(देवार्चित वर्मा)
मुंबई, सात फरवरी (भाषा) क्रिकेट के दीवाने देश के नूरे नजर बने वैभव सूर्यवंशी ने अपना सर्वश्रेष्ठ फाइनल के लिये बचा रखा था जबकि कप्तान आयुष म्हात्रे जरूरत के समय संकटमोचक साबित हुए और उनकी युवा ब्रिगेड के हर सदस्य ने अपनी भूमिका बखूबी निभाते हुए इंग्लैंड को सौ रन से हराकर भारत को छठी बार अंडर 19 विश्व कप दिलाया ।
आईपीएल में अपनी प्रतिभा की बानगी पहले ही दे चुके चौदह वर्ष के सूर्यवंशी में भारत के महान खिलाड़ियों की लीग में शामिल होने का माद्दा है ।
मुंबई के एक और बल्लेबाज ने दृढता और आत्मविश्वास की नयी कहानी लिखी और वह है कप्तान म्हात्रे जिन्होंने खराब फॉर्म को अलविदा कहकर नॉकआउट में अहम भूमिका निभाई ।
अंडर 19 टीम के कुछ प्रमुख खिलाड़ियों पर नजर डालते हैं जिन्होंने भारत को छठी बार अंडर 19 विश्व कप विजेता बनाया ।
वैभव सूर्यवंशी :
फाइनल में 80 गेंद में 15 चौकों और 15 छक्कों के साथ 175 रन बनाने वाले सूर्यवंशी की सफलता ने भारतीय क्रिकेट के बेहतरीन ढांचे का भी परिचय दिया है जो युवा प्रतिभाओं को तलाशता और तराशता है । पिछले साल आईपीएल में दूसरा सबसे तेज शतक लगाने वाले बिहार के समस्तीपुर के इस 14 वर्षीय युवक का नाम आज फिर पूरे भारत की जबां पर है ।
आयुष म्हात्रे :
सेमीफाइनल से पहले छह मैचों में सिर्फ एक अर्धशतक लगा सके मुंबई के इस खिलाड़ी की आलोचना होने लगी थी । पाकिस्तान के खिलाफ खाता नहीं खोल सके लेकिन 21 रन देकर तीन विकेट लिये और भारत की जीत के सूत्रधार बने । फिर अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में 62 और फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 53 रन बनाये ।
आरोन जॉर्ज :
हैदराबाद के लिये खेलने वाले केरल के आरोन जॉर्ज को उनकी प्रवाहमय पारियों के लिये जाना जाता है । टूर्नामेंट में अधिकांश मैचों में वह रन नहीं बना सके लेकिन अफगानिस्तान के खिलाफ सेमीफाइनल में 300 से अधिक के लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने 115 रन बनाये । ऐसे समय में जब टीम को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी ।
विहान मल्होत्रा :
फाइनल में सूर्यवंशी 175 रन बनाकर भले ही उनसे आगे निकल गए हों लेकिन 60 की औसत से एक शतक समेत 240 रन बनाने वाले विहान के प्रदर्शन में निरंतरता काबिले तारीफ थी । भारत के लिये सर्वाधिक रन बनाने वाले वह दूसरे बल्लेबाज बने । अपनी गलतियों को जल्दी सुधारने के लिये मशहूर विहान जब तक बड़ा स्कोर नहीं बनाते, चैन से नहीं बैठते ।
वेदांत त्रिवेदी :
पाकिस्तान के खिलाफ आखिरी लीग मैच में 68 रन बनाने वाले वेदांत उस समय क्रीज पर आये थे जब स्कोर तीन विकेट पर 47 रन था । अहमदाबाद के 18 वर्ष के इस खिलाड़ी को दबाव के हालात में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और शांतचित्त रहने के लिये जाना जाता है ।
अभिज्ञान कुंडू :
नवी मुंबई के इस खिलाड़ी को क्रिकेट कोचिंग में इसलिये डाला गया था ताकि अभ्यास करके थक जायें और समय पर सो सकें । अथक परिश्रम करने वाले कुंडू बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग के अभ्यास से पीछे नहीं हटते । लगातार उम्दा पारियां खेलने वाले कुंडू का लक्ष्य सीनियर टीम में उपयोगी विकेटकीपर बल्लेबाज बनना है । महेंद्र सिंह धोनी की तरह ।
आर एस अम्बरीश :
तमिलनाडु के अम्बरीश ने फाइनल में 56 रन देकर तीन विकेट लेने से पहले पाकिस्तान के खिलाफ निचले क्रम पर 29 रन बनाये थे । इसके अलावा न्यूजीलैंड के खिलाफ 29 रन देकर चार विकेट लिये ।
दीपेश देवेंद्रन :
तमिलनाडु के एक किसान वासुदेवन देवेंद्रन के बेटे दीपेश को अपने शुरूआती दिनों में सही मार्गदर्शन मिला और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह इस लय को कायम रखना चाहते हैं । उन्होंने सेमीफाइनल और फाइनल में दो दो विकेट लिये ।
खिलन पटेल :
जबर्दस्त आत्मविश्वास के धनी खिलन का इरादा रविंद्र जडेजा की तरह बायें हाथ का स्पिनर और आक्रामक बल्लेबाज बनने का है ।
भाषा
मोना
मोना