बेतरतीब द्विपक्षीय श्रृंखला का दौर खत्म, टेस्ट और वनडे में नए बदलाव जरूरी: आईसीसी सीईओ

बेतरतीब द्विपक्षीय श्रृंखला का दौर खत्म, टेस्ट और वनडे में नए बदलाव जरूरी: आईसीसी सीईओ

बेतरतीब द्विपक्षीय श्रृंखला का दौर खत्म, टेस्ट और वनडे में नए बदलाव जरूरी: आईसीसी सीईओ
Modified Date: August 12, 2026 / 03:49 pm IST
Published Date: August 12, 2026 3:49 pm IST

… भरत शर्मा …

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजोग गुप्ता ने कहा है कि बिना किसी स्पष्ट उद्देश्य और संदर्भ के आयोजित की जाने वाली द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखलाओं का दौर अब समाप्त हो चुका है लेकिन लंबे समय से बहस के केंद्र में रहा वनडे प्रारूप का भविष्य मजबूत है क्योंकि उसका अस्तित्व विश्व कप से जुड़ा हुआ है। खेल कारोबार के अनुभवी विशेषज्ञ संजोग गुप्ता ने पिछले वर्ष जुलाई में आईसीसी के सीईओ का पद संभाला था। ऐसे समय में जब दुनिया भर में टी20 लीगों के तेजी से विस्तार के बीच टेस्ट और वनडे क्रिकेट के भविष्य को लेकर लगातार बहस छिड़ी हुई है, उन्होंने इन दोनों पारंपरिक प्रारूपों के भविष्य और उनकी प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। गुप्ता ने पीटीआई को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘बिना किसी उद्देश्य और संदर्भ के आयोजित की जाने वाली द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखलाओं का दौर अब समाप्त होना चाहिए। क्रिकेट में अगर संदर्भ, परंपरा, प्रतिस्पर्धा और प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता नहीं होगी, तो देश इस खेल को लंबे समय तक टिकाऊ नहीं बना पाएंगे। इन सभी पहलुओं के लिए वित्तीय और गैर-वित्तीय, दोनों प्रकार के संसाधनों में पर्याप्त निवेश की आवश्यकता होती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘क्रिकेट के प्रति दर्शकों का जुड़ाव और रुचि बनाए रखने वाले चार प्रमुख आधार ‘संदर्भ, परंपरा, प्रतिस्पर्धा और प्रतिस्पर्धात्मक गुणवत्ता’ पर लगातार ध्यान केंद्रित करना जरूरी है। ऐसे में वनडे क्रिकेट केवल अस्तित्व बनाए रखने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी मजबूती के साथ विकसित हो सकता है।’’ आईसीसी सीईओ ने कहा, ‘‘क्रिकेट के समग्र प्रारूपों में वनडे की अपनी स्पष्ट और महत्वपूर्ण भूमिका है, जो पुरुष और महिला आईसीसी क्रिकेट विश्व कप से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। अब यह तय करने की जरूरत है कि भविष्य में वनडे क्रिकेट की पहचान क्या हो, इसे किस दिशा में विकसित किया जाए और इसमें अधिक से अधिक देशों की भागीदारी कैसे सुनिश्चित की जाए।’’ गौरतलब है कि द्विपक्षीय श्रृंखलाओं का कार्यक्रम सदस्य देशों के क्रिकेट बोर्ड स्वयं तय करते हैं। आईसीसी केवल विश्व कप और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप जैसे बहुराष्ट्रीय टूर्नामेंटों का आयोजन और कार्यक्रम निर्धारण करती है। द्विपक्षीय मुकाबलों से मिलने वाले प्रसारण और प्रायोजन अधिकार संबंधित क्रिकेट बोर्डों के पास ही रहते हैं। वर्तमान में भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े क्रिकेट बोर्ड ही नियमित रूप से टेस्ट क्रिकेट का आर्थिक भार उठा पा रहे हैं, जबकि अन्य पूर्ण सदस्य देशों के लिए टेस्ट क्रिकेट को वित्तीय रूप से लाभदायक बनाना चुनौती बना हुआ है। टी20 लीगों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण वनडे क्रिकेट की आकर्षण क्षमता भी