सोबर्स महानतम आलराउंडर में निर्विवाद रूप से नंबर एक रहेंगे : भारतीय कमेंटेटर सुशील दोशी
सोबर्स महानतम आलराउंडर में निर्विवाद रूप से नंबर एक रहेंगे : भारतीय कमेंटेटर सुशील दोशी
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) भारत के वरिष्ठ क्रिकेट कमेंटेटर सुशील दोशी ने सर गारफील्ड सोबर्स के निधन को क्रिकेट जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि जब भी खेल के महानतम हरफनमौला खिलाड़ियों की चर्चा होगी, सोबर्स का नाम निर्विवाद रूप से सबसे ऊपर रहेगा।
क्रिकेट इतिहास के महानतम हरफनमौला माने जाने वाले सोबर्स का शुक्रवार को बारबाडोस में 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह 11 दिन बाद अपना 90वां जन्मदिन मनाने वाले थे।
दोशी को वेस्टइंडीज के इस महान खिलाड़ी के साथ कमेंट्री बाक्स साझा करने का अवसर मिला था।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी क्रिकेट के महानतम हरफनमौला खिलाड़ियों की बात होगी, सोबर्स का नाम निर्विवाद रूप से पहले स्थान पर रहेगा। यदि महानतम क्रिकेटरों की सूची बनाई जाए तो दुनिया के शीर्ष पांच खिलाड़ियों में उनका नाम हमेशा शामिल रहेगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वह महान आलराउंडर ही नहीं, बल्कि ऐसे कप्तान भी थे जिन्होंने वेस्टइंडीज की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया और अपने खेल से दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों का दिल जीता।’’
वेस्टइंडीज के 1966-67 के भारत दौरे को याद करते हुए दोशी ने कहा, ‘‘मुंबई टेस्ट में सोबर्स ने बेहद आक्रामक और जोखिम भरी बल्लेबाजी करते हुए चौथे दिन ही वेस्टइंडीज को जीत दिला दी थी। दरअसल, वह घुड़दौड़ देखने जाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मैच जल्दी खत्म कर दिया। उन्हें जीवन की अच्छी चीजों का शौक था और उनका कहना था कि इन शौकों को पूरा करने के लिए क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करना जरूरी है।’’
दोशी ने बताया कि मैदान पर अपार आत्मविश्वास और दबदबा रखने वाले सोबर्स का एक अंधविश्वासी पक्ष भी था।
उन्होंने बताया कि सोबर्स का मानना था कि बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरने से पहले यदि वह सुनील गावस्कर के कंधे को छू लें तो उन्हें किस्मत का साथ मिलेगा।
दोशी ने कई यादें साझा करते हुए 1971 के भारत के ऐतिहासिक वेस्टइंडीज दौरे का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। इसी श्रृंखला में युवा सुनील गावस्कर ने 774 रन बनाकर इतिहास रचा था।
उन्होंने कहा, ‘‘इतने महान खिलाड़ी होने के बावजूद सोबर्स में भी आम इंसानों जैसी कुछ मान्यताएं थीं। 1971 की उस श्रृंखला में वेस्टइंडीज 0-1 से पीछे था और आखिरी टेस्ट खेला जा रहा था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वेस्टइंडीज को जीत के लिए 262 रन बनाने थे और सोबर्स जैसे बल्लेबाज के लिए यह कोई मुश्किल लक्ष्य नहीं था।’’
दोशी के अनुसार, सोबर्स को पूरा विश्वास था कि गावस्कर उनके लिए ‘लकी चार्म’ हैं। उनका मानना था कि बल्लेबाजी से पहले भारतीय सलामी बल्लेबाज के कंधे पर हल्की सी थपकी देने से वह शतक बनाएंगे और टीम को जीत दिलाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘सोबर्स मानते थे कि गावस्कर बेहद भाग्यशाली हैं। उनका विश्वास था कि यदि वह उनके कंधे को छू लेंगे तो शतक बनाएंगे और टीम मैच जीत जाएगी।’’
भारतीय कप्तान अजीत वाडेकर की सूझबूझ के कारण हालांकि सोबर्स गावस्कर तक नहीं पहुंच सके और सस्ते में आउट हो गए।
वाडेकर ने दरअसल गावस्कर को ड्रेसिंग रूम के बाथरूम में भेजकर बाहर से दरवाजा बंद कर दिया था, ताकि सोबर्स उन्हें छू न सकें।
दोशी ने कहा, ‘‘वाडेकर को सोबर्स के इस अंधविश्वास की पूरी जानकारी थी। जब सोबर्स मैदान से भारतीय ड्रेसिंग रूम की ओर बढ़े तो वाडेकर ने पूछा, ‘सनी कहां है?’ किसी ने बताया कि वह बाथरूम में हैं। वाडेकर तुरंत वहां पहुंचे, बाहर से दरवाजा बंद किया और चाबी अपनी जेब में रख ली।’’
उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘‘सोबर्स गावस्कर के कंधे को छुए बिना ही मैदान पर लौट गए। किस्मत का खेल देखिए, आबिद अली की पहली ही गेंद पर वह बिना खाता खोले आउट हो गए। इससे पता चलता है कि चाहे खिलाड़ी कितना भी महान क्यों न हो, उसकी अपनी कुछ मान्यताएं और कमजोरियां जरूर होती हैं।’’
भाषा नमिता आनन्द
आनन्द

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