राष्ट्रपति मुर्मू ने एशियाड के चौथे दिन मीराबाई और अन्य भारतीय पदक विजेताओं को बधाई दी
राष्ट्रपति मुर्मू ने एशियाड के चौथे दिन मीराबाई और अन्य भारतीय पदक विजेताओं को बधाई दी
नयी दिल्ली, 23 सितंबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को जापान के आइची-नागोया में एशियाई खेलों के चौथे दिन भारोत्तोलक मीराबाई चानू सहित पदक जीतने वाले अन्य भारतीय खिलाड़ियों को बधाई दी।
महिलाओं की 49 किग्रा भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत जीतने पर मीराबाई को बधाई देते हुए मुर्मू ने कहा कि इस उपलब्धि ने भारत को 28 वर्षों में महाद्वीपीय बहु-स्पर्धा प्रतियोगिता में अपना पहला भारोत्तोलन पदक दिलाया।
राष्ट्रपति ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘ओलंपिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप सहित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक जीतने का आपका सफर खिलाड़ियों की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। ’’
मीराबाई 2014 से एशियाड पदक की तलाश में थीं और उन्होंने आखिरकार एक पदक हासिल किया। उन्होंने कुल 198 किग्रा वजन उठाकर दूसरा स्थान हासिल किया। यह रजत 1998 में कर्णम मल्लेश्वरी के इसी रंग के पदक के बाद एशियाई खेलों में भारत का पहला भारोत्तोलन पदक था।
राष्ट्रपति मुर्मू ने निशानेबाजों परिनाज धालीवाल, रेजा ढिल्लों और माहेश्वरी चौहान को महिलाओं की स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य जीतने पर भी बधाई दी।
उन्होंने कहा, ‘‘आपके कौशल, दृढ़ संकल्प और टीम भावना ने देश को गौरवान्वित किया है। आशा है कि आप भविष्य में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करती रहेंगी। ’’
राष्ट्रपति ने फिर अलग से अनंतजीत सिंह नरूका, भवतेग सिंह गिल और मैराज अहमद खान को पुरुषों की स्कीट टीम स्पर्धा में कांस्य हासिल करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा,‘‘आपके शानदार प्रदर्शन ने देश को गौरवान्वित किया है। उम्मीद है कि आप हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और देश के लिए बड़ी उपलब्धियां हासिल करेंगे। ’
राष्ट्रपति ने पुरुषों की सॉफ्ट टेनिस एकल स्पर्धा में कांस्य हासिल करने पर जय मीणा को भी बधाई दी और उनके प्रदर्शन को ‘ऐतिहासिक क्षण बताया क्योंकि इससे इस खेल में भारत को एशियाड का अब तक का पहला पदक मिला।
राष्ट्रपति मुर्मू ने मीणा को भविष्य में और अधिक सफलता की शुभकामनाएं देते हुए कहा, ‘‘यह महत्वपूर्ण उपलब्धि युवा खिलाड़ियों को इस खेल को अपनाने और ऊंचे लक्ष्य रखने के लिए प्रेरित करेगी। ’’
मीणा पिछले दो चरणों में पदक से वंचित रहे थे, लेकिन तीसरी बार भाग्यशाली रहे क्योंकि वह इस खेल में एशियाई खेलों का पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। यह पारंपरिक लॉन टेनिस की तुलना में नरम रबर की गेंदों और काफी हल्के रैकेट से खेला जाता है।
भाषा नमिता सुधीर
सुधीर

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