… जी उन्नीकृष्णन …
गॉल, 18 अगस्त (भाषा) भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने टेस्ट क्रिकेट को अपना “अंतिम लक्ष्य” करार देते हुए मंगलवार को कहा कि कुछ मामूली तकनीकी बदलावों से उन्हें श्रीलंका के खिलाफ यहां जारी पहले टेस्ट में बल्ले से सफलता मिली। करीब दो साल बाद अपना पहला टेस्ट खेल रहे पडिक्कल ने पहली पारी में 167 और दूसरी पारी में 44 रन बनाए। उनकी शानदार बल्लेबाजी ने भारत को जीत की ओर मजबूत कदम बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। पडिक्कल ने दिन का खेल समाप्त होने के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मैं हमेशा से इस बात को लेकर स्पष्ट रहा हूं कि टेस्ट क्रिकेट मेरा अंतिम लक्ष्य है। इसलिए मैंने अपने खेल को इस तरह ढालने की कोशिश की है कि मैं अपनी बुनियादी तकनीक के साथ खेलते रहूं। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि जब भी जरूरत हो मैं लाल गेंद के क्रिकेट में आसानी से ढल सकूं क्योंकि यह मेरी पहली प्राथमिकता है।” घरेलू क्रिकेट में कर्नाटक की कप्तानी करने वाले पडिक्कल ने माना कि सीमित ओवरों और टेस्ट क्रिकेट के बीच लगातार बदलाव करना आसान नहीं है। इसके लिए उन्हें अपनी बल्लेबाजी में सावधानीपूर्वक बदलाव करने पड़ते हैं। उन्होंने कहा, “सफेद गेंद के क्रिकेट में मेरी बल्लेबाजी की एक अलग तैयारी होती है। इससे मैं अधिक शॉट खेल सकता हूं और अपने हाथों को थोड़ा खुला रखता हूं। लेकिन लाल गेंद के क्रिकेट में इस पहलू को थोड़ा कसकर रखना जरूरी है। इसमें हाथ शरीर के कुछ ज्यादा करीब रखने पड़ते हैं।” उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलाव के साथ मानसिक बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है। लगातार सफेद गेंद से लाल गेंद के क्रिकेट में आने-जाने के कारण यह आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने इसमें सुधार किया है और आगे भी बेहतर करने की उम्मीद है। साई सुदर्शन के चोटिल होने के कारण पडिक्कल को इस मैच में खेलने का मौका मिला लेकिन बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने कहा कि उनका ध्यान भविष्य में मिलने वाले मैचों की संख्या को लेकर चिंतित रहने के बजाय रन बनाने पर है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि तीसरे नंबर पर लंबे समय तक खेलने जैसी बातचीत होती है। जब भी आपको मौका मिले, उसे भुनाना जरूरी है। मैं इस तरह की बातचीत के पीछे नहीं भागता।” उन्होंने कहा, ‘‘अगर आप प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं तो आपके प्रदर्शन, आपकी जगह या आपकी भूमिका को लेकर सवाल बने रहते हैं। इसलिए जब भी मैं मैदान पर उतरता हूं, मेरा प्रयास रन बनाने का होता है। अगर मैं ऐसा करता रहूंगा तो मुझे यकीन है कि मैं ज्यादा मैच खेलूंगा।’’ भाषा आनन्द सुधीरसुधीर