विश्व कप से पहले अमेरिका अपनी आव्रजन नीति पर पुनर्विचार करे: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख
विश्व कप से पहले अमेरिका अपनी आव्रजन नीति पर पुनर्विचार करे: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख
जिनेवा, 10 जून (एपी) संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष मानवाधिकार अधिकारी ने बुधवार को विशेष रूप से विश्व कप के दौरान अमेरिका में लागू आव्रजन नीतियों पर “व्यापक पुनर्विचार” की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने कहा कि 48 देशों के बीच 39 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले ही नस्लीय ‘प्रोफाइलिंग’, निगरानी और आव्रजन प्रवर्तन से जुड़े मुद्दे सामने आए हैं।
उन्होंने कुछ घटनाओं का उल्लेख किया जिसमें ईरान की टीम को एरिजोना के ट्रेनिंग शिविर से मेक्सिको स्थानांतरित किया जाना, कुछ ईरानी अधिकारियों को अमेरिकी वीजा नहीं मिलना, सोमालिया के एक शीर्ष अफ्रीकी रेफरी को मियामी में प्रवेश से रोका जाना और एक सेनेगल खिलाड़ी की हवाईअड्डे पर सुरक्षा जांच की तस्वीरें वायरल होना शामिल है।
तुर्क ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार एजेंसी मुख्यालय में पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने कुछ ऐसे दृश्य देखे हैं। ’’
उन्होंने कहा, ‘‘मैं उम्मीद करता हूं कि नस्लीय ‘प्रोफाइलिंग’, निगरानी और आव्रजन प्रवर्तन से जुड़े मुद्दे इस विश्व कप को वैसे प्रभावित नहीं करेंगे जैसे अब तक कर चुके हैं। ’’
अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के साथ मिलकर 104 में से ज्यादातर मैचों की मेजबानी कर रहा है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के तहत संघीय एजेंसियों की नीतियों की ही आलोचना हुई है।
ऑस्ट्रियाई वकील तुर्क ने कहा, ‘‘मुझे सच में उम्मीद है कि आव्रजन नियमों को लागू करने के तरीके में मानवाधिकारों और मानवीय गरिमा का सम्मान करने पर बड़े पैमाने पर पुनर्विचार किया जाएगा। खासकर विश्व कप के लिए उन नीतियों पर पुनर्विचार किया जाएगा जो दुर्भाग्य से इस समय अमेरिका में प्रचलित दिख रही हैं। ’’
उन्होंने कहा कि वैश्विक खेल ‘दुनिया को एकता और शांति में जोड़ने का माध्यम’ होने चाहिए। उनका कहना था कि बड़े खेल आयोजनों के लिए ऐसा वातावरण होना चाहिए जो खिलाड़ियों, दर्शकों और पूरे समाज के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक हो।
कुछ देशों जैसे मोरक्को और स्कॉटलैंड के प्रशंसकों ने बताया कि हजारों डॉलर खर्च करने के बावजूद उनके यात्रा दस्तावेज आखिरी समय पर रद्द या अस्वीकृत कर दिए गए।
फीफा के 2017 के नियमों के अनुसार मेजबान देश की वीजा प्रक्रिया ‘भेदभाव रहित’ होनी चाहिए, हालांकि साथ ही यह भी कहा गया था कि इसका राष्ट्रीय सुरक्षा और आव्रजन मानकों पर बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए।
एपी नमिता आनन्द
आनन्द

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