नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) भारत के सलामी बल्लेबाज संजू सैमसन ने कहा कि टीम की जरूरतों पर खरा उतरने की उनकी चाहत ने उन्हें हाल में हुए टी20 विश्व कप के दौरान अंतिम एकादश में जगह बनाने के लिए अपने ही टीम के साथियों से मुकाबला करने की शुरुआती हिचकिचाहट पर काबू पाने में मदद की जिससे उन्होंने कई शानदार प्रदर्शन कर जीत दिलाई।
संजू ने ‘इंडिया टुडे कॉन्क्लेव’ के दौरान कहा, ‘‘मैं उस तरह का इंसान हूं जो अपने लिए अच्छा करने के बजाय दूसरों के लिए ज्यादा अच्छा करता है। न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला में मैं टीम में जगह बनाने के लिए अपने ही साथियों से मुकाबला कर रहा था और मुझे यह बिल्कुल भी सहज नहीं लग रहा था। ’’
संजू ने माना कि अंतिम एकादश में जगह नहीं मिल पाने की वजह से वह पूरी तरह से टूट गए थे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बहुत ज्यादा बेचैन था क्योंकि मुझे पता था कि मेरा सपना अब बहुत करीब है। लेकिन टीम अलग-अलग संयोजन आजमा रही थी तो टीम में हूं या नहीं, उस समय मेरे मन में इसी तरह के ख्याल चल रहे थे। ’’
संजू ने कहा, ‘‘मैं पूरी तरह से टूट गया था क्योंकि मेरा सपना विश्व कप जीतना था। और मैं तो टीम की शुरुआती एकादश में भी शामिल नहीं था। इसलिए मैं असल में पांच छह दिनों के लिए सबसे दूर चला गया था और मैंने खुद को फिर से संभालना शुरू किया। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने खुद को तैयार करना शुरू कर दिया था, यह जानते हुए कि आपको कभी नहीं पता कि खेल आपको बदले में क्या देगा। ’’
संजू को यह बहुप्रतीक्षित मौका चेन्नई में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत के सुपर आठ मैच के दौरान मिला। 31 वर्षीय खिलाड़ी ने बहुत ज्यादा रन नहीं बनाए, लेकिन उन्हें टीम प्रबंधन से यह भरोसा मिला कि वह अगले चार मैच में अंतिम एकादश में शामिल रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता था कि टीम प्रबंधन को मुझ पर भरोसा है। जिम्बाब्वे मैच से ही, हमें चार में से चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी। इसलिए तभी मेरे लिए चीजें सकारात्मक हो गईं और मैं बहुत जोश में आ गया। ’’
उनके साथी सलामी जोड़ीदार अभिषेक शर्मा थोड़े निराश थे कि वह विश्व कप के दौरान वैसी पारियां नहीं खेल पाए जैसी उनसे उम्मीद थी, इसकी एक वजह पेट का संक्रमण भी था। लेकिन इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने फाइनल मुकाबले में एक अहम अर्धशतक बनाया और टीम की जीत में योगदान देकर बहुत खुश थे।
संजू ने कहा, ‘‘जिस दिन से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरा एकमात्र लक्ष्य सबसे पहले देश के लिए खेलना था। और एक बार जब आप देश के लिए खेल लेते हैं तो आपका सबसे बड़ा लक्ष्य अपने देश के लिए आईसीसी ट्रॉफियां जीतना होता है। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘शुरुआत वैसी नहीं थी जैसी मैं चाहता था, लेकिन फिर भी मैं खुश था क्योंकि टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी और हम मैच जीत रहे थे। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सपना था कि मैं एक दिन विश्व चैंपियन बनूं। यह सिर्फ एक ट्रॉफी की बात नहीं है, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि मैं अपने देश के लिए कितनी ट्रॉफियां जीत सकता हूं। मैं इसी सोच के साथ खेलता हूं। ’’
अभिषेक ने कहा कि उन्हें शीर्ष क्रम में संजू के साथ बल्लेबाजी करने में बहुत मजा आया। उन्होंने कहा, ‘‘संजू भाई बहुत सुलझे हुए इंसान हैं। बहुत प्यार करने वाले और बहुत ख्याल रखने वाले इंसान। आप जानते हैं कि जब आपकी टीम में ऐसे खिलाड़ी होते हैं तो आपको लगता है कि कोई है जो आपके पीछे खड़ा है। हमारे लिए संजू सैमसन हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। ’’
भाषा नमिता
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