आईएसएल क्लबों को बंद होने से बचाने के लिए खिलाड़ियों को बलिदान करने होंगे: पार्थ जिंदल

आईएसएल क्लबों को बंद होने से बचाने के लिए खिलाड़ियों को बलिदान करने होंगे: पार्थ जिंदल

आईएसएल क्लबों को बंद होने से बचाने के लिए खिलाड़ियों को बलिदान करने होंगे: पार्थ जिंदल
Modified Date: January 7, 2026 / 10:45 am IST
Published Date: January 7, 2026 10:45 am IST

नयी दिल्ली, सात जनवरी (भाषा) बेंगलुरु एफसी (बीएफसी) के मालिक पार्थ जिंदल ने बुधवार को खिलाड़ियों से अगले महीने से होने वाले इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) फुटबॉल टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए क्लब पर पड़ने वाले ‘वित्तीय बोझ’ को देखते हुए कुछ ‘बलिदान करने’ करने की अपील करते हुए कहा कि उनके समर्थन के बिना क्लब को ‘हमेशा के लिए’ बंद करना पड़ सकता है।

अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) का नया वाणिज्यिक भागीदार जोड़ने का प्रयास सफल नहीं हो पाया जिससे आईएसएल का आयोजन खतरे में पड़ गया था। इससे पहले उसका रिलायंस के स्वामित्व वाली एफएसडीएल के साथ मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) पिछले साल आठ दिसंबर को समाप्त हो गया था।

हालांकि खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने मंगलवार को घोषणा की कि आईएसएल का 2025-26 का सत्र 14 फरवरी से शुरू होगा जिसमें सभी 14 क्लब भाग लेंगे। लेकिन देश के इस शीर्ष स्तरीय फुटबॉल टूर्नामेंट को अगर जल्द ही कोई वाणिज्यिक भागीदार नहीं मिलता है तो क्लबों को वित्तीय रूप से संघर्ष करना पड़ेगा।

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एआईएफएफ जल्द ही वाणिज्यिक साझेदार के लिए एक और निविदा जारी कर सकता है।

जिंदल ने यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि खिलाड़ियों को किस तरह का बलिदान करना होगा, लेकिन अनुमान लगाया जा रहा है कि इस सत्र के लिए उनके वेतन में कटौती की जाएगी। उनके क्लब में पूर्व भारतीय कप्तान सुनील छेत्री और स्टार गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू जैसे खिलाड़ी शामिल हैं।

लगभग छह महीने के लंबे अंतराल के बाद लीग को दोबारा शुरू करने के लिए आईएसएल क्लबों को वित्तीय लागत का 60 प्रतिशत (लगभग एक करोड़ रुपये प्रति क्लब) वहन करना होगा। एआईएफएफ ने आगामी सत्र की कुल लागत 25 करोड़ रुपये निर्धारित की है।

जिंदल ने एक्स पर लिखा, ‘‘आईएसएल को उसके मौजूदा स्वरूप में खेलने के लिए सभी क्लबों से बड़े बलिदान की मांग की जा रही है। अगर लीग नहीं हुई तो इसके परिणाम बेहद चिंताजनक होंगे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पूरी उम्मीद है कि खिलाड़ी क्लबों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को समझेंगे और बलिदान करने के लिए सहमत होंगे क्योंकि हम सभी इसमें एक साथ हैं। हम फुटबॉल के प्रति प्रेम और अपने देश को इस खूबसूरत खेल को खेलते हुए और इसमें अच्छा प्रदर्शन करते हुए देखने के लिए इसका हिस्सा हैं।’’

उन्होंने स्वीकार किया कि आईएसएल में शामिल होने के बाद से बेंगलुरु एफसी घाटे में चल रही है और कहा कि अगर खिलाड़ी सहयोग नहीं करते हैं तो क्लब को बंद करना पड़ सकता है।

जिंदल ने कहा, ‘‘जहां तक ​​मुझे याद है बेंगलुरू एफसी घाटे का सौदा रहा है। खिलाड़ियों की मदद के बिना इस साल के आंकड़े कई क्लबों को हमेशा के लिए बंद करने पर मजबूर कर देंगे।’’

उनके इस ट्वीट को एफसी गोवा के सीईओ रवि पुस्कुर ने दोबारा पोस्ट किया।

जिंदल ने मांडविया का ‘उनके हस्तक्षेप और प्रस्ताव‘ के लिए आभार भी व्यक्त किया।

भाषा

पंत

पंत


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