नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) की संचालन संस्था ने बृहस्पतिवार को देश के कोचिंग तंत्र के संचालन के लिए राष्ट्रीय कोच प्रत्यायन (एक्रिडिटेशन) बोर्ड की स्थापना को मंजूरी दे दी।
यह फैसला इस साल की शुरुआत में पुलेला गोपीचंद की अध्यक्षता वाले कार्य बल की सिफारिश के अनुसार लिया गया।
साइ की 63वीं संचालन संस्था बैठक की अध्यक्षता खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने की और उन्होंने 2036 ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए पांच से 15 वर्ष की आयु के बच्चों में प्रतिभा पहचान प्रक्रिया को तेज करने की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में इस प्रतिभा खोज अभियान की घोषणा की थी।
मांडविया ने खेल मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा, ‘‘देश में ओलंपिक की मेजबानी होने से पहले अगले 10 वर्षों की योजना को इसी क्षण से पूरी गति के साथ शुरू करना होगा। ’’
कोचिंग व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों के तहत संचालन संस्था ने एनसीएबी की स्थापना को मंजूरी दी है।
एनसीएबी संशोधित खेलो इंडिया योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा और कोचों के प्रमाणन तथा उनके विकास के लिए अधिक व्यवस्थित ढांचा उपलब्ध कराएगा।
गोपीचंद की अगुवाई वाली समिति ने एनसीएबी को एक ऐसी शीर्ष संस्था के रूप में परिभाषित किया था जिसमें ‘कोचिंग, शिक्षा और खेल प्रशासन के क्षेत्र में देश की सर्वोच्च विशेषज्ञता’ शामिल होगी।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था, ‘‘यह बोर्ड मानक तय करने, प्रशिक्षण के मार्गों को मंजूरी देने, संस्थानों को मान्यता देने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च प्राधिकरण होगा। ’’
पैनल ने प्रस्ताव दिया था कि एनसीएबी में भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष, खेल सचिव, ‘अंतर-मंत्रालयी प्रभाव’ रखने वाले राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित व्यक्ति और शिक्षण पद्धति तथा शिक्षा प्रणालियों के विशेषज्ञ किसी प्रतिष्ठित शिक्षाविद को शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि साइ ने यह नहीं बताया कि इस संस्था की स्थापना की प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ेगी।
फिलहाल ओलंपिक खेलों के लिए कोच का प्रशिक्षण मुख्य रूप से पटियाला स्थित नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान में चलाए जाने वाले डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के माध्यम से होता है।
गोपीचंद की अगुवाई वाली समिति ने कहा था कि भारत का कोचिंग तंत्र बिखरा हुआ, असंगत और संस्थागत मजबूती के बजाय व्यक्तिगत प्रयासों पर अत्यधिक निर्भर है।
मांडविया ने कहा कि साइ को अपनी प्रतिभा खोज प्रणाली को मजबूत करना चाहिए और ऐसे खिलाड़ियों की पहचान के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करनी चाहिए जिनमें उच्चतम स्तर तक पहुंचने की क्षमता हो।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रतिभा की पहचान दो अलग-अलग चरणों में होनी चाहिए। पहले राज्य और जिला स्तर पर अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की पहचान की जाए और फिर उनकी क्षमता का आकलन करने के लिए उनका मूल्यांकन किया जाए कि उनमें फिटनेस, जुनून, समर्पण और अगले स्तर तक पहुंचने की क्षमता है या नहीं। ’’
भाषा नमिता सुधीर
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