मुंबई, 18 अगस्त (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की 2013 में हुई हत्या के मामले में अभियुक्त सचिन अंदुरे की उम्रकैद की सजा निलंबित कर दी तथा उसे जमानत दे दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि कि उसके खिलाफ सबूत ‘बहुत कमजोर हैं’ और उसे भी बरी किया जा सकता है।
न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल और न्यायमूर्ति रंजीतसिन्हा भोंसले की खंडपीठ ने कहा कि चश्मदीद गवाहों ने आठ साल बाद अंदुरे की पहचान की । खंडपीठ ने अपराध में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी से जुड़ी खामियों की ओर इशारा किया।
उच्च न्यायालय के फैसले में कहा गया, ‘‘इस मामले में गिरफ़्तारी के बाद से ही आवेदक कमजोर सबूतों के आधार पर लगभग छह साल से हिरासत में है, इसलिए उसे जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।’’
उच्च न्यायालय ने अंदुरे को 50,000 रुपये का निजी मुचलका भरने का आदेश दिया।
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के संस्थापक 67 वर्षीय दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान मोटरसाइकिल सवार दो हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
आरंभ में, इस मामले की जांच स्थानीय पुलिस ने की थी, लेकिन उनकी बेटी मुक्ता दाभोलकर की ओर से उच्च न्यायालय में याचिका दायर किए जाने के बाद, 2014 में जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि अंदुरे हमलावरों में से एक था।
दस मई 2024 को, एक सत्र अदालत ने दाभोलकर की हत्या के मामले में अंदुरे और शरद कालस्कर को दोषी ठहराया था तथा उम्रकैद की सज़ा सुनाई थी।
हालांकि, उन्हें गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र अधिनियम के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में मामले में गवाहों के बयानों को ‘बहुत कमज़ोर’ बताते हुए कहा कि मामले के दो चश्मदीद गवाहों ने गोलीबारी के लगभग आठ साल बाद पहली बार अंदुरे की पहचान की थी, जो पहचान के लिए बहुत लंबा समय है।
उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि हत्या में इस्तेमाल हथियार की बरामदगी और बैलिस्टिक विशेषज्ञ की राय को लेकर भी कुछ कमियां हैं।
खंडपीठ ने कहा कि अंदुरे के बरी होने की अच्छी संभावना है, क्योंकि उसके खिलाफ सबूत बहुत कमज़ोर हैं।
अंदुरे पर सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद पानसरे की हत्या के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। वह अब जेल से बाहर आ सकता है क्योंकि उसे दोनों मामलों में ज़मानत मिल गई है।
अंदुरे ने अपनी सज़ा को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी और एक अंतरिम अर्जी में जमानत देने तथा अपनी उम्रकैद की सज़ा पर रोक लगाने का अनुरोध किया था।
उच्च न्यायालय ने मंगलवार को इस अर्ज़ी को मंज़ूरी दे दी।
दाभोलकर की बेटी मुक्ता ने भी उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसमें अंदुरे तथा कालस्कर के खिलाफ यूएपीए के तहत आरोप न लगाने को चुनौती दी गई थी।
भाषा
राजकुमार माधव
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