नरेंद्र मोदी स्टेडियम: अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका का अभेद किला
नरेंद्र मोदी स्टेडियम: अहमदाबाद में दक्षिण अफ्रीका का अभेद किला
…अमनप्रीत सिंह…
अहमदाबाद, 24 फरवरी (भाषा) अपराजित और बेखौफ अंदाज में खेलते हुए दक्षिण अफ्रीका ने नरेंद्र मोदी स्टेडियम को एक अभेद किले में बदल दिया है। यात्राओं की थकान और बदलती पिचों से भरे इस टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका को परिचित माहौल में खेलने की एक दुर्लभ सुविधा मिली है और टीम ने इसका पूरा फायदा उठाया है। ग्रुप चरण में दक्षिण अफ्रीका ने अहमदाबाद में कनाडा, अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के खिलाफ इसी स्टेडियम में अपने मैच खेले। केवल यूएई के खिलाफ मैच के लिए उन्हें दिल्ली की यात्रा करनी पड़ी। सुपर आठ चरण में वे फिर अपने इस ‘एक तरह के घरेलू मैदान’ पर लौटे, जहां उन्होंने खिताब के प्रबल दावेदार भारत को मात दी। अब वे इसी मैदान पर वेस्टइंडीज से भिड़ने की तैयारी कर रहे हैं, जिसके बाद एक मार्च को जिम्बाब्वे से मुकाबले के लिए दिल्ली की छोटी यात्रा करेंगे। भू-राजनीतिक कारणों से पाकिस्तान और सह-मेजबान श्रीलंका को छोड़ दें तो कोई अन्य टीम दो स्थानों (अहमदाबाद और दिल्ली) पर सात मैच खेलने की इस तरह की सुविधा नहीं पा सकी हैं। मोटेरा में खेलना दक्षिण अफ्रीका के लिए सिर्फ यात्रा की सहूलियत भर नहीं रहा, बल्कि इससे उन्हें रणनीतिक स्पष्टता भी मिली है। ऐसा नहीं कि दक्षिण अफ्रीका ने कार्यक्रम तय किया हो, लेकिन खिलाड़ियों को “घर से दूर घर” जैसा माहौल मिलने की शिकायत भी नहीं है। सेमीफाइनल से पहले सात में से पांच मैच एक ही मैदान पर खेलना किसी सपने जैसा होता है। अगर फाइनल भी अहमदाबाद में ही होता है और दक्षिण अफ्रीका खिताबी मुकाबले में पहुंचता है, तो बड़े दिन के लिए शुकरी कॉनराड की टीम से बेहतर तैयार कोई नहीं होगा। अहमदाबाद की पिच पर स्पिनरों की गेंदें रुक कर आती है जबकि शाम के मुकाबलों में रोशनी में गेंद को स्विंग भी मिलता है। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाजों ने परिस्थितियों के अनुसार अपनी लेंथ में सटीक बदलाव किया है। उन्हें इसका अंदाजा है कि पिच से कब उछाल मिल रही है और कब गेंद रुक कर आ रही है,। स्पिनरों ने भी समझ लिया है कि किस छोर से ज्यादा टर्न मिलती है और किस क्षेत्र में आक्रमण करना प्रभावी रहेगा। वनडे और टी20 विश्व कप जैसे बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंट में रिकवरी उतनी ही अहम होती है जितनी कौशल। कम यात्रा का मतलब कम थकान। एक ही होटल और कमरे में रहने की सहूलियत से खिलाड़ियों की मानसिक ऊर्जा बची रहती है। नया अभ्यास स्थल और यात्रा कार्यक्रम के अनुरूप ढलना भी थकाने वाला होता है। यही कारण है कि यह टीम प्रतियोगिता के अंतिम चरणों तक रणनीतिक रूप से तेज और शारीरिक रूप से तरोताजा दिख रही है। इसके साथ एक मनोवैज्ञानिक बढ़त भी जुड़ी है। एक ही मैदान पर लगातार जीत से आत्मविश्वास बनता है। विरोधी टीमें ऐसे माहौल में उतरती हैं, जहां दक्षिण अफ्रीका पहले ही कई जीत दर्ज कर चुका है। दक्षिण अफ्रीका की टीम अब बृहस्पतिवार को अहमदाबाद में वेस्टइंडीज के खिलाफ मुकाबले में सिर्फ फॉर्म ही नहीं, बल्कि मैदान पर अपनापन का एहसास भी साथ लेकर उतरेगी। भाषा आनन्द सुधीरसुधीर

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