेकिन कई मामलों में हम काफी आगे हैं। एथलीट पूरी तरह से एथलेटिक्स पर ध्यान दे सकते हैं और हमें इसका फायदा मिल रहा है। ’’
ब्रिटिश कोच ने गुरिंदरवीर के रिकॉर्ड तोड़ने वाले प्रदर्शन के बाद किसी भी तरह की प्रतिद्वंद्विता की बात को भी खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा, ‘‘हम एक स्वस्थ प्रतिद्वंद्विता चाहते हैं। हम यही चाहते हैं। हम कोई नुकसानदेह प्रतिद्वंद्विता नहीं चाहते। ’’
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर

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