शीतकालीन ओलंपिक में स्कीयर लुंडुप की भागीदारी को सरकार के खर्च के बिना मंत्रालय की मंजूरी

शीतकालीन ओलंपिक में स्कीयर लुंडुप की भागीदारी को सरकार के खर्च के बिना मंत्रालय की मंजूरी

शीतकालीन ओलंपिक में स्कीयर लुंडुप की भागीदारी को सरकार के खर्च के बिना मंत्रालय की मंजूरी
Modified Date: February 6, 2026 / 06:02 pm IST
Published Date: February 6, 2026 6:02 pm IST

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) खेल मंत्रालय ने क्रॉस कंट्री स्कीयर स्टैनजिन लुंडुप की इटली में हो रहे शीतकालीन ओलंपिक खेलों में भागीदारी को सरकार पर बिना किसी वित्तीय बोझ के भाग लेने की मंजूरी दे दी।

यह मंजूरी दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) द्वारा यह स्पष्ट किए जाने के बाद दी गई कि लुंडुप की जगह मंजीत को टीम में शामिल करना अब संभव नहीं है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो सदस्यीय भारतीय टीम से मंजीत को बाहर रखने के आईओए के फैसले को ‘स्पष्ट रूप से मनमाना और अनुचित’ करार देते हुए मंजीत की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया था।

इस आदेश में हालांकि उच्च न्यायालय ने कहा कि उसने “लुंडुप की भागीदारी पर कोई टिप्पणी नहीं की है और न ही उसे रोका है।”

यह आदेश आईओए द्वारा यह बताए जाने के बाद आया कि खेलों के लिए प्रविष्टियां भेजने की समयसीमा काफी पहले समाप्त हो चुकी है, ऐसे में दल में कोई भी बदलाव अब संभव नहीं है।

 शीतकालीन ओलंपिक खेलों की शुरुआत शुक्रवार को मिलान और कोर्टिना में हुई।

मंत्रालय द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजे गए पत्र में कहा गया है, “भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा अवगत कराए गए तथ्यों के अनुसार यह संज्ञान में आया है कि सक्षम अंतरराष्ट्रीय प्राधिकरणों ने दल के विस्तार या स्थापन को स्वीकार नहीं किया है। स्वीकृत कोटा का उपयोग नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित स्पर्धा में भारत का कोई प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा।”

पत्र में कहा गया, ‘‘ सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के तहत भारतीय दल के सदस्यों स्टैनजिन लुंडुप और रऊफ अहमद (आधिकारिक) को छह फरवरी से 22 फरवरी 2026 तक इटली में आयोजित होने वाले ओलंपिक शीतकालीन खेल मिलानो-कोर्टिना 2026 में सरकार के किसी खर्च के बिना भागीदारी की अनुमति प्रदान की जाती है।”

लुंडुप की स्पर्धा 13 फरवरी को टेसेरो क्रॉस-कंट्री स्कीइंग स्टेडियम में निर्धारित है।

मंत्रालय ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि यह मंजूरी आईओए की चयन प्रक्रिया का समर्थन नहीं मानी जाएगी।

पत्र में कहा गया, “यह स्वीकृति भारतीय ओलंपिक संघ द्वारा अभिलेख पर रखे गए पक्ष और लागू ओलंपिक नियमों को ध्यान में रखते हुए केवल एक सहायक प्रशासनिक उपाय के रूप में जारी की गई है और इसे किसी भी चयन प्रक्रिया के समर्थन या वैधता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। चयन प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के अधीन बनी रहेगी।”

मंजीत ने दलील दी थी कि अंतरराष्ट्रीय स्की और स्नोबोर्ड महासंघ (एफआईएस) की रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर होने के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।

भाषा आनन्द नमिता

आनन्द


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