हरिद्वार में भावुक विदाई के बीच रणधीर सिंह का अंतिम संस्कार

हरिद्वार में भावुक विदाई के बीच रणधीर सिंह का अंतिम संस्कार

हरिद्वार में भावुक विदाई के बीच रणधीर सिंह का अंतिम संस्कार
Modified Date: May 28, 2026 / 07:31 pm IST
Published Date: May 28, 2026 7:31 pm IST

हरिद्वार, 29 मई (भाषा) अनुभवी खेल प्रशासक और भारत के एशियाई खेलों की निशानेबाजी स्पर्धा के पहले स्वर्ण पदक विजेता रणधीर सिंह का बृहस्पतिवार को यहां अंतिम संस्कार किया गया। इस मौके पर उनके परिवार के सदस्य, करीबी सहयोगी और बड़ी संख्या में शोक संतप्त लोग मौजूद थे जो देश की सबसे प्रभावशाली खेल हस्तियों में से एक को अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित हुए थे।

रणधीर का बुधवार को नयी दिल्ली स्थित उनके आवास पर उम्र संबंधी बीमारियों से जूझने के बाद निधन हो गया। इसके साथ ही भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रशासन के साथ उनका लंबा और प्रतिष्ठित जुड़ाव समाप्त हो गया।

वह 79 वर्ष के थे। उनके परिवार में उनकी पत्नी विनीता और बेटियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं। राजेश्वरी स्वयं भी एक निशानेबाज हैं।

फूलों से सजी उनकी पार्थिव देह को एम्बुलेंस से हरिद्वार लाया गया जहां अंतिम संस्कार की रस्मों के लिए रिश्तेदार, दोस्त और शुभचिंतक एकत्रित हुए थे। गंगा नदी के तट पर पारंपरिक रस्में पूरी होने के बाद चिता को अग्नि दी गई। उससे पहले परिवार के करीबी सदस्यों ने उनकी अर्थी को कंधा दिया और रास्ते भर गुलाब की पंखुड़ियां बिखेरी गईं।

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और रणधीर के रिश्ते के भाई कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेटे भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) के पूर्व अध्यक्ष रनिंदर सिंह ने इस अनुभवी खेल प्रशासक को भावुक श्रद्धांजलि दी।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘मैं क्या कह सकता हूं? मेरे पिता तुल्य व्यक्ति का निधन हो गया। वह खेल जगत की एक महान हस्ती थे। उन्होंने इस देश की बहुत सेवा की है। लोग उन्हें अपना प्यार देने आए हैं लेकिन यह एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन है जो हर किसी के जीवन में आता है। इसलिए एक परिवार के तौर पर हम उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं।’’

रनिंदर ने कहा, ‘‘अपने पिता राजा बलेंद्र सिंह की तरह मुझे लगता है कि मेरे चाचा ने भी वही मुकाम हासिल किया है। भारत की प्रकृति और संस्कृति के साथ उनका बहुत पुराना जुड़ाव था। वह मेरे परिवार के ही एक सदस्य थे।’’

आईएसएसएफ के उपाध्यक्ष के रूप में 2018-2022 तक काम करने वाले रनिंदर ने कहा, ‘‘वह मेरे लिए एक पिता तुल्य व्यक्ति थे। उन्होंने हमेशा भारत की संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास किया। उन्होंने हमेशा धर्म को केंद्र में रखा।’’

निशानेबाजी जगत के कई सदस्य अंतिम संस्कार के दौरान मौजूद रहे जिनमें रंजन सोढ़ी, मानवजीत सिंह संधू, काइनन चेनाई और राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी शामिल थे।

पूर्व सांसद राजभरतेंद्र सिंह ने भी भारतीय खेल में रणधीर सिंह के योगदान और पटियाला की शाही विरासत के साथ उनके गहरे जुड़ाव को याद किया।

राजभरतेंद्र ने कहा, ‘‘राजा रणधीर सिंह ने खेल की दुनिया में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 18 साल की उम्र से ही वे शॉटगन निशानेबाजी (12 बोर) में भारतीय टीम का हिस्सा रहे थे और ओलंपिक पदक को छोड़कर लगभग हर बड़ा पदक जीता। उन्होंने एडमंटन में राष्ट्रमंडल खेलों में जीत हासिल की, एशियाई खेलों में कई पदक जीते और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी महासंघ से भी पदक प्राप्त किए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने खेल राजनीति और खेल प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सर्वसम्मति से एशियाई ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष चुने गए और चीन में आयोजित एशियाई खेलों में भारतीय दल का नेतृत्व किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के भीतर भी महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।’’

अपनी संगीत विरासत के बारे में बात करते हुए इस पूर्व सांसद ने कहा, ‘‘पटियाला घराना अपनी समृद्ध संगीत विरासत के लिए जाना जाता है और कई दिग्गज संगीतकारों ने उनके घर का दौरा किया जिनमें राजन-साजन मिश्रा जी और पंडित भीमसेन जोशी जी शामिल थे। पटियाला अपने व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है और पटियाला की खान-पान की परंपराओं और व्यंजनों पर आधारित एक किताब जल्द ही प्रकाशित होने वाली है। राजा रणधीर सिंह को खाना पकाने का बहुत शौक था और वे स्वयं असाधारण रूप से उच्च गुणवत्ता वाला भोजन तैयार करते थे।’’

राजभरतेंद्र ने कहा, ‘‘वे एक अत्यंत प्रभावशाली व्यक्तित्व थे जिनका राजनीतिक नेताओं, शाही परिवारों और युवा पीढ़ियों द्वारा समान रूप से सम्मान किया जाता था। कल पीटी उषा भी उन्हें श्रद्धांजलि देने आईं थीं। उनके माध्यम से पटियाला को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वे मेरे लिए एक बड़े भाई की तरह थे। हमारे परिवारों के बीच पीढ़ियों से गहरे संबंध रहे हैं। यह रियासत कभी ‘हर की पौड़ी’ तक फैली हुई थी। आज यह देखकर बहुत दुख हो रहा है कि जिस व्यक्ति ने अपना बचपन यहां शिकार करते हुए और गंगा के तट पर खेलते हुए बिताया आज हम सबके सामने यहीं उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है।’’

भाषा सुधीर

सुधीर


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