आईएसएल के अधिकांश क्लब अगले सत्र के लिए अपनी ‘प्रतिबद्धता की सीमा’ की समीक्षा करेंगे
आईएसएल के अधिकांश क्लब अगले सत्र के लिए अपनी ‘प्रतिबद्धता की सीमा’ की समीक्षा करेंगे
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के कई क्लबों ने शीर्ष स्तर की घरेलू फुटबॉल प्रतियोगिता में जारी अनिश्चितता के कारण 2026-27 सत्र में भागीदारी को लेकर संदेह जताते हुए कहा कि वे ‘मौजूदा सत्र के बाद लीग के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की सीमा की समीक्षा करेंगे।’
अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की शनिवार को होने वाली विशेष आम सभा से पहले आईएसएल क्लबों और एआईएफएफ के बीच शुक्रवार को कोलकाता में बैठक हुई।
एआईएफएफ और क्लबों के बीच लीग के व्यावसायिक साझेदार को लेकर विवाद चल रहा है। मार्च में लंदन की कंपनी जीनियस स्पोर्ट्स ने सबसे बड़ी बोली लगाई थी। कंपनी ने 2026-27 से अगले ‘15+5’ वर्षों के लिए हर साल 2129 करोड़ रुपये देने का प्रस्ताव रखा था।
आईएसएल क्लबों ने हालांकि, अपना अलग मॉडल सुझाया है। क्लब चाहते हैं कि लीग की आर्थिक हिस्सेदारी का 90 प्रतिशत उनके पास रहे और शेष एआईएफएफ को मिले। क्लब यह भी चाहते हैं कि जीनियस स्पोर्ट्स केवल डेटा और तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाए।
अधिकांश आईएसएल क्लबों ने सोशल मीडिया पर साझा बयान जारी किया।
बयान में कहा गया, ‘‘भारतीय फुटबॉल के भविष्य को लेकर गहरी चिंता और निराशा है। लगातार अनिश्चितता के कारण क्लब अब लीग में अपनी आगे की भागीदारी की समीक्षा करने को मजबूर हैं। हमने कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय फुटबॉल में लगातार निवेश किया है, लेकिन स्पष्ट ढांचे, व्यावसायिक भरोसे और दीर्घकालिक योजना की कमी के कारण आर्थिक और संचालन संबंधी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना मुश्किल हो रहा है।’’
हाल ही में संपन्न हुए आईएसएल सत्र में 14 टीमों ने हिस्सा लिया था। ईस्ट बंगाल चैंपियन बना। सबसे नीचे रहने के कारण मोहम्मडन स्पोर्टिंग को बाहर होना पड़ेगा, जबकि दूसरी श्रेणी की इंडियन फुटबॉल लीग जीतने वाली डायमंड हार्बर टीम को प्रमोशन मिलेगा।
क्लबों ने एआईएफएफ से सभी पक्षों को साथ लेकर टिकाऊ और समावेशी व्यवस्था बनाने की अपील की।
क्लबों के बयान के अनुसार, ‘‘भारतीय फुटबॉल में आज की तुलना में कहीं अधिक महान बनने की क्षमता है। इसलिए यह निराशाजनक है कि जिन लोगों ने लीग का निर्माण, वित्तपोषण, प्रचार और संचालन किया है, वे स्वयं उस ढांचे को लेकर अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत उन्हें कार्य करना है। भारतीय फुटबॉल के भविष्य के केंद्र में आर्थिक रूप से टिकाऊ लीग होनी चाहिए।’’
बयान में आगे कहा गया, ‘‘क्लबों ने एक वैकल्पिक मॉडल प्रस्तावित किया है, जो हमें विश्वसनीय, रचनात्मक और एआईएफएफ के समक्ष प्रस्तुत किसी भी अन्य प्रस्ताव के समान योग्यता के आधार पर मूल्यांकन योग्य प्रतीत होता है। हम एआईएफएफ से आग्रह करते हैं कि वह लीग के वित्तपोषण और संचालन करने वालों की वास्तविकताओं को स्वीकार करे तथा एक ऐसे ढांचे की दिशा में सहयोगात्मक रूप से कार्य करे, जो टिकाऊ, समावेशी हो और सभी हितधारकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो।’’
एआईएफएफ और उसके पुराने साझेदार एफएसडीएल के बीच समझौता दिसंबर 2025 में समाप्त हो गया था। खेल मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद ही 2025-26 आईएसएल सत्र का संक्षिप्त आयोजन हो सका। प्रत्येक टीम ने केवल 13 मैच खेले और लीग एक चरण में पूरी हुई।
आईएसएल विजेता टीम को एएफसी चैंपियंस लीग-2 के ग्रुप चरण में सीधी जगह मिलनी थी, लेकिन टीमों ने अनिवार्य 24 मैच नहीं खेले। इसलिए ईस्ट बंगाल को अब 2026-27 में प्ले-ऑफ खेलना होगा।
सुपर कप विजेता एफसी गोवा को भी एएफसी चैंपियंस लीग-2 के प्ले-ऑफ दौर में खेलना पड़ेगा।
आईएसएल सत्र को छोटा किए जाने का असर एशियाई प्रतियोगिताओं में भारत की स्थिति पर भी पड़ा है। 2027-28 सत्र में भारत को केवल एएफसी चैलेंज लीग में एक स्थान मिलेगा। यह एशिया की तीसरी श्रेणी की प्रतियोगिता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय क्लब एएफसी चैंपियंस लीग और एएफसी चैंपियंस लीग-2 जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में खेल चुके हैं, लेकिन 2027-28 में भारतीय क्लबों को पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों की टीमों के साथ तीसरी श्रेणी की प्रतियोगिता में खेलना पड़ेगा।
भाषा आनन्द नमिता
नमिता

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