(पूनम मेहरा)
नयी दिल्ली, 20 अगस्त (भाषा) एशियाई खेल 2018 की स्वर्ण पदक विजेता हेप्टाथलीट स्वप्ना बर्मन को प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) ने अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। उनके हाल में संन्यास लेने के फैसले के बावजूद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।
उनतीस वर्षीय स्वप्ना प्रतिबंधित एनाबॉलिक-एंड्रोजेनिक स्टेरॉयड बोल्डेनॉन के सेवन के लिए पॉजिटिव पाई गई हैं। उनका नाम नाडा की अस्थायी रूप से निलंबित खिलाड़ियों की हालिया सूची में शामिल है।
नाडा के एक विश्वसनीय सूत्र ने पीटीआई को बताया, ‘‘निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा और उनके संन्यास लेने के बावजूद उन्हें अस्थायी रूप से निलंबित रखा गया है। उन्हें सुनवाई के लिए उपस्थित होना होगा और वह बी नमूने की जांच का अनुरोध कर सकती हैं। ’’
सूत्र ने कहा, ‘‘अगर वह भविष्य में किसी भी समय संन्यास से वापसी करती हैं, तो दोषी पाए जाने की स्थिति में उनके खिलाफ सभी प्रतिबंध लागू रहेंगे और उन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। संन्यास की घोषणा किसी को भी डोपिंग से जुड़े अपराध से मुक्त नहीं करती। ’’
स्वप्ना के अस्थायी निलंबन के अलावा हॉकी खिलाड़ी मयंक शर्मा पर पिछले साल प्रतियोगिता से बाहर की गई डोप जांच में विफल रहने के कारण चार साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
इसके अलावा 19 वर्षीय धाविका संजना सिंह को प्रतिबंधित स्टेरॉयड के लिए पॉजिटिव पाए जाने के बाद पांच साल का प्रतिबंध दिया गया है जिन्होंने पिछले साल सैफ सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में महिलाओं की 1500 मीटर और 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीते थे।
मयंक और संजना दोनों पहले से ही अस्थायी निलंबन झेल रहे थे।
हालांकि नाडा की नवीनतम प्रतिबंध सूची में सबसे बड़ा नाम स्वप्ना का है।
स्वप्ना एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय हेप्टाथलीट थीं। उन्होंने 2018 जकार्ता एशियाड में शीर्ष स्थान हासिल कर यह उपलब्धि दर्ज की थी।
उन्होंने इस महीने की शुरुआत में संन्यास की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि चोटों से जूझता उनका शरीर अब प्रतियोगिताओं की कठिन चुनौतियों को सहन करने में सक्षम नहीं है।
बोल्डेनोन टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करने के लिए जाना जाता है और मानव शरीर के लिए इसका कोई चिकित्सीय उपयोग नहीं है।
स्वप्ना के मामले में इसका पता ‘गैस क्रोमैटोग्राफी-कम्बशचन-आइसोटोप रेशो मास स्पेक्ट्रोमेट्री’ जांच के जरिए चला। यह एक उन्नत विश्लेषणात्मक तकनीक है जिसका इस्तेमाल प्राकृतिक हार्मोन और कृत्रिम रूप से लिए गए हार्मोन के बीच अंतर करने के लिए किया जाता है।
उन्होंने 2016 ओलंपिक खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था।
पूर्व एशियाई चैंपियन स्वप्ना के दोनों पैरों में जन्म से ही छह-छह उंगलियां थीं। हालांकि उनके करियर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक था। इसके बाद कई ‘स्पोर्ट्सवियर ब्रांड’ ने उनके लिए विशेष रूप से तैयार किए गए जूते बनवाए थे।
स्वप्ना ने शिकायत की थी कि पांच उंगलियों वाले खिलाड़ियों के लिए बनाए गए सामान्य जूतों में अपने पैरों को फिट करने की कोशिश करने के कारण उनके पैरों में छाले पड़ जाते थे।
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के पास घोसपाड़ा गांव में बेहद गरीबी में पली-बढ़ीं स्वप्ना ने हाल ही में राजनीति में भी कदम रखा था। उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर राज्य विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
भाषा नमिता सुधीर
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