मेरे दिमाग में ओलंपिक में जगह पक्की करने का विचार घूम रहा था: अनाहत

Ads

मेरे दिमाग में ओलंपिक में जगह पक्की करने का विचार घूम रहा था: अनाहत

  •  
  • Publish Date - September 26, 2026 / 03:05 PM IST,
    Updated On - September 26, 2026 / 03:05 PM IST

नागोया, 26 सितंबर (भाषा) भारत की युवा स्क्वाश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने खुलासा किया कि शनिवार को एशियाई खेलों के महिला एकल के सेमीफाइनल के दौरान ओलंपिक में जगह पक्की करने का विचार उनके दिमाग में लगातार घूम रहा था।

अनाहत ने दो गेम से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए जापान की सतोमी वातानाबे को हराया।

सेमीफाइनल में अनाहत 0-2 से पीछे चल रही थी। इस 18 वर्षीय भारतीय खिलाड़ी ने शानदार वापसी करते हुए अगले तीन गेम जीतकर मैच 3-2 (9-11 11-13 12-10 11-6 11-3) से अपने नाम किया और फाइनल में जगह बनाई।

एशियाई खेलों में पुरुष और महिला एकल वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता दोनों ही 2028 में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए सीधे क्वालीफाई करेंगे।

अनाहत ने जीत के बाद कहा, ‘‘जब मैं पीछे चल रही थी तो मेरे दिमाग में सबसे पहले यही विचार आया कि ओलंपिक में जगह बनाने का मौका इतनी जल्दी हाथ से नहीं जाने देना चाहिए। मुझे इसके लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। यह बात बार-बार मेरे दिमाग में घूम रही थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यही वह चीज है जो मुझे वास्तव में प्रेरित करती है। मुझ पर ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने का किसी तरह का दबाव नहीं था।’’

अनाहत ने कहा कि उनके कोच ने उन्हें शांत रहने और पूरे समय निरंतरता बनाए रखने की सलाह दी थी।

उन्होंने कहा, ‘‘पहले दो गेम के बाद मेरे कोच मुझसे यही कह रहे थे कि मुझे ज्यादा तनाव नहीं लेना चाहिए और मैं सही खेल रही हूं। मुझे बस निरंतरता बनाए रखने की जरूरत थी।’’

अनाहत से जब पूछा गया कि क्या यह उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ मैच था, उन्होंने कहा, ‘‘हां, यह मेरे करियर की सर्वश्रेष्ठ जीत है। वह विश्व रैंकिंग में पांचवें नंबर पर हैं और यह मेरे स्क्वाश करियर की अब तक की सबसे बड़ी जीत है। मैं बहुत खुश हूं। मैं उसके बारे में ज्यादा नहीं सोच रही थी।‘‘

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उसे बस एक और प्रतिद्वंदी के रूप में देखा, जिसके खिलाफ मैं पहले भी एक बार खेल चुकी थी। वह मुकाबला भी करीबी था। इस तरह की प्रतियोगिताओं में कुछ भी संभव है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि किसकी मानसिकता सही है और कौन वास्तव में कोर्ट पर अपना सब कुछ झोंकने के लिए तैयार है।’’

भाषा

पंत नमिता

नमिता