सुचिका तारियाल: छेड़छाड़ की शिकार से एशियाई खेलों की पदक विजेता तक
सुचिका तारियाल: छेड़छाड़ की शिकार से एशियाई खेलों की पदक विजेता तक
नागोया, 20 सितंबर (भाषा) सुचिका तारियाल जब 12 साल की थी तब छेड़छाड़ की एक घटना ने उनको व्यथित कर दिया और उन्होंने उसी समय प्रण लिया कि उन्हें लड़ना सीखना होगा।
इस घटना के 24 साल बाद इस 36 वर्षीय खिलाड़ी ने हरियाणा के जूडो मैट से एशियाई खेलों के पोडियम तक सफर तय किया। उन्होंने रविवार को यहां मंगोलिया की अल्तांचिमेग बैगलमा को 2-0 से हराकर महिलाओं के पारंपरिक मिक्स्ड मार्शल आर्ट (एमएमए) के 60 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में प्रवेश करके भारत के लिए पदक पक्का किया।
नागोया सिटी इनाए स्पोर्ट्स सेंटर में सोमवार को होने वाले सेमीफाइनल मुकाबले में सुचिका स्वर्ण पदक जीतने की कोशिश करेगी। इस प्रतियोगिता में अंतिम चार में पहुंचने पर पदक पक्का हो जाता है। सेमीफाइनल में हारने वाली दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलता है।
सुचिका ने कहा, ‘‘देश के लिए एक पदक पक्का करना बहुत बड़ी बात है। अब मैं स्वर्ण पदक हासिल करने के लिए किसी तरह की कसर नहीं छोडूंगी।’’
महिला पारंपरिक एमएमए 60 किलोग्राम वर्ग में स्ट्राइकिंग, टेकडाउन, ग्रैपलिंग और ग्राउंड फाइटिंग का संयोजन होता है, जिसमें अंडर-60 किलोग्राम वर्ग के खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा करते हैं। एमएमए को पहली बार एशियाई खेलों में शामिल किया गया है।
सुचिका जूडो, जिउ-जित्सु और एमएमए जैसे खेलों की अनुभवी खिलाड़ी हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘बचपन से ही मेरा सपना था कि मैं ऐसा खेल सीखूं जिसमें लड़ना पड़े, इसलिए मैंने जूडो को चुना। उसी सफर ने मुझे यहां तक पहुंचाया है। यह अगले स्तर पर जाने के लिए आधार को मजबूत करने जैसा है, और जूडो ने इसमें मेरी बहुत मदद की है।’’
उनका यह सफर हरियाणा के रोहतक से शुरू हुआ जहां वह एक साधारण और रूढ़िवादी परिवार में पली-बढ़ीं। जब वह 12 साल की थी तब छेड़छाड़ की एक घटना ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने आत्मरक्षा के लिए जूडो सीखना शुरू किया।
उन्होंने सबसे पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में और बाद में पालम के दादा देव मंदिर केंद्र में प्रशिक्षण लिया जिसके बाद उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) भोपाल में अपने कौशल को निखारा।
सुचिका ने इसके बाद जूडो में प्रभावशाली करियर बनाया। उन्होंने 20 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और आठ बार राष्ट्रीय चैंपियन बनी।
उन्होंने 2019 राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप और 2019 दक्षिण एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता। सुचिका ने इसके अलावा 2018 राष्ट्रमंडल जूडो चैंपियनशिप में रजत पदक भी जीता।
सुचिका ने जिउ-जित्सु में भी हाथ आजमाए और इस खेल में भी अपनी विशेष छाप छोड़ी। उन्होंने 2024 जेजेआईएफ जिउ-जित्सु विश्व चैंपियनशिप में महिलाओं के 63 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता।
एमएमए में उनका सफर काफी पहले 2017 में शुरू हो गया था, लेकिन उसके बाद उन्होंने सात साल का ब्रेक लिया और इस दौरान जूडो और जिउ-जित्सु में प्रतिस्पर्धा करना जारी रखा।
उन्होंने 2024 में पेशेवर एमएमए में वापसी की और महिला स्ट्रॉवेट डिवीजन में ब्रेव कॉम्बैट फेडरेशन के साथ कई मुकाबलों का अनुबंध किया। उन्होंने दिसंबर 2024 में बहरीन में ब्रेव सीएफ 92 में जीत हासिल की।
एमएमए में कदम रखना उनके लिए एक चुनौती भरा सफर रहा है। उन्होंने पहले और दूसरे एमएमए-एसएफआई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और उसके बाद जनवरी और मई 2026 में तीसरे और चौथे एशियाई मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किए।
एशियाई खेलों की तैयारी के लिए उन्होंने मुंबई में कोच निखिल और सुशोभन के मार्गदर्शन में छह सप्ताह के शिविर में भाग लिया।
उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं मुंबई के ट्रैफिक में फंस जाती थी तो मेरे कोच मेरा इंतज़ार करते थे ताकि मैं आकर अपना प्रशिक्षण पूरा कर सकूं। वे मुझ पर पूरा ध्यान देते थे और मेरी तकनीक को निखारने में लगे रहते थे।’’
सुचिका ने कहा, ‘‘यहां तक पहुंचने में मुझे बहुत समय लगा। इसमें बहुत मेहनत लगी। पहले जूडो, फिर अन्य खेल और अब एमएमए। यह एक नया खेल है, बिल्कुल नया मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स।’’
भाषा
पंत सुधीर
सुधीर

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