परिवार की मदद के लिये फेरीवाले का काम करने वाले पेंसाक सिलाट खिलाड़ी ने जीता स्वर्ण

परिवार की मदद के लिये फेरीवाले का काम करने वाले पेंसाक सिलाट खिलाड़ी ने जीता स्वर्ण

परिवार की मदद के लिये फेरीवाले का काम करने वाले पेंसाक सिलाट खिलाड़ी ने जीता स्वर्ण
Modified Date: January 7, 2026 / 04:37 pm IST
Published Date: January 7, 2026 4:37 pm IST

दीव, सात जनवरी (भाषा) राजा दास जब पेंसाक सिलाट में अपने कौशल को निखारने से समय पाते हैं तो कोलकाता में स्थानीय ब्लड बैंक में बर्फ की आपूर्ति करने में अपने पिता की मदद करते हैं ।

उनके पिता ने दशकों तक एक फेरीवाले का काम किया और राजा बचपन से उनकी मदद करते आये हैं । इसके साथ ही ऐसे खेल में नाम बनाने का उनका सपना था जो भारत में ज्यादा लोकप्रिय नहीं है ।

पश्चिम बंगाल के इस खिलाड़ी ने राष्ट्रीय स्तर पर लगातार पदक जीते हैं और मंगलवार को खेलो इंडिया बीच खेलों में गत चैम्पियन और स्थानीय खिलाड़ी प्रसन्ना बेंद्रे को हराकर दो स्वर्ण पदक जीते ।

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वाणिज्य में स्नातक राजा को हमेशा से मार्शल आर्ट का शौक था और युद्ध खेल के पारंपरिक इंडोनेशियाई प्रारूप पेंसाक सिलाट में उन्होंने हाथ आजमाने शुरू किया ।

भारतीय खेल प्राधिकरण की एक विज्ञप्ति में राजा ने कहा ,‘‘ बचपन से मुझे मार्शल आर्ट का शौक था लेकिन कराटे या ताइक्वांडो पसंद नहीं था । मुझे शस्त्रों के साथ लयबद्ध खेल पसंद है और यही वजह है कि मैने पेंसाक सिलाट खेलना शुरू किया ।’’

उन्होंने कहा,‘‘ काफी रिसर्च के बाद पता चला कि पेंसाक सिलाट 2018 एशियाई खेलों का हिस्सा था ।’’

राजा अपना ख्वाब पूरा करने इंडोनेशिया भी गए जहां 2018 एशियाई खेलों से पहले प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा थे । इस बीच उसी साल हावड़ा में एक ट्रेन हादसे में उनके छोटे भाई का निधन हो गया । इस वजह से परिवार की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर आ गई ।

राजा ने कहा ,‘‘ मैं अपने पिता की काम में मदद करता था लेकिन आमदनी काफी कम थी । मेरे परिवार ने मेरा पूरा साथ दिया । अब मेरा लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर भारत के लिये पदक जीतना है और मुझे यकीन है कि सरकार और महासंघ के सहयोग से सपना जल्दी पूरा होगा ।’’

भाषा मोना पंत

पंत


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