अधिक पदक और ट्रॉफी से ही भारतीय महिला क्रिकेट आगे बढ़ेगा: शेफाली

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अधिक पदक और ट्रॉफी से ही भारतीय महिला क्रिकेट आगे बढ़ेगा: शेफाली

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  • Publish Date - September 24, 2026 / 11:00 AM IST,
    Updated On - September 24, 2026 / 11:00 AM IST

नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) भारत की स्टार सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा का मानना है कि देश में महिला क्रिकेट लगातार आगे बढ़ रहा है और अधिक पदक तथा ट्रॉफी जीतने से इसमें और सुधार होगा।

शेफाली ने जापान में हुए आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारतीय महिला टीम के स्वर्ण पदक बरकरार रखने में अहम भूमिका निभाई। वह टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं। उन्होंने 188 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 200 से अधिक रहा। इसमें बांग्लादेश के खिलाफ सेमीफाइनल में 49 गेंद में लगाया गया शतक भी शामिल है।

शेफाली ने क्वार्टर फाइनल में जापान के खिलाफ 40 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि श्रीलंका के खिलाफ फाइनल में 48 रन बनाए।

भारत ने फाइनल में श्रीलंका को 147 रन से हराकर अपना दबदबा बरकरार रखा।

शेफाली ने जापान से लौटने के बाद बृहस्पतिवार तड़के ‘पीटीआई’ से कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि भारत ने स्वर्ण पदक जीता और तिरंगा शान से लहराया। पूरी टीम बहुत खुश है। हम जितने अधिक पदक जीतेंगे और जितनी अधिक ट्रॉफियां अपने नाम करेंगे, भारतीय महिला क्रिकेट उतना ही आगे बढ़ेगा। इसलिए मैं बहुत खुश हूं।’’

शेफाली के साथ टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर, हरफनमौला दीप्ति शर्मा, बाएं हाथ की स्पिनर राधा यादव और बल्लेबाज प्रतिका रावल भी भारत लौटीं।

बीसीसीआई के कुछ प्रोटोकॉल के कारण हरमनप्रीत, दीप्ति और राधा ने मीडिया से बात नहीं की। वहीं, प्रतिका ने हवाई अड्डे पर इंतजार कर रहे पत्रकारों से संक्षिप्त बातचीत की।

प्रतिका ने कहा, ‘‘मैं बहुत खुश हूं कि टीम ने शानदार प्रदर्शन किया। हम यही करना चाहते थे। हमारा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था और टीम ने इसे अच्छी तरह से हासिल किया। पूरा देश खुश है और सभी को बधाई।’’

प्रतिका ने टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं खेला था।

प्रतिका से जब पूछा गया कि एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक बरकरार रखने से 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत की पदक की संभावनाओं पर क्या असर पड़ेगा तो उन्होंने कहा, ‘‘हां, हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं। 2028 ओलंपिक के लिए टीम जिस तरह तैयार हो रही है, उसे देखना शानदार है। हम सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद कर रहे हैं।’’

भाषा आनन्द

आनन्द