पायल ने शीतल को हराकर उलटफेर करते हुए स्वर्ण जीता, भारत बैंकॉक पैरा तीरंदाजी में शीर्ष पर
पायल ने शीतल को हराकर उलटफेर करते हुए स्वर्ण जीता, भारत बैंकॉक पैरा तीरंदाजी में शीर्ष पर
बैंकॉक, चार अप्रैल (भाषा) दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा चुकी युवा तीरंदाज पायल नाग ने यहां विश्व तीरंदाजी पैरा सीरीज में बड़ा उलटफेर करते हुए हमवतन और दुनिया की नंबर एक तीरंदाज शीतल देवी को हराकर स्वर्ण पदक जीता और भारत के शानदार प्रदर्शन की अगुआई की जिसमें देश ने कुल सात स्वर्ण पदक जीतकर पहला स्थान हासिल किया।
अठारह साल की उभरती हुई तीरंदाज पायल ने कंपाउंड महिला वर्ग के फाइनल में 139-136 से जीत हासिल की। भारत के लिए अभियान यादगार रहा जिसमें देश ने पांच रजत और चार कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीते।
पायल की यह एक साल से थोड़े ज्यादा समय में शीतल पर दूसरी जीत थी। इससे पहले उन्होंने जनवरी 2025 में जयपुर में हुए पैरा राष्ट्रीय खेलों में भी शीतल को हराया था।
दुबई 2025 एशियाई युवा पैरा खेलों में पदार्पण करने के बाद पायल अपने दूसरे ही अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने दबाव के बावजूद जबरदस्त संयम दिखाते हुए अपने से ज्यादा अनुभवी खिलाड़ी को मात दी।
पायल ने एक परफेक्ट ‘10’ के साथ शुरुआत की और पहला दौर 27-25 से अपने नाम किया। इसके बाद शीतल ने वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला दिया।
दूसरे दौर के बाद स्कोर 54-54 से बराबर था। तीसरे दौर में पायल ने अपने खेल का स्तर और ऊंचा करते हुए दो बार ‘9’ और एक बार ‘10’ का निशाना लगाते हुए 82-80 की बढ़त बना ली।
इसके बाद उन्होंने आखिरी दौर में दो बार ‘10’ का सटीक निशाना लगाकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।
शीतल के बचपन के कोच कुलदीप वेदवान से प्रशिक्षण लेने वाली पायल की अब तक की यात्रा किसी चमत्कार से कम नहीं रही है।
ओडिशा के बोलांगीर जिले के एक प्रवासी मजदूर की बेटी पायल ने 2015 में ईंट-भट्ठे पर बिजली के एक नंगे तार के संपर्क में आने के बाद अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए थे।
उन्होंने 2023-24 के दौरान कटरा स्थित माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड खेल परिसर में शीतल के साथ ही ट्रेनिंग की थी। इसके बाद शीतल सोनीपत चली गई थीं।
बिना हाथों वाली शीतल भारत की सबसे ज्यादा पदक जीतने वाली पैरा तीरंदाज बन गई हैं। उन्होंने 2022 में एशियाई पैरा खेलों में दो स्वर्ण पदक जीते और पेरिस 2024 में मिश्रित टीम कांस्य पदक जीतकर भारत की सबसे कम उम्र की पैरालंपिक पदक विजेता बन गईं।
पायल ने 2025 में राष्ट्रीय पदार्पण करने के बाद से काफी प्रगति की है। जयपुर में शीतल को हराने के अलावा उन्होंने खेलो इंडिया पैरा खेलों में रजत पदक जीता और इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में कांस्य पदक भी जीता। राष्ट्रीय चैंपियनशिप के क्वालीफायर में वह शीतल से पीछे रही थीं।
भारत के लिए तोमन कुमार और भावना ने भी अपनी स्पर्धाओं में पहला स्थान हासिल किया।
तोमन ने कंपाउंड पुरुषों के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया के जोनाथन मिल्ने को 146-142 से हराया जबकि भावना ने रिकर्व महिलाओं के फाइनल में थाईलैंड की फत्थराफोन पट्टावेओ को 6-0 से मात दी।
दो बार के पैरालंपिक पदक विजेता हरविंदर सिंह को रिकर्व फाइनल में इंडोनेशिया के खोलिडिन से 3-7 से हारने के बाद रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
वहीं स्वाति चौधरी ने भी रजत पदक जीता। उन्हें डब्ल्यू1 महिलाओं के स्वर्ण पदक मैच में दक्षिण कोरिया की ओके ग्यूम किम से 3-7 से हार का सामना करना पड़ा।
इससे पहले श्याम सुंदर स्वामी ने अपने सीनियर साथी खिलाड़ी और पेरिस पैरालंपिक के पदक विजेता राकेश कुमार को कड़े मुकाबले वाले प्लेऑफ में हराकर कांस्य पदक जीता।
पुरुषों की कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा के कांस्य पदक मैच में स्वामी प्लेऑफ में 10-9 से विजयी रहे। इससे पहले दोनों खिलाड़ियों ने समान 143 अंक बनाए थे और इसलिए टाईब्रेक का सहारा लेना पड़ा।
पेरिस पैरालंपिक्स में मिश्रित टीम के कांस्य पदक विजेता राकेश ने टाईब्रेक में हार के कारण चौथे स्थान पर रहकर अपना अभियान समाप्त किया।
महिला वर्ग की व्यक्तिगत स्पर्धा में अंजुम तनवार भी दक्षिण कोरिया की प्रतिद्वंदी के खिलाफ कांस्य पदक मैच में 2-6 से हारने के बाद चौथे स्थान पर रहीं।
बैंकॉक में हाल में इसी स्थान पर खेले गए एशिया कप के पहले चरण में भारत ने दो स्वर्ण, चार रजत और चार कांस्य सहित 10 पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था।
भाषा नमिता
नमिता

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