प्रभावित हुई है। ‘जियोस्टार’ के पूर्व खेल प्रमुख रहे संजोग गुप्ता ने कहा कि क्रिकेट को टेनिस के विंबलडन और गोल्फ के द मास्टर्स जैसे प्रतिष्ठित आयोजनों से सीख लेनी चाहिए, जिन्होंने अपनी परंपरा को बनाए रखते हुए समय के साथ खुद को प्रासंगिक भी बनाए रखा है। उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य केवल वर्तमान स्थिति बनाए रखना नहीं, बल्कि निरंतर विकास करना होना चाहिए। आज के दौर में दर्शकों का ध्यान कई माध्यमों में बंट रहा है और कोई खेल अगर आगे नहीं बढ़ता तो उसका अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।’ गुप्ता ने माना, ‘‘ टेस्ट क्रिकेट की अपनी प्रतिष्ठा, विरासत और ऐतिहासिक महत्व है, लेकिन अगर इन विशेषताओं को आधुनिक दर्शकों के लिए प्रासंगिक और आकर्षक नहीं बनाया गया तो यह प्रारूप बोझिल हो सकता है।’’ उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट के अनुभव को अधिक रोचक बनाना होगा ताकि नई पीढ़ी के दर्शक इससे जुड़ सकें। साथ ही विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) ने टेस्ट क्रिकेट को नया संदर्भ और महत्व प्रदान किया है तथा इसे एक बड़े वैश्विक आयोजन के रूप में स्थापित किया है।’’ आईसीसी सीईओ ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट पर चर्चा के दौरान अक्सर उसकी विरासत और गौरव को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि आर्थिक व्यवहार्यता पर अपेक्षित गंभीरता से विचार नहीं होता। उनके अनुसार खेल के हर प्रारूप का मूल्यांकन उसकी लोकप्रियता और आर्थिक स्थिरता दोनों आधारों पर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर क्रिकेट के विस्तार का सबसे प्रभावी माध्यम फिलहाल टी20 क्रिकेट है, लेकिन इसके यह मायने नहीं कि वनडे और टेस्ट क्रिकेट के विकास की उपेक्षा की जाए। सूत्रों के अनुसार, आईसीसी में विश्व कप से पहले वनडे क्रिकेट के लिए अलग और समर्पित कार्यक्रम विंडो तैयार करने पर भी चर्चा चल रही है, ताकि इस प्रारूप को पर्याप्त महत्व और निरंतरता मिल सके। संजोग गुप्ता ने भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के अलावा अन्य देशों में भी टेस्ट क्रिकेट के लिए बेहतर कार्यक्रम निर्धारण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘क्रिकेट के प्रमुख आयोजनों की प्रतिष्ठा, महत्व और आकर्षण बढ़ाने के लिए आईसीसी लगातार निवेश करती रहेगी। कुछ देशों में टेस्ट क्रिकेट के प्रशंसकों का वर्ग बेहद मजबूत है लेकिन जरूरत इस बात की है कि सदस्य देशों को भी ऐसे अवसर मिलें, जिनसे उनके यहां टेस्ट मैच बड़े और महत्वपूर्ण आयोजनों के रूप में स्थापित हो सकें।’ गुप्ता के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट का कार्यक्रम वैज्ञानिक और संतुलित ढंग से तय किया जाना चाहिए तथा उसे पर्याप्त विपणन और प्रचार-प्रसार का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘इसके लिए विश्व टेस्ट चैंपियनशिप को और अधिक अर्थपूर्ण बनाना होगा तथा उसकी निरंतर कहानी बनाए रखनी होगी। इसके साथ ही टेस्ट मैचों का बेहतर कार्यक्रम निर्धारण, प्रभावी ब्रांडिंग और मार्केटिंग, दोनों टीमों के बीच उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा, अनुकूल खेल परिस्थितियां तथा दर्शकों को रोमांचक और गुणवत्तापूर्ण क्रिकेट का भरोसा कायम करना होगा। ये सभी पहलू मिलकर टेस्ट क्रिकेट को अधिक आकर्षक बनाएंगे।’’ भाषा आनन्द पंतपंत


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