लखनऊ, 24 सितंबर (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने कहा है कि अपीलीय अदालत, एक वाहन दुर्घटना के दावे में मुआवजा बढ़ा सकती है, भले ही पीड़ित या उस पर आश्रित लोगों ने अलग से दावा नहीं किया हो।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार ने बुधवार को कहा कि मोटर वाहन अधिनियम एक लाभकारी कानून है और अदालतों को यह सुनिश्चित करना होता है कि पीड़ितों और उन पर निर्भर लोगों को कानून के अनुसार उचित और सही मुआवजा मिले।
अदालत ने नेशनल इंश्योरेंस कंपनी द्वारा दायर अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। कंपनी ने फैजाबाद मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा पारित मुआवजा के खिलाफ यह अपील की थी।
अधिकरण ने सभाजीत नाम के व्यक्ति के परिवार को 7.20 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।
उच्च न्यायालय ने सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर बनाए रखते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 11,43,565 रुपये कर दी।
यह दुर्घटना 16 नवंबर, 2017 को उस समय हुई थी जब सभाजीत अंबेडकर नगर में बरियावां चौराहे के पास टहल रहे थे। तभी एक वाहन (स्कॉर्पियो) ने उन्हें टक्कर मार दी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए।
इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई और उनके परिवार ने 49.70 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी।
बीमा कंपनी ने दलील दी कि दुर्घटना से पहले वाहन चोरी हो गया था और वह इसके मालिक या चालक के कब्जे में नहीं था।
अदालत ने चोरी की दलील खारिज करते हुए कहा कि वाहन मालिक ने ना तो प्राथमिकी दर्ज कराई थी और ना ही दुर्घटना से पूर्व वाहन चोरी सिद्ध करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश किया।
भाषा सं राजेंद्र संतोष
संतोष
